पहले शहर का पानी बहाते थे अब अपने के लिए भी है आफत

Published at :13 Jan 2017 5:45 AM (IST)
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पहले शहर का पानी बहाते थे अब अपने के लिए भी है आफत

हाल रहमान चौक के जलनिकासी व्यवस्था का घरों में गड्ढ़ा कर जमा करते व मोटर से बाहर निकालते हैं पानी सहरसा : ड्रेनेज सिस्टम के लिए सर्वे व निर्माण कार्य प्रारंभ होने में जितना विलंब हो रहा है. जलजमाव क्षेत्र के लोगों की धड़कनें उतनी ही बढ़ती जा रही है. लोगों को मानसून और उससे […]

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हाल रहमान चौक के जलनिकासी व्यवस्था का

घरों में गड्ढ़ा कर जमा करते व मोटर से बाहर निकालते हैं पानी
सहरसा : ड्रेनेज सिस्टम के लिए सर्वे व निर्माण कार्य प्रारंभ होने में जितना विलंब हो रहा है. जलजमाव क्षेत्र के लोगों की धड़कनें उतनी ही बढ़ती जा रही है. लोगों को मानसून और उससे पूर्व होने वाले बेमौसम बारिश की चिंता सता रही है. वे कहते हैं कि ड्रेनेज निर्माण में निश्चित रूप से लंबा समय लगेगा. यदि इस दिशा में अभी से काम शुरू नहीं किया गया तो इस बार भी उनका डूबना तय है.
बेडरूम में जमा कर फेंकते हैं पानी
जलजमाव की समस्या से त्रस्त रहमान चौक कभी शहर के पूर्वी इलाके के गंदे पानी के बहाव का प्रमुख रास्ता हुआ करता था. इसी मुहल्ले में शहर का सबसे बड़ा नाला बना हुआ है. जो दोनों ओर जलजमाव क्षेत्र को जोड़ पानी को आगे बढ़ाता था. वहां बसे लगभग एक सौ परिवार के लोग भी अपने घर के जलनिकासी के लिए सीधे इस नाले का उपयोग करते थे. लेकिन रैयतों के द्वारा दो वर्ष पूर्व दोनों ओर के जलजमाव क्षेत्र को मिट्टी से भर कर नाले को निष्क्रिय कर दिया है. जिससे इन घरों का पानी घरों में ही सिमट कर रह गया है. कुछ दिनों तक लोगों के घरों का पानी इसी बंद नाले में बहता रहा. लेकिन निकासी नहीं होने के कारण वह ढक्कन से बाहर आ सड़कों पर फैलता रहा. बाद में मुहल्लों के लोगों ने ही आपस में चंदा इकठ्ठा कर नाले के ऊपर सड़क पर मिट्टी डाल ऊंचा कर दिया. कुछ लोगों के घरों के आगे खाली जमीन बची थी तो वे गड्ढा बनाकर उसमें पानी गिराने लगे. लेकिन अधिकतर लोगों को अपने कमरे के अंदर ही पानी का चैंबर बनाना पड़ा है. चैंबर भर जाने के बाद वे रोज बाल्टी भर-भर पानी निकाल बाहर फेंकते हैं या फिर मोटर के सहारे उस जमा पानी की निकासी सड़क पर करते हैं.
बरसात में छोड़ देते हैं घर व मुहल्ला
रोज बार-बार बाल्टी से या मोटर से पानी निकालने की ड्यूटी बरसात में काम नहीं आता. क्योंकि आसपास के क्षेत्रों से नीचे होने के कारण हल्की बारिश में ही पहले इस मुहल्ले की सड़क पर पानी जमा होता जाता है. फिर वह पानी लोगों के घरों में पानी प्रवेश कर जाता है. मूसलधार बारिश शुरू होते ही इन्हें घर में जमीन पर रखे सामानों को ऊपर करने की अतिरिक्त ड्यूटी बन जाती है. फिर रसोई बनाने से लेकर खाने व सोने की भी समस्या गहराती चली जाती है. लगातार बारिश हुई तो उन्हें घर व मुहल्ला दोनों खाली करना पड़ता है. अपना घर-मकान होते हुए इन्हें किराये में अथवा सगे-संबंधियों के यहां शरणार्थी बनकर रहना पड़ता है. लोगों ने जिला प्रशासन से शीघ्र मास्टर प्लान बनाने व ड्रेनेज सिस्टम का काम शुरू कराने की मांग की है.
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