चुनाव में बना मुद्दा पर, नहीं सुधरी रसोई की सेहत

Published at :06 Nov 2015 6:48 PM (IST)
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चुनाव में बना मुद्दा पर, नहीं सुधरी रसोई की सेहत

सहरसा : मुख्यालयबिहार विधान सभा का चुनाव आंधी की तरह आया और तूफान की तरह चला गया. इस एक महीने में देश के शीर्षस्थ नेताओं के बोल में रसोई भी समाया रहा. वे अपने मुद्दों में रसोई में रोज उपयोग होने वाले सामानों की बढ़ी कीमतों को खूब उछालते रहे. प्याज से शुरू हुआ वोट […]

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सहरसा : मुख्यालयबिहार विधान सभा का चुनाव आंधी की तरह आया और तूफान की तरह चला गया. इस एक महीने में देश के शीर्षस्थ नेताओं के बोल में रसोई भी समाया रहा.

वे अपने मुद्दों में रसोई में रोज उपयोग होने वाले सामानों की बढ़ी कीमतों को खूब उछालते रहे. प्याज से शुरू हुआ वोट का खेल सरसों तेल तक पहुंच गया. आरोप-प्रत्यारोप व छींटाकशी से स्वयं राजनीति भी शरमा गई. लेकिन अंतत: रसोई की सेहत में तनिक भी सुधार न हो सका. नेताओं के उड़नखटोलों की आपाधापी से आसमान और स्पीकरों के शोरगुल से धरती का वातावरण तो शांत हो गया. लेकिन यहां आमजनों की थाली के दिन नहीं लौट पाये.

कोई उनके स्वाद को नहीं लौटा सका. दो महीने पूर्व की तरह थाली से दाल आज भी गायब ही है. वहीं तेल के बगैर या कम तेल से बनी सब्जियां बेस्वाद व बेकार लगने लगी है. अरहर 180, तो मसूर 90 रुपये किलोदाल के बाजार की जो स्थिति दो माह पूर्व थी. आज भी वही है. खुदरा बाजार में अरहर की दाल 180 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है.

महंगाई में दूसरे नंबर पर उड़द दाल 160 रुपये की दर तक जा पहुंचा है. तीसरे क्रम पर मूंग दाल 120 रुपये व मसूर दाल 90 रुपये तो किलो के हिसाब से मिल रहा है. समूचा मूंग 100 तो समूचा चना 64 रुपये प्रति किलो के हिसाब से परचून की दुकान में उपलब्ध हो पा रहा है. चने की दाल 68 व सबसे कम 36 रुपये किलो की दर से मिल रहा है.

काबुली चना 90 व हरे मटर की दर 50 रुपये की उंचाई तक जा पहुंचा है. दाल की कीमतों ्रमें आये उछाल के 15 दिनों बाद ही सरसों तेल को भी महंगाई की नजर लग गई. घर-घर में उपयोग होने वाले तेल अपने रिकार्ड दर 115 रुपये प्रति किलो तक जा पहुंचा है. खरीदने वालों ने घटा दी मात्रागंगजला चौक पर किराने की दुकान चलाने वाले रविंद्र साह ने बताया कि वे पहले बोरा के हिसाब से दाल लाते थे. लेकिन पिछले दो महीने से दस से 20 किलो ही लाते हैं.

अब होलसेलर के पास दो से तीन दिनों पर जाना होता है. पहले का खरीदा बिकने पर ही अगली खरीद करते हैं. एक साथ उतनी पूंजी लगाने में सक्षम नहीं हैं. रविंद्र बताते हैं कि खरीदार में भी अब पहले वाली टनक नहीं रही. पहले अढ़ैया (ढाई किलो) के हिसाब से खरीदने वाले लोग किलो पर उतर आये हैं.

जबकि किलो खरीदने वाले लोग पाव भर (250 ग्राम) पर. सरसों तेल के संबंध में उन्होंने बताया कि कीमत में लगातार वृद्धि होने के बाद अब एक लीटर के बोतल से अधिक आधा लीटर का बोतल बिक रहा है. पोलिथीन में सौ, दो सौ व ढ़ाई सौ ग्राम तेल खरीदने वालों की संख्या में भी इजाफा हुआ है. फोटो- दाल 8- नहीं सुधर रही दाल की कीमतफोटो- दाल 9- सरसों तेल पर भी लगी है महंगाई की नजर

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