प्रत्याशी व पति नहीं, करोड़पति बनने की छिड़ गयी चर्चा

Published at :06 Apr 2016 6:41 PM (IST)
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प्रत्याशी व पति नहीं, करोड़पति बनने की छिड़ गयी चर्चा

प्रत्याशी व पति नहीं, करोड़पति बनने की छिड़ गयी चर्चा पंचायत चुनाव कुमार आशीष, सहरसा नगर प्रणाम काका, मैं पुवारी टोला वाले…राय जी का भतीजा हूं…इस बार पंचायत में मुखिया सीट पर चुनाव लड़ रहा हूं… आजकल ग्रामीण इलाकों में लोगों की दिनचर्या प्रत्याशियों के दर्शन से ही शुरू होती है. कहीं तो पति स्वयं […]

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प्रत्याशी व पति नहीं, करोड़पति बनने की छिड़ गयी चर्चा पंचायत चुनाव कुमार आशीष, सहरसा नगर प्रणाम काका, मैं पुवारी टोला वाले…राय जी का भतीजा हूं…इस बार पंचायत में मुखिया सीट पर चुनाव लड़ रहा हूं… आजकल ग्रामीण इलाकों में लोगों की दिनचर्या प्रत्याशियों के दर्शन से ही शुरू होती है. कहीं तो पति स्वयं लोगों को प्रत्याशी का पति बताते पंपलेट बांटते आपको मिल जायेंगें. एक प्रत्याशी दावे व इरादे से लोग फारिग होते भी नहीं है कि दूसरे पल आवाज आनी शुरू हो जाती है कि मामा…हम मुन्ना समिति में ध्यान राखब…हालांकि पंचायत चुनाव में स्थानीय जनमानस लोकतंत्र के महापर्व में अपनी तवज्जो देख आनंदित भी हो रहे हैं तो कई जरूरी काम के वक्त उनके आगमन से तंग भी हो जाते हैं. कौन बनेगा पंचायत में करोड़पतिपंचायत चुनाव में सबसे ज्यादा माथापच्ची मुखिया पद को लेकर हो रही है. बाकि पदों पर कोई खास गहमागहमी नहीं हो रही है. प्रत्याशी मतदाताओं को लुभाने के लिए भले ही चुनावी ताना-बाना बुन रहे हों, लेकिन मतादाता चुनाव में प्रत्याशियों के स्टेटस व हुए बदलाव को खंगाल रहे हैं. ग्रामीण बताते हैं कि बीते तीन चुनाव में विजयी हुए मुखिया प्रत्याशी की जीवनशैली में काफी परिवर्तन देखने को मिले हैं. शहरों में जमीन व चारपहिया वाहन उनकी जद में आ चुके हैं. प्रत्येक माह राशन से लेकर कोटा व इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ने वाले बच्चों पर मुखिया व मुखिया पति लाखों रुपये खर्च कर रहे हैं. ग्रामीण बताते हैं कि अब प्रत्याशी नहीं, कौन बनेगा पंचायत का नया करोड़पति, इस बात को लेकर चर्चा होती है. जनता भी पंचवर्षीय कार्यकाल में एक नये करोड़पति बनने योग्य उम्मीदवार की तलाश शुरू कर चुकी है. पंपलेट में सभी सुयोग्य व कर्मठ हैसुयोग्य, शिक्षित व कर्मठ उम्मीदवार को अपना मत दें…चुनाव में मतदाताओं के बीच बांटे जाने वाले पंपलेट व कैसेट प्रचार गाड़ी में सभी प्रत्याशियों के लिए एक बात कॉमन सुनने को मिल जाती है. इसे प्रिटिंग प्रेस वालों की महिमा कहिये या उम्मीदवारों में इच्छाशक्ति का अभाव. लोग पंपलेट में नाम व चुनाव चिह्ल बदल बैलेट अपने नाम करने की कोशिश में लग जाते हैं. जबकि मतदाता चुनाव पूर्व से लेकर चुनाव बाद तक उम्मीदवारों के आश्वासन व घोषणा पत्रों की राह देखते रह जाता है. जुलूस देख हैरत में थे लोगप्रखंड मुख्यालय में नामांकन करने पहुंचे मुखिया प्रत्याशी व अनुमंडल कार्यालय में पहुंचे जिप प्रत्याशियों का नामांकन जुलूस आम जनमानस को हैरत करने वाला था. प्रखंड व अनुमंडल कार्यालय में लग्जरी व चारपहिया वाहनों की भीड़ लगी रही. प्रत्येक प्रत्याशी के साथ सैकड़ों लोग नारेबाजी करते पहुंच रहे हैं. प्रत्याशी के स्तर से चाय व नाश्ते की व्यवस्था भी की जाती थी. पंचायत स्तर के पद को पाने के लिए नामांकन व चुनाव प्रचार में खर्च किये जाने वाली लाखों की राशि उम्मीदवारों की योग्यता से ज्यादा हैसियत को महत्व दे रही है.फोटो- पंचायत चुनाव का लोगो लगा देंगे

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