आधा दिसंबर बीत गया ठंड का कोई पता नहीं
दिन में पंखा का मजा ले रहे लोग
सहरसा : दिसंबर जैसे सर्द मौसम में भी जब लोग पंखा के हवा का सहारा लें तो सिर्फ यही कहा जा सकता है कि ठंड में गर्मी का एहसास. बदलते मौसम के मिजाज का शायद दिसंबर के महीने में पहली बार इस तरह का एहसास लोगों को होना मौसम व पर्यावरण संतुलन के लिए शायद ठीक नहीं माना जा सकता है. आधा दिसंबर बीत चुका है. लेकिन दिसंबर महीने में जिस सर्द भरे मौसम का एहसास पहले लोगों को झेलना पड़ता था. वह इस साल अभी तक महसूस नहीं हुआ है.
दिसंबर महीने की धूप जहां लोगों को ठंड से सुकुन पहुंचाती थी. वहीं धूप अभी दिन में फरवरी मार्च की तरह लोगों का पसीना निकाल रही है. थोड़ी देर धूप में रहते ही धूप मानो काटने के लिए दौड़ती है. दिसंबर के सर्द भरे मौसम में भी लोग आजकल दिन में जहां पंखा का मजा ले रहे हैं. वहीं रात में मोटी रजाई की जगह एक पतला कंबल के सहारे अच्छी तरह रात काट रहे हैं.
बीमार होने का खतरा बढ़ने की संभावना
इस तरह सर्दी के मौसम में गर्मी लगने की वजह से जो मौसम में बदलाव देखा जा रहा है. उससे पर्यावरण के बिगड़ते संतुलन को जोड़कर भी लोगों ने देखना शुरू कर दिया है. मौसम के बदलते प्रभाव के कारण इन दिनों लोगों में सर्दी, जुकाम व बुखार जैसी बीमारी बढ़ने लगी है. अगर इस तरह का मौसम बना रहा तो लोगों में और भी बीमार होने का खतरा बढ़ने की संभावना बढ़ सकती है. पहले के वर्षोंं में इस समय के मौसम में हांड़ कंपानेवाली ठंड से जनजीवन परेशान हो जाता था.
बदलते मौसम का असर बाजार पर भी
इन दिनों पूरा बाजार गर्म कपड़ा से पटा हुआ है. हर कपड़े की दुकान में ब्रांडेड से लेकर अनब्रांडेड लड़का व लड़की दोनों के लिए जैकेट, स्वेटर सहित अन्य गर्म कपड़ों से बाजार सजा हुआ है. लेकिन इस ठंड के मौसम में भी दुकानदारों को गर्म कपड़े खरीदने वाले ग्राहक नहीं मिल रहे हैं. शहर में कई जगह गर्म कपड़े की सस्ता सेल की दुकान भी लगी हुई है. लेकिन खरीदार नहीं मिल रहा है. मौसम के बदलते मिजाज का असर बाजार के मंदी पर भी सीधा-सीधा असर डाल रहा है.
