मौत के मुंह में समा रहे लोग, नहीं पहुंची उच्च स्तरीय टीम
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :20 Feb 2020 7:08 AM (IST)
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सत्तरकटैया : सहरसा जिले के सत्तरकटैया प्रखंड अंतर्गत सत्तर पंचायत में कैंसर जैसी घातक बीमारी से दिन प्रतिदिन लोगों की जान जा रही है. वर्तमान समय में भी डेढ़ दर्जन लोग इस बीमारी के चपेट में हैं. लेकिन राज्य एवं केंद्र की सरकार को इस बात की कोई फिक्र नहीं है. जिला स्तर पर कैंसर […]
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सत्तरकटैया : सहरसा जिले के सत्तरकटैया प्रखंड अंतर्गत सत्तर पंचायत में कैंसर जैसी घातक बीमारी से दिन प्रतिदिन लोगों की जान जा रही है. वर्तमान समय में भी डेढ़ दर्जन लोग इस बीमारी के चपेट में हैं. लेकिन राज्य एवं केंद्र की सरकार को इस बात की कोई फिक्र नहीं है. जिला स्तर पर कैंसर रोग का जांच की व्यवस्था नहीं होने के कारण स्वास्थ्य विभाग खानापूर्ति कर सरकार को रिपोर्ट भेज अपना पल्ला झाड़ लिया है.
ग्रामीणों के अनुसार विगत दो से तीन साल के दौरान इस पंचायत में कैंसर से 50 लोगों की मौत हो चुकी है. वही वर्तमान में 18 लोग विभिन्न अस्पताल में इलाजरत हैं. कई ऐसे भी कैंसर पीड़ित मरीज हैं,जो गरीबी के कारण अपना इलाज कराने में सक्षम नहीं हो पा रहे हैं.
बीमारी मतलब मौत तय : इस बीमारी के प्रति जागरूकता की कमी के कारण परिवार वाले यह समझ बैठते हैं कि इस बीमारी के होने पर मरना तो तय है ही और निराश होकर घर वापस आ जाते है. कैंसर बीमारी से मरने एवं ग्रसित लोगों की सूची देख कर आम लोगों में भी भय का माहौल बन गया है. क्षेत्रवासियों को शरीर में किसी भी तरह की परेशानी महसूस होने पर कैंसर होने का भय होने लगता है. सत्तर पंचायत के सहरबा, मेनहा, खादीपुर, खोनहा, सत्तर एवं कटैया में यह बीमारी भयानक रूप ले लिया है.
मीडिया के खबर पर स्वास्थ्य विभाग एवं पीएचडी विभाग खानापूर्ति करने में जुटा हुआ है. यह बीमारी किस कारण से फैल रही है, कारण का पता लगाना आवश्यक हो गया है. कारण ढूंढने एवं रोकथाम का उपाय करने के लिए उच्च स्तरीय विशेषज्ञों की टीम द्वारा जांच जरूरी है. विभागीय स्तर से सीएस ने भी प्रधान सचिव को पत्र लिखकर टीम भेजने की मांग की है. लेकिन इस मामला को संज्ञान में आने के एक सप्ताह बाद भी राज्य एवं केंद्र स्तर से टीम नहीं पहुंची है.
जिला स्तर पर आर्सेनिक जांच के लिए उपकरण का अभाव : पीएचडी विभाग द्वारा सहरबा एवं मेनहा गांव से 33 चापाकल का नमूना पानी जांच के लिए लिया है. लेकिन जिला स्तर पर आर्सेनिक जांच के लिए उपकरण का अभाव है. इस इलाके में किसके शरीर में कैंसर पल रहा है. इस बात का पता लगाने के लिए मेडिकल कैंप लगाकर हर आदमी का चेकअप कराना आवश्यक हो गया है. इससे बीमारी का पता तो चलेगा ही साथ ही लोगों के मन से भय भी समाप्त होगा. इस ओर भी स्वास्थ्य भी से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है.
पीएचडी विभाग द्वारा लिए गये पानी के नमूने की उच्च स्तरीय जांच कराने की आवश्यकता है. आखिर इस गांव की आबोहवा, खानपान अच्छी है, नशे की आदत कम लोगों में देखी जा रही है, तो कैंसर इतनी तेज गति से क्यों फैल रहा है. इस गंभीर समस्या पर सरकार का ध्यान आकृष्ट नहीं हुआ और समय रहते रोकथाम की व्यवस्था नहीं हुई, तो निकट भविष्य में यहां के लोगों की परेशानी बढ़ती ही जायेगी.
कैंसर की जांच उच्चस्तरीय टीम से कराने को लेकर आयुक्त को सौंपा ज्ञापन
सत्तरकटैया. सत्तर पंचायत के सहरबा गांव सहित आसपास में तेज गति से फैल रही कैंसर रोग की रोकथाम को लेकर पूर्व जिला पार्षद प्रवीण आनंद के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल ने आयुक्त को चार सूत्री मांगों का ज्ञापन दिया है. ज्ञापन समर्पित करने के बाद उन्होंने बताया कि सत्तर पंचायत में कैंसर रोग से 50 लोगों की मौत हो चुकी है. वही करीब 20 की संख्या में बीमार चल रहे है.
पूर्व जिला पार्षद ने मांग पत्र में राज्य एवं केंद्र स्तरीय विशेषज्ञ टीम से बीमारी फैलने के कारण का पता लगाने, रोकथाम की उपाय करने, बीमार लोगों का उच्च स्वास्थ्य संस्थान में सरकारी खर्च पर इलाज करवाने तथा इस बीमारी से मृत हुए व्यक्ति के आश्रित परिवार को पांच-पांच लाख मुआवजा राशि का भुगतान करने की मांग की है.
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