पाक से लौटने के बाद लुधियाना में रहेगी गीता!

पाक से लौटने के बाद लुधियाना में रहेगी गीता! पिता व भाई ने ईदी फाउंडेशन व विल्किस ईदी का जताया आभारपिता ने कहा, जीवन सौंपकर भी नहीं चुका सकते ऋणभाई ने कहा, बहन के जीवन को बेहतर बनाने के लिए करेंगे कुछ भी कुमार आशीष/सहरसा नगरभारत व पाकिस्तान के बीच पारस्परिक सामाजिक संबंधों की मजबूत […]
पाक से लौटने के बाद लुधियाना में रहेगी गीता! पिता व भाई ने ईदी फाउंडेशन व विल्किस ईदी का जताया आभारपिता ने कहा, जीवन सौंपकर भी नहीं चुका सकते ऋणभाई ने कहा, बहन के जीवन को बेहतर बनाने के लिए करेंगे कुछ भी कुमार आशीष/सहरसा नगरभारत व पाकिस्तान के बीच पारस्परिक सामाजिक संबंधों की मजबूत कड़ी बनी गीता इन दिनों कोसी की पहचान बन गई है. वह 26 नवंबर को भारत वापस आ रही है. जांच प्रक्रियाओं के बाद वह उसके परिवार वालों को सौंप दी जायेगी. दरअसल दो माह पूर्व टेलीविजन पर भारत से भटक कर पाकिस्तान पहुंची इस महिला की खबर आने पर बिहार के तीन जिले सहित देशभर से पांच दावेदार सामने आये थे. जिसमें सहरसा जिले के सलखुआ प्रखंड के कोसी तटबंध के अंदर बसे कबीराधाप निवासी जनार्दन महतो भी शामिल थे. सौभाग्य से बीते बुधवार को भारत सरकार द्वारा पाक उच्चायोग को भेजे गए तसवीर को गीता ने अपने परिवार के रूप में पहचाना. बार-बार जनार्दन महतो के फोटो पर अंगुली रख उनके पास जाने की जिद करने लगी. अपने कपड़े समेटने लगी. हालांकि उसके हाव-भाव ने यह भी बता दिया है कि गीता अपने पिता व परिवार से मिलने के लिए जितना बेताब है. पाक में पालने-पोसने व आश्रय देने वाली विल्किस ईदी को छोड़ने का उतना ही गम है. इधर जनार्दन महतो सहित पूरे परिवार ने ईदी फाउंडेशन का आभार जताया है. परिवार ने भारत सरकार का भी शुक्रिया जताया है. जिनके लगातार प्रयास से भटक कर पाक पहुंची गीता को वापस लाने के लिए एड़ी-चोटी एक की गई. पिता जनार्दन महतो सहित गांव के लोग बेसब्री से गीता के गांव वापसी का इंतजार कर रहे हैं. 11 वर्षों में बदल गयी है गीता पाकिस्तान के करांची शहर स्थित ईदी फाउंडेशन में पिछले 11 वर्षों से रह व पल रही गीता का जीवन बिल्कुल बदल चुका है. भारत से भटकाव से पूर्व उसके चेहरे व रंगत में भी भारी बदलाव आया है. गीता का अचार-विचार, रहन-सहन, पहनावा-ओढ़ावा सब आधुनिक व संस्कारित हो गया है. गूंगी-बहरी होने के बाद भी ईदी फाउंडेशन की विल्किस ईदी ने मां बनकर उसे आत्मनिर्भर बना दिया है. वह पाक के उस आश्रम में छोटे-छोटे बच्चों को नृत्य सिखाती है. खुद भटकी होने के बावजूद ऐसे औरों को हिम्मत दे जीने का हौंसला दे रही है. अब जब डीएनए टेस्ट के बाद गीता को उसके परिवार को सौंपने की बातें हो रही है तो यहां चर्चा यह होने लगी है कि क्या गीता अपने पिता के इसी मिट्टी के एक कोठरी वाले घर में रहेगी? क्या गीता पूर्वी कोसी तटबंध से पैदल घाट व नाव से पार हो चार किलोमीटर पैदल चल कर अपने घर जायेगी? बेटी की तलाश में जनार्दन ने अपना सब कुछ बेच दिया है. यहां गीता खायेगी क्या? पहनेगी क्या? आखिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में शामिल गीता के कारण कोसी के गर्भ में बसे उस गांव की तसवीर व तकदीर बदलेगी? लुधियाना में ही रहेगी गीता!चूंकि गीता के जन्म के बाद उसका अधिकाधिक समय पंजाब के लुधियाना में ही बीता है. जनार्दन लंबे समय से वहां दिहाड़ी मजदूर थे. फिर काफी दिनों तक राजमिस्त्री का भी काम किया था. छठे-छमासे उनका परिवार सहित गांव (कबीराधाप) आना होता था. बेटी की शादी के दौरान तकरीबन दो वर्षों तक गांव में रहे थे. लुधियाना में स्थायी रूप से बस चुके गीता के भाई बिनोद बताते हैं कि गीता 11 वर्षों तक परिवार से बिछुड़ी रही. यह भगवान का ही शुक्र है कि वह भटक कर जहां भी गयी. अच्छे जगह पनाह पायी. वे जीवन भर ईदी फाउंडेशन व विल्किस ईदी के ऋणी रहेंगे. बिनोद ने बताया कि वह किसी भी रूप में अब अपने परिवार को बिखरने नहीं देगा. पिता जनार्दन महतो भी यहीं रहेंगे. सरकार द्वारा सौंपे जाने के बाद गीता भी लुधियाना में ही रहेगी. उसके जीवन को और बेहतर बनाने के लिए जो भी करना होगा. वे करेंगे. फोटो- गीता 1- कबीराधाप स्थित गीता का पैतृक घर व लगी लोगों की भीड़.
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