नाला साफ नहीं करा सकते तो सड़क ही कर दीजिए बंद

Updated at : 09 Aug 2018 6:24 AM (IST)
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नाला साफ नहीं करा सकते तो सड़क ही कर दीजिए बंद

सहरसा : नगर परिषद की लापरवाही ने सारी हदों को पार कर दिया है. यह किसी काम की नहीं रह गयी लगती है. इसका गठन पब्लिक की जिन समस्याओं को दूर करने के लिए हुआ था. वह काम करने में कोई दिलचस्पी ही नहीं दिख रही है. एक तो शहर में 80 फीसदी सड़क चलने […]

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सहरसा : नगर परिषद की लापरवाही ने सारी हदों को पार कर दिया है. यह किसी काम की नहीं रह गयी लगती है. इसका गठन पब्लिक की जिन समस्याओं को दूर करने के लिए हुआ था. वह काम करने में कोई दिलचस्पी ही नहीं दिख रही है. एक तो शहर में 80 फीसदी सड़क चलने लायक नहीं बची है और जो 20 फीसदी बची भी है, उसे नप की अकर्मण्यता लीलने पर तूली हुई है.

सरकारी क्वार्टर का नाला जाम, सड़क पर पानी: वार्ड नंबर आठ स्थित न्यू कॉलोनी को गांधी पथ सहित शहरी क्षेत्र के अन्य भागों से जोड़ने वाली मुख्य सड़क लंबी अवधि से नाले में तब्दील है. गांधी पथ के नाले का गंदा पानी ओवर फ्लो होकर सड़क पर बहता रहता है. आश्चर्य तो यह भी है कि नाले का बहाव उत्तर से दक्षिण की ओर है लेकिन ओवर फ्लो का बहाव दक्षिण से उत्तर की ओर हो रहा है. नाले का सड़ा, गंदा व बदबूदार पानी टेलीफोन एक्सचेंज से आगे से बहता हुआ कोसी कॉलोनी के कैंपस तक जाता है.
इस बीच में न्यू कॉलोनी की ओर जाने वाली सड़क पर पूरे वेग में बहता रहता है. बारिश के समय पानी का यह रफ्तार दोगुना हो जाता है. इस सड़क में आगे जाने पर कमिश्नरी क्वार्टर के ठीक पीछे लगभग 80 मीटर तक सड़क पूरी तरह नाला बनी हुई है. सरकारी क्वार्टर के पीछे बना नाला कचरों से भरा पड़ा है और गंदा पानी सड़कों पर ही बहता है. यहां दिन भर सूअरों की धमा-चौकड़ी मची रहती है. कचरों के बीच डस्टबीन भी उल्टे पड़े हैं. लेकिन लोगों को हो रही असुविधाओं से नप को कोई मतलब नहीं है. सड़क के दोनों छोर पर गंदी स्थिति होने के कारण लोगों ने इसका उपयोग छोड़ दिया है.
नाले के पानी ने सड़क को बनाया अपना रास्ता: इधर वार्ड नंबर 22 व 23 स्थित बटराहा मुहल्ला में भी यही स्थिति बनी हुई है. मारूफगंज रोड से लहटन चौधरी कॉलेज होते हुए कहरा ब्लॉक रोड को जोड़ने वाली प्रमुख सड़क के नाले में तब्दील होने के कारण लोग इसका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं. जबकि यह आसपास के कई मुहल्लों के लोगों के दैनिक उपयोग की एकमात्र सड़क है. मुहल्ले का एकमात्र मंदिर होने के कारण सुबह-शाम यहां महिला समेत अन्य श्रद्धालुओं का आना लगा रहता है. इसके अलावे मुहल्ले के लगभग आधा दर्जन से अधिक स्कूल व कोचिंग जाने का रास्ता भी यही है. उन्हें या तो नाले के इस गंदे पानी को पार कर जाना होता है या फिर लगभग दो किलोमीटर घुमावदार रास्ते से होकर निकलना और वापस घर जाना होता है. सारी परेशानी नगर परिषद की आंखों के सामने है. लेकिन उन्हें इन समस्याओं के समाधान में कोई रुचि नहीं है.
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