महिषी गांव के लोग हैं उत्साहित

Published at :16 Dec 2016 4:54 AM (IST)
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महिषी गांव के लोग हैं उत्साहित

आस्था. 2012 में सेवायात्रा की शुरुआत महिषी से ही की थी सीएम ने मुख्यमंत्री का अति प्राचीन सिद्ध शक्ति पीठ उग्रतारा मंदिर में पूजा-अर्चना व मंडन धाम पर आगमन की प्रशासनिक पुष्टि के बाद ग्रामीणों में हर्ष का माहौल है. महिषी : 17 दिसंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का मुख्यालय स्थित अति प्राचीन सिद्ध शक्ति […]

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आस्था. 2012 में सेवायात्रा की शुरुआत महिषी से ही की थी सीएम ने

मुख्यमंत्री का अति प्राचीन सिद्ध शक्ति पीठ उग्रतारा मंदिर में पूजा-अर्चना व मंडन धाम पर आगमन की प्रशासनिक पुष्टि के बाद ग्रामीणों में हर्ष का माहौल है.
महिषी : 17 दिसंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का मुख्यालय स्थित अति प्राचीन सिद्ध शक्ति पीठ उग्रतारा मंदिर में पूजा-अर्चना व मंडन धाम पर आगमन की प्रशासनिक पुष्टि के बाद ग्रामीणों में हर्ष का माहौल है. बता दें कि अपने पिछले कार्यकाल में 12 फरवरी 2012 को स्थानीय ऐतिहासिक, आध्यात्मिक व सांस्कृतिक विरासत को जान नीतीश ने अपने प्रमंडलीय सेवा यात्रा की शुरुआत यहीं से की थी.
मंदिर गर्भ गृह में प्रवेश से पूर्व आचार्य शत्रुघन चौधरी की अगुवाई में दर्जनों अबोध वेद पाठियों के सस्वर दुर्गा सप्तशती श्लोक व वेद पाठ को सुन मुख्यमंत्री अभिभूत हुए व विकास के कोसों दूर उग्रतारा मंदिर व मंडन धाम के सौंदर्यीकरण के लिए पर्यटन मंत्रालय के द्वारा तीन करोड़ 26 लाख का आवंटन मिला. इसी वर्ष आश्विन नवरात्रा में उग्रतारा महोत्सव का आयोजन कर बुद्ध वशिष्ठ की तपस्थली को पर्यटन मानचित्र पर प्रतिस्थापित करने का अधिकारिक पहल शुरू हुआ.
तत्कालीन पर्यटन मंत्री सुनील कुमार पिंटू ने थावे से उग्रतारा मंदिर तक शक्ति सर्किट से जोड़ने व पर्यटकीय संसाधनों की पूर्ति का भरोसा दिलाया गया था. ग्रामीणों के मुताबिक शक्ति सर्किट कनेक्शन की दिशा में अब तक तो कुछ पहल होता दिखाई नहीं पड़ता व मुख्यमंत्री द्वारा आवंटित राशि में निर्धारित समय सीमा के वर्षों बाद भी शत प्रतिशत कार्य पूरा नहीं कराया गया. पिछले महोत्सव में नव निर्मित भवनों का आनन-फानन में पर्यटन मंत्री के निर्धारित आगमन रद्द होने की सूचना पर प्रमंडलीय आयुक्त के द्वारा शिलालेख का अनावरण कर उद्घाटन सत्र की खानापूर्ति की गयी.
अब भी शौचालय सह स्नानागार, पुस्तकालय सह वाचनालय, विवाह भवन में ताला लगा है व श्रद्धालुओं व आगंतुकों के दैनिक प्रयोग में उपयोग नहीं हो पा रहा है. पिछले आठ वर्ष पूर्व बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष आचार्य किशोर कुणाल ने उग्रतारा मंदिर को न्यास बोर्ड से निबंधित किया था, लेकिन अब तक मंदिर न्यास व्यवस्था का समुचित संचालन नहीं हो पाया है. मंडन धाम अब भी अपनी लुप्त हो रही विरासत के संरक्षण की बाट जोह रहा है.
प्रसिद्ध उग्रतारा मंदिर.
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