भुगतान करें, नहीं तो कॉलेज बैंक की संपत्ति
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :16 Oct 2016 3:20 AM (IST)
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कार्रवाई. बैंक ने मेडिकल कॉलेज में चिपकाया 23 करोड़ बकाया का नोटिस, दिया आदेश लॉर्ड बुद्धा कोसी मेडिकल कॉलेज दोहरे संकट का सामना कर रहा है. एक ओर न्यायालय के छात्रों के पक्ष में फैसला सुनाया है, तो दूसरी ओर सेंट्रल बैंक ने उस पर 23 करोड़ रुपये बकाया नोटिस चिपकाया है . सहरसा : […]
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कार्रवाई. बैंक ने मेडिकल कॉलेज में चिपकाया 23 करोड़ बकाया का नोटिस, दिया आदेश
लॉर्ड बुद्धा कोसी मेडिकल कॉलेज दोहरे संकट का सामना कर रहा है. एक ओर न्यायालय के छात्रों के पक्ष में फैसला सुनाया है, तो दूसरी ओर सेंट्रल बैंक ने उस पर 23 करोड़ रुपये बकाया नोटिस चिपकाया है .
सहरसा : बैजनाथपुर स्थित लॉर्ड बुद्धा कोसी मेडिकल कॉलेज पर दोहरा संकट गहराने लगा है. एक तो एमसीआइ ने साल 2012 के बाद इस कॉलेज को नामांकन लेने की अनुमति नहीं दी है. दूसरी ओर शिकायत लेकर न्यायालय गये छात्रों के पक्ष में निर्णय सुनाते कोर्ट ने एमसीआइ सहित सरकार को इन सभी छात्र-छात्राओं का नामांकन अन्यत्र मेडिकल कॉलेज में कराने का आदेश दिया है. इधर सेंट्रल बैंक ने कॉलेज में 23 करोड़ रुपये जमा करने का नोटिस चिपका अक्तूबर के अंत तक जमा करने का निर्देश देते नहीं करने पर मेडिकल कॉलेज को बैंक की प्रोपर्टी बता दिया है.
क्या है मामला: प्राइवेट क्षेत्र में लार्ड बुद्धा मेडिकल कॉलेज इस इलाके का पहला और अब तक का एकमात्र मेडिकल कॉलेज है. मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआइ) ने इस निजी मेडिकल कॉलेज को 2012 में 100 छात्रों के नामांकन की इजाजत दी थी. फिर बाद के वर्षों में 2013 से 2016 तक एमसीआइ ने इसे नामांकन लेने की अनुमति नहीं दी. इजाजत नहीं मिलने की स्थिति में लार्ड बुद्धा कोसी मेडिकल कॉलेज को संबंधन भी नहीं मिल सका, लेकिन कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद साल 2013 में 19 छात्रों का नामांकन लिया गया.
एमसीआइ द्वारा कई मानकों का हवाला देकर अब तक काॅलेज को संबंधन नहीं दिया गया है. इससे वर्तमान में पढ़ रहे फर्स्ट बैच के छात्रों के सामने अजीब सी स्थिति पैदा हो गयी है. मान्यता नहीं रहने के कारण वे इंटर्नशिप नहीं कर सकते. मतलब वे पूरी तरह डॉक्टर नहीं बन सकते हैं.
कोर्ट गये थे 33 छात्र
प्रथम बैच के सौ छात्रों में 57 छात्रों ने सफलता पूर्वक चार वर्षों की पढ़ाई पूरी कर ली. इसमें से 33 छात्र ने कोर्ट की शरण में जाकर आगे की पढ़ाई और ट्रेनिंग की मुकम्मल व्यवस्था कराने की मांग की. न्यायालय ने एमसीआइ सहित केंद्र व राज्य सरकार को इन छात्रों का एडमिशन अन्यत्र मेडिकल कॉलेज में करा इनकी पढ़ाई पूरी कराने का आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा है कि लॉर्ड बुद्धा कोसी मेडिकल कॉलेज की स्थिति अच्छी नहीं है. यहां नामांकित छात्रों का भविष्य अधर में जा रहा है. कोर्ट ने 22 अक्तूबर तक छात्रों के अध्ययन-अध्यापन की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है.
सेंट्रल बैंक ने की है कार्रवाई
2012 से वर्तमान की स्थिति के बारे में लॉर्ड बुद्धा कोसी मेडिकल कॉलेज के अध्यक्ष व मुख्य कर्ताधर्ता डॉ पीके सिंह कहते हैं कि मेडिकल कॉलेज सभी आवश्यक संसाधनों से पूर्ण है. इसके बावजूद एमसीआइ द्वारा संबंधन नहीं दिया जाना चिंतनीय व आश्चर्यपूर्ण है. उन्होंने कहा कि संबंधन नहीं मिलने से कॉलेज की पढ़ाई बाधित हो रही है.
इधर सेंट्रल बैंक ने कॉलेज में सिक्यूरिटी इंटरेस्ट एक्ट 2002 का हवाला देते हुए संस्था पर 22,23,67,134 रुपये (बाइस करोड़ तेइस लाख सड़सठ हजार एक सौ चौंतीस) रुपये एवं ब्याज के बाबत एक नोटिस चिपका कर कहा है कि इसे अक्तूबर तक जमा कर दें. ऐसा नहीं होने पर कॉलेज बैंक की प्रोपर्टी मानी जायेगी. इससे कॉलेज के सामने अलग संकट खड़ा हो गया है.
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