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सहरसा : स्थान – नया बाजार स्थित सत्यम हॉस्पिटल का दूसरी मंजिल पर बना ओटी. समय – सुबह 9:30 बजे. एक साथ दो ऑपरेशन हो रहे हैं. दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ एस जॉन हाथ में सर्जरी का सामान लिए बेड पर लेटे मरीज का ऑपरेशन कर रहे हैं. उनके मुंह […]

सहरसा : स्थान – नया बाजार स्थित सत्यम हॉस्पिटल का दूसरी मंजिल पर बना ओटी. समय – सुबह 9:30 बजे. एक साथ दो ऑपरेशन हो रहे हैं. दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ एस जॉन हाथ में सर्जरी का सामान लिए बेड पर लेटे मरीज का ऑपरेशन कर रहे हैं.

उनके मुंह के पास माइक और सामने कैमरा लगा है. वे ऑपरेट भी कर रहे हैं और ऑपरेट करने की विधि भी बता रहे हैं. नीचे हॉल में शहर सहित बाहर से आये चिकित्सक व अन्य लोग बैठे हैं और डॉ जॉन द्वारा की जा रही सर्जरी को प्रोजेक्टर के माध्यम से देख रहे थे. उन्हें जहां संशय हो रहे था, वहां सवाल पूछ रहे थे और सर्जरी कर रहे डॉक्टर उनकी जिज्ञासा को शांत कर रहे थे.

उसी के बगल में स्थित एक अन्य ओटी में डॉ मनीष मंडल गम्हरिया मधेपुरा के 28 वर्षीय मनीष गांधी के पेट में जीबी स्टोन का लेप्रोस्कोपिक विधि से ऑपरेशन कर रहे थे. वहां भी ऐसी ही प्रक्रिया दोहरायी जा रही थी. वर्कशॉप के को-अॉर्डिनेटर डॉ अनिमेष कुमार की देखरेख में सभी कार्यों का सफलतापूर्वक संचालन हो रहा था.

मरीजों के लिए है लाभकारीशुक्रवार को बेसिकान 2015 के तहत आयोजित कार्यशाला में देश के प्रसिद्ध चिकित्सकों ने लेप्रोस्कोपिक विधि द्वारा आधुनिकतम तरीके से ऑपरेशन कर कोसी को एक नयी सौगात दी. सत्यम हॉस्पिटल के निदेशक डॉ गोपाल शरण सिंह ने बताया कि यह तरीका मरीजों के लिए काफी लाभकारी होता है.

इससे मरीज को दर्द कम होता है, अस्पताल से जल्दी छुट्टी मिल जाती है. ऑपरेशन के बाद कोई दाग नहीं रहता. उन्होंने कहा कि कोसी का इलाका पिछड़ा होने के कारण यहां इस विधि का अभी तक बहुत सीमित रूप से उपयोग होता रहा है. लेकिन इसे दूर दराज के क्षेत्र में करने के लिए प्रशिक्षण की जरूरत है. इस वर्कशॉप के जरिये क्षेत्रीय सर्जन को इस विधि को अपनाने की उत्सुकता और जागरूकता प्रदान की जाती है.

ऐसे कार्यशाला का लाभ चिकित्सकों के साथ-साथ मरीज व समाज के गरीब लोगों को भी मिलता है. यह विडंबना ही है कि पिछले 25 सालों से यह प्रक्रिया देश भर में अपनायी जा चुकी है. लेकिन हमारे कोसी क्षेत्र में जिला स्तर पर भी बड़े पैमाने पर इसे कभी नहीं किया जा सका. सरकार, समाजसेवी और चिकित्सक वर्ग से अपील है कि ऐसी कार्यशाला जिला स्तरीय, सरकार व गैर सरकारी स्तर से करवाने का प्रयास किया जाय. मालूम हो कि सहरसा में यह प्रक्रिया अपनाने का श्रेय 1998 में डॉ गोपाल शरण सिंह व डॉ अनिल कुमार पाठक को जाता है.

हालांकि उसके बाद प्राइवेट अस्पताल सहित अन्य युवा डॉक्टरों द्वारा एडवांस लेप्रोस्कोपिक विधि को अपनाया जा चुका है. लेकिन अभी भी इस दिशा में काफी प्रयास किये जाने की जरूरत है.

मौके पर पटना के कैंसर रोग सर्जरी के विशेषज्ञ डॉ वीपी सिंह, मुजफ्फरपुर से प्रो डॉ एनके मिश्रा, रांची से डॉ सतीश मिर्धा, डॉ त्मृत्युंजय कुमार, डॉ जे लाल, डॉ नवनीत सिन्हा, डॉ अशोक कुमार, डॉ पीके मल्लिक, डॉ पूनम सिंह, डॉ भुवन सिंह, डॉ एके ईशर, डॉ एसके सिंह, डॉ एके चौधरी, डॉ आइडी सिंह, राज सिंह, सुभ्रांशु कुमार सहित अन्य मौजूद थे.

कैमरे के सामने हो रही थी सर्जरीइधर श्रीकृष्ण शल्य चिकित्सालय में भी कैमरे के आगे रांची से आये डॉक्टर सतीश मिर्धा नादो, सौरबाजार की किरण देवी का गोल ब्लॉडर का ऑपरेशन कर रहे थे. उनके साथ सुमीर राय, प्रमोद व अमरेंद्र सहित अन्य सहायता कर रहे थे.

जबकि उनके अलावा पूर्णिया के चिकित्सक डॉ ए के गुप्ता व आइजीआइएमएस के डॉ पी के झा ने भी कैमरे के सामने ऑपरेट कर चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों को बेहतर विधि से परिचय कराया. श्री कृष्ण चिकित्सालय के निदेशक डॉ अवनीश कर्ण द्वारा चिकित्सकों को हर तरह से सहयोग कर कार्यशाला को सफल बनाने का प्रयास जारी था.

Prabhat Khabar Digital Desk
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