अब कोसी व सीमांचल में नेताओं के मंडरायेंगे हेलीकॉप्टर

Published at :28 Oct 2015 6:35 PM (IST)
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अब कोसी व सीमांचल में नेताओं के मंडरायेंगे हेलीकॉप्टर

अब कोसी व सीमांचल में नेताओं के मंडरायेंगे हेलीकॉप्टर वोट के नाम पर फिर कोसी के विकास के लिए होगा बड़े-बड़े वादे प्रतिनिधि, सहरसा सदरबिहार विधानसभा चुनाव-2015 के चुनावी महासमर के तीसरे चरण के चुनाव के लिए नेताओं की तूफानी दौरा खत्म होने के बाद चौथे व आखिरी चरण में होने वाले विस क्षेत्रों पर […]

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अब कोसी व सीमांचल में नेताओं के मंडरायेंगे हेलीकॉप्टर वोट के नाम पर फिर कोसी के विकास के लिए होगा बड़े-बड़े वादे प्रतिनिधि, सहरसा सदरबिहार विधानसभा चुनाव-2015 के चुनावी महासमर के तीसरे चरण के चुनाव के लिए नेताओं की तूफानी दौरा खत्म होने के बाद चौथे व आखिरी चरण में होने वाले विस क्षेत्रों पर अब सभी दलों की नजर रहेगी. तीन चरण के चुनावी दौरे में एनडीए व महागंठबंधन के स्टार प्रचारक मतदाताओं को अपने-अपने पाले में करने के लिए विकास की बात को छोड़ अगड़ी-पिछड़ी व एक दूसरे के ऊपर प्रहार कर लोगों की वोट की खातिर हर नुस्खे का इस्तेमाल किया. नेताओं द्वारा एक-दूसरे के ऊपर तीखा जुबानी बयान भी इन तीन चरणों के चुनावी प्रचार में खूब उछले. इन चुनावी दौरे के बीच संपन्न दूसरे चरण के मतदान के बाद से ही बिहार की सत्ता के लिए मुख्य रूप से प्रखर एनडीए व यूपीए गठबंधन के नेता बिहार में अपनी-अपनी सरकार बनाने के दावे भी शुरू कर दिये हैं. कोसी व सीमांचल में दोनों ही गंठबंधन की होगी जोर बिहार की सत्ता पर काबिज एक ओर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, लालू प्रसाद की पार्टी राजद से गठबंधन के बाद बिहार के लिए किये गये विकास की बदौलत सत्ता को पुन: पाने के लिए जहां आश्वस्त हैं. वहीं एनडीए गठबंधन बिहार में भाजपा के सत्ता से हटने के बाद लालू-नीतीश के मिलन को जंगलराज-2 की संज्ञा देते हुए बिहार की जनता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकास को बिहार में उतारने की बात कर सत्ता को पाने के लिए पूरी ताकत लगा दी है. दोनों ही गठबंधन के लिए कोसी व सीमांचल में आखिरी चरण में होने वाले चुनाव सत्ता तक पहुंचाने के लिए अहम माना जा रहा है. हालांकि कोसी के 13 सीट में मात्र एक सीट पर ही भाजपा का कब्जा है. शेष 12 सीट गठबंधन के पास है. जिसे फिर से हासिल करने के लिए लालू-नीतीश कोसी क्षेत्र में आखिरी चरण के दौरे में कोई कोर-कसर छोड़ना नहीं चाहेंगे. वहीं सीमांचल क्षेत्र में भी महागंठबंधन की पैठ को मजबूती रूप से देखा जा रहा है. जिसे तोड़ने के लिए एनडीए गठबंधन के नेता भी अंत तक महागंठबंधन के किले को ध्वस्त करने में ताबड़तोड़ चुनावी सभा करने वाले हैं. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एक नवंबर को मधेपुरा में चुनावी रैली पहले से ही प्रस्तावित है और भी एनडीए के कई स्टार प्रचारक कोसी व सीमांचल के क्षेत्रों में ताबड़तोड़ चुनावी दौरा कर एनडीए गठबंधन के प्रत्याशियों को जिताने में मेहनत करेंगे. फिर उकेरेंगे कोसी क्षेत्र की गरीबी कोसी व सीमांचल क्षेत्र की सीटों को पाने के लिए नेताओं के उड़नखटोले आसमान में मंडराते नजर आयेंगे. उड़नखटोले से जमीन पर पैर रखते ही नेताओं की बोली हर बार की तरह कोसी क्षेत्र की गरीबी व भूखमरी को केन्द्रित रखकर ही क्षेत्र की भोली-भाली जनता को उनके हक व अधिकार दिलाने की बात कहकर क्षेत्र की गरीबी को उकेरने का काम करेंगे. अगड़ी-पिछड़ी, जात-पात की बात कर गरीबों के वोट को पाना चाहेंगे. नेताओं के इन्हीं वादों के बीच क्षेत्र का विकास हर बार की तरह इस चुनाव में भी मुद्दा नहीं बन पायेगा. यही कारण है कि प्रमंडलीय मुख्यालय होने के बावजूद सहरसा जैसे शहर आज भी मूलभूत सुविधाओं का दंश झेलने को मजबूर है. सड़क, जल निकासी से लेकर शुद्ध पेयजल तक लोगों को सुविधा नहीं है. शिक्षा के मामले में भी प्रमंडलीय मुख्यालय में एक भी सरकारी मेडिकल कॉलेज या इंजीनियरिंग कॉलेज की सुविधा आजादी के छह दशक बीतने के बावजूद उपलब्ध नहीं है.

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