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20 वर्षों का इंतजार खत्म, बासगीत पर्चा व बंदोबस्ती की मांग तेज

Updated at : 20 Dec 2025 5:08 PM (IST)
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20 वर्षों का इंतजार खत्म, बासगीत पर्चा व बंदोबस्ती की मांग तेज

20 वर्षों का इंतजार खत्म, बासगीत पर्चा व बंदोबस्ती की मांग तेज

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अंचल कार्यालय पर कोसी विस्थापित व भूमिहीनों ने किया उग्र प्रदर्शन सलखुआ . कोसी की विनाशलीला झेल चुके विस्थापित और भूमिहीन परिवारों का सब्र शनिवार को आखिरकार जवाब दे गया. अंचल कार्यालय परिसर सैकड़ों आक्रोशित परिवारों के नारों से गूंज उठा, जहां बासगीत पर्चा एवं भूमि बंदोबस्ती की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया गया. यह प्रदर्शन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के जिला कार्यकारिणी सदस्य उमेश चौधरी के नेतृत्व में आयोजित हुआ. प्रदर्शन को संबोधित करते हुए भाकपा नेता उमेश चौधरी ने कहा कि सलखुआ अंचल क्षेत्र में 11,774 कोसी विस्थापित एवं भूमिहीन परिवार पिछले करीब दो दशकों से सरकारी जमीनों-जैसे तटबंधों के किनारे, नहरों, पोखरों के पाट और अन्य परती भूमि पर अमानवीय हालात में जीवन बिताने को मजबूर हैं. उन्होंने कहा कि इतने लंबे संघर्ष के बाद भी इन परिवारों को बासगीत पर्चा तक नहीं मिला. उन्होंने अंचल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भूमिहीन परिवार वर्षों से अंचल कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अधिकतर मामलों में उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है. आरोप लगाया गया कि अंचलाधिकारी की अनुपस्थिति आम बात हो गयी है. कभी बैठक, कभी अन्य कार्यों का बहाना बनाकर लोगों को टाल दिया जाता है. उन्होंने यह भी कहा कि अंचलाधिकारी का आवास सलखुआ से लगभग 11 किलोमीटर दूर सिमरी बख्तियारपुर में होने के कारण लाभुकों से नियमित संवाद नहीं हो पाता. भाकपा नेता ने बताया कि पिपरा, बगेबा, बलियार, कामराडीह, ओरेली, कचौत, बनगामा, कोतवाली कटघरा, सिसवा, खोचरदेबा, साम्हारकला, कबीरपुर सहित कई पंचायतों के भूमिहीन परिवार बार-बार आवेदन दे चुके हैं, लेकिन अंचल प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी. प्रदर्शन में शामिल विस्थापितों ने कहा कि बिना बासगीत पर्चा के वे हर पल उजाड़े जाने के भय में जी रहे हैं. इस कारण वे सरकारी योजनाओं, आवास, बिजली, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित हैं. प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से शीघ्र सर्वे कराकर सभी पात्र कोसी विस्थापित एवं भूमिहीन परिवारों को बासगीत पर्चा एवं भूमि बंदोबस्ती देने की मांग की. प्रदर्शन के दौरान जमकर नारेबाजी हुई और चेतावनी दी गयी कि यदि शीघ्र ठोस कार्रवाई नहीं की गयी तो आंदोलन को सड़क से लेकर प्रशासनिक दफ्तरों तक और उग्र रूप दिया जायेगा. अंचल कार्यालय में अंचलाधिकारी की अनुपस्थिति में राजस्व कर्मचारी संतोष झा ने प्रदर्शन करियों को समझा बुझा कर प्रदर्शन को समाप्त कराया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Dipankar Shriwastaw

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