थोक में दाल सस्ती खुदरा अब भी ज्यादा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :28 Aug 2016 3:50 AM (IST)
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महंगाई. ग्रामीण बाजार में अधिक मारामारी थोक भाव में कमी के बावजूद दाल की खुदरा कीमतें कम नहीं हुई हैं. इससे आम उपभोक्ताअों को परेशानी हो रही है. सहरसा : दलहन की कीमत थोक बाजार में तकरीबन 200 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक कम हुई है. बड़े मंडी में आयी मंदी के बाद थोक मंडी […]
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महंगाई. ग्रामीण बाजार में अधिक मारामारी
थोक भाव में कमी के बावजूद दाल की खुदरा कीमतें कम नहीं हुई हैं. इससे आम उपभोक्ताअों को परेशानी हो रही है.
सहरसा : दलहन की कीमत थोक बाजार में तकरीबन 200 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक कम हुई है. बड़े मंडी में आयी मंदी के बाद थोक मंडी में भी दालों के दाम नरम हुए हैं. अरहर, मसूर, चना, मूंग और मटर के दामों में गिरावट के बावजूद खुदरा दाल का बाजार जस का तस बरकरार है. फिलहाल थोक बाजार में जहां अरहर का दाल 110 रुपये से 95 रुपये, मसूर 68 रुपये से 60 रुपये, चना दाल 82 रुपये से 80 रुपये बिक रहा है,
वहीं खुदरा दुकानों में भी अरहर दाल 150 से 160, मसूर दाल 100 से 120, चना दाल 100 रुपये प्रति किलो बिक रहा है. खुदरा बाजार में बरकरार तेजी के कारण आम आदमी से लेकर थोक कारोबारी सभी परेशान हैं. एक तरफ सस्ते दर पर दाल आम आदमी तक पहुंचाने की सरकारी कवायद को ठेंगा दिखाते खुदरा कारोबारी आम आदमी की जेब कतरने का काम कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ खुदरा बाजार में तेजी बरकरार रहने से थोक मंडी में बिक्री नदारद है.
ऐसे में थोक कारोबारी स्टॉक को लेकर सकते में हैं.
बगैर कार्रवाई, ठगे जा रहे हैं उपभोक्ता: दाल के बढ़े दामों के बाद मचे हो-हल्ला और आम आदमी की परेशानी को देखते हुए सरकार ने दाल से संबंधित कानून बनाया. थोक कारोबारियों को निर्देश जारी होने के साथ सरकार द्वारा दाल का आयात किया गया. फिर भी खुदरा बाजार में दाम पर अंकुश नहीं लग सका और न ही दाम ही गिरे हैं. थोक बाजार में दाम गिरने के बावजूद उपभोक्ता बढ़ी हुई कीमत पर खुले बाजार में दाल खरीदने को विवश हैं.
वजह यह है कि न तो प्रशासन का इन पर कोई लगाम है और न ही दाम कम हो रहे हैं. बहरहाल खुदरा कारोबारियों की बल्ले-बल्ले और आम उपभोक्ताओं का हाल बेहाल है. विडंबना तो यह है कि थोक एवं खुदरा दोनों कारोबारियों को कानूनी लिहाज से लाइसेंस लेना पड़ता है, लेकिन सभी कानून केवल थोक कारोबारियों पर ही लागू किये जाते हैं.
बेलगाम हैं खुदरा कारोबारी
विडंबना तो यह है कि थोक एवं खुदरा दोनों कारोबारियों को कानूनी लिहाज से लाइसेंस लेना पड़ता है. लेकिन सभी कानून केवल थोक कारोबारियों पर ही लागू किये जाते हैं. इस तरह की बात थोक कारोबारियों द्वारा उठायी जाती रही है. उनका कहना है कि नियम, कायदे और कानून सबके लिए बराबर है. इसके बावजूद खुदरा बाजार पर कोई नियंत्रण प्रशासन द्वारा नहीं होने से थोक कारोबार पर इसका बुरा असर पड़ रहा है, जो थोक कारोबारी बाजार और थोक बाजार के हित में नहीं है.
गुलाबबाग मंडी पूर्णिया में दाल का भाव
दाल थोक(क्विंटल) खुदरा (प्रति किलो)
अरहर दाल 9500 150-160
मसूर दाल 6000 80-85
चना दाल 8200 95-100
मूंग दाल 6500 95-100
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