सहरसा की दुर्दशा दूर कीजिए
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :23 Oct 2016 1:43 AM (IST)
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अपील. तेजस्वी जी, िवकास की सारी कहानी रह गयी है अधूरी तेजस्वी जी, जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण यह शहर न तो रहने लायक रह गया है और न ही चलने लायक. सहरसा की जनता ने आपसे कई उम्मीदें बना रखी है. जड़ और जमीन से जुड़ी समस्याओं के निदान के लिए लोग […]
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अपील. तेजस्वी जी, िवकास की सारी कहानी रह गयी है अधूरी
तेजस्वी जी, जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण यह शहर न तो रहने लायक रह गया है और न ही चलने लायक. सहरसा की जनता ने आपसे कई उम्मीदें बना रखी है. जड़ और जमीन से जुड़ी समस्याओं के निदान के लिए लोग आपकी ओर टकटकी लगाये देख रही है.
सहरसा : उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव जी, काफी कम उम्र में आपने राजनीति की ऊंची सीढ़ी पर चढ़ने में कामयाबी प्राप्त की है. आप जो बोलते हैं, वही करते भी हैं. जिससे जनता में आपकी बेहतर छवि बनी है.
आपकी कार्यकुशलता को देख कर जनता का आपके प्रति विश्वास बढ़ता जा रहा है. सधी भाषा में बोलना आपको और भी लोकप्रिय बनाता है. लिहाजा सहरसा की जनता ने आपसे कई उम्मीदें बना रखी है. जड़ और जमीन से जुड़ी समस्याओं के निदान के लिए आपकी ओर टकटकी लगाये देख रही है.
महीनों बाद भी विकराल है जलजमाव की स्थिति : तेजस्वी जी, नागरिकों को सुविधा देने वाली संस्था नगर परिषद यहां पूरी तरह फेल्योर है. इस पर किसी वरीय पदाधिकारी, मंत्री, सांसद या विधायक का नियंत्रण नहीं है. इसकी नकेल कसिये. शहर को साफ-सुथरा रखने के लिए यहां 280 सफाई कर्मचारी नियुक्त हैं.
लेकिन मुख्य सड़कों सहित जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों के आवास को छोड़ शायद ही कहीं सफाई की जाती हो. शहर के सभी छोटे नालों की दशा इतनी खराब है कि सफाई के अभाव में इसका गंदा पानी सालों भर बरसात का एहसास कराता रहता है. न तो नालों की सफाई की जाती है और न ही जलजमाव क्षेत्र के मुहाने को. अधिकार की छोटी-छोटी बातों के लिए नागरिकों को आंदोलन करना पड़ता है. कूड़ा जमा करने के लिए जगह-जगह कूड़ेदान तो लगाये गये हैं, लेकिन उठाव नहीं होता. जिससे सूअर उन कचरों को वहीं फैला और भी गंदगी बढ़ा दुर्गंध फैलाते हैं.
ऐसे ही कचरा पसरा रहता है मोहल्लों में.
जलजमाव से छुटकारा दिलाइए
तेजस्वी जी, जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण यह शहर न तो रहने लायक रह गया है और न ही चलने लायक. बीते सितंबर महीने से 11 अक्तूबर तक हुई बारिश से शहर जैसे डूब ही गया है. जिसका प्रभाव अभी भी देखा जा सकता है. शहर का कोई ऐसा मोहल्ला नहीं बचा, जहां लोगों ने जलजमाव को नहीं झेला. इतना ही नहीं, हर आवासीय कॉलोनियों में अधिकतर लोगों के घरों में पानी प्रवेश कर गया. वे अब भी सीपेज की समस्या को झेल रहे हैं.
त्राहिमाम की स्थिति आने पर लोगों ने पंप के सहारे सड़कों से पानी निकालना शुरू किया. तब प्रशासन भी हाथ बंटाने आगे आया. स्थिति इतनी गंभीर हो गयी थी कि सीएम के सचिव अतीश चंद्रा व आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत को भी यहां आना पड़ा. लेकिन तात्कालिक राहत के सिवाय कुछ भी नहीं किया जा सका. जबकि साल 2007 से ही जलनिकासी के लिए वाटर ड्रेनेज सिस्टम का मास्टर प्लान बन कर तैयार है. सरकार उसे स्वीकृति नहीं दे रही है.
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