सहरसा : सदर थाना क्षेत्र के पुराना बार एसोसिएशन के पास से बीते 22 दिसंबर को सरस्वती नगर निवासी पिंटू कुमार की चोरी हुई सफारी गाड़ी (बीआर 19 जी 6264) को सहरसा पुलिस ने फारबिसगंज में बरामद किया. सदर थानाध्यक्ष भाई भरत ने बताया कि सअनि अरविंद मिश्रा के नेतृत्व में टीम गठित कर फारबिसगंज भेजा गया था. जहां स्थानीय पुलिस की मदद से एक गैरेज से सफारी बरामद किया गया. पुलिस ने एक युवक मो शमशेर को भी गिरफ्तार कर लिया.
उन्होंने बताया कि फारबिसगंज थाना में धारा 414 के तहत मामला दर्ज कर उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया है. मुख्य आरोपी मो गुड्ड फरार है. मालूम हो कि वाहन मालिक पुराना बार एसोसिएशन के पास 22 दिसम्बर को रात्रि में वाहन खड़ी कर चला गया. 23 दिसम्बर की सुबह आने पर देखा कि सफारी गायब थी. उन्होने रीतूराज नामक युवक जिसके पास (बीआर 19 एफ 3653) है पर गाड़ी चोरी का आरोप लगाया था.
नौ साल की उम्र में योगासन सिखा रही राजनंदिनी
जुनून Â दिल्ली सरकार से पा चुकी है पुरस्कार, भाइयों को मिला है गोल्ड मेडल
खजूरी गांव निवासी योग शिक्षक आचार्य प्रभाकर की नौ साल की बेटी राजनंदिनी ने अपनी योग विद्या से लोगों को अचंभित किया है. पिता से योग सीख उसने अपने छोटे भाइयों को भी सिखाया. इन दिनों वह विभिन्न शिविर में जा योगाभ्यास करा रही है.
म न में इच्छा हो, किसी काम के प्रति जुनून हो तो कोई भी कार्य बड़ा या कठिन नहीं होता. लक्ष्य को पाने में न तो उम्र बाधक बनती और न ही कहीं कोई दूसरी बाधा भी नहीं आती. आती भी है तो जुनून के प्रवाह में दबती, बिखरती चली जाती है. तीन छोटे भाई-बहनों ने अपनी प्रतिभा से इसे चरितार्थ ही नहीं किया है. बल्कि अपने योग के विस्तृत ज्ञान से लोगों को अचंभित कर दिया है.
पिता से ली शिक्षा
प्रखंड के खजूरी गांव निवासी योग शिक्षक आचार्य प्रभाकर की नौ वर्षीय पुत्री राजनंदिनी योगविद्या में निपुण है. पिता से प्राप्त ज्ञान का उपयोग सबसे पहले उसने अपने छोटे भाइयों आठ वर्षीय पुत्र जयभद्र मिश्र एवं छह वर्षीय सुभद्र को योगासनों के ज्ञान से परिपूर्ण कर किया है. पिता द्वारा लगाये जाने वाले शिविरों में भी राजनंदिनी बतौर प्रशिक्षक जाती है और लोगों को योग एवं आसनों के गुर सिखाती है. राजनंदिनी ने योग के कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया है और राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार जीत कर अपनी अलग पहचान बनायी है. सूक्ष्म क्रिया के अलावे सूर्य नमस्कार, तारासन, त्रियकतारासन, कटिचक्रासन, मेरूवक्रासन, अर्द्धमत्चंद्रासन, वज्रासन समूह के शशांकासन, मार्जरी आसन, व्याघ्रासन पर उसके परिपक्व ज्ञान उसकी प्रतिभा को परिलक्षित करते हैं.
भाइयों ने जीता गोल्ड मेडल
उत्तर प्रदेश योग एसोसिएशन की ओर से आयोजित 32वां योग चैंपियनशिप लखनऊ में आयोजित प्रतियोगिता में 26 से 29 दिसंबर को हैदराबाद के विजय भास्कर रेड्डी स्टेडियम में संपन्न 39वें नेशनल योगासन प्रतियोगिता में सुभद्र एवं जयभद्र ने योग के विभिन्न कठिन आसनों का प्रदर्शन कर वहां मौजूद लोगों को अचंभित कर दिया. इस प्रतियोगिता में देश के 18 राज्यों से 111 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया था. जिनका चयन लखनऊ में संपन्न अंतराष्ट्रीय योगा प्रतियोगिता में किया गया. इस उम्र से कम होने के बावजूद सुभद्र जयभद्र को बेहतर प्रदर्शन के लिए नेशनल प्रतियोगिता के लिए चयन किया गया था.
जहां सुभद्र व जयभद्र ने सूर्य नमस्कार, पवनमुक्तासन, चक्रासन सहित अन्य आसनों का प्रदर्शन कर लोगों को दांतों तले अंगुली चबाने पर मजबूर कर दिया. दोनों भाइयों ने प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त कर गोल्ड मेडल जीता. वहीं बहन राजनंदनी भी लगभग तीन वर्ष पूर्व दिल्ली में आयोजित योगासन प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा से लोगों का परिचय कराया. प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन से प्रभावित तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने राजनंदिनी को पुरस्कृत किया था. वहीं जस्टिस यूके धवन, एनके मल्होत्रा, आएएस अधिकारी देवदत्त शर्मा ने भी राजनंदिनी के योगासनों को सराहा था.