आइसीआइसीआइ बैंक के खाते से गायब हो रहे हैं रुपये

Updated at : 22 Nov 2017 5:19 AM (IST)
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आइसीआइसीआइ बैंक के खाते से गायब हो रहे हैं रुपये

सहरसा : डिजिटल धोखाधड़ी का एक मामला आइसीआइसीआइ के सहरसा स्थित बैंक शाखा से प्रकाश में आया है. मामला बैंक से जुड़ा हो सकता है या साइबर क्राइम से, अनुसंधान होने के बाद ही पूरी जानकारी सामने आ सकेगी. मीर टोला निवासी रेशमा बानो के बैंक अकाउंट 18110 15018 14 से एक लाख दस हजार […]

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सहरसा : डिजिटल धोखाधड़ी का एक मामला आइसीआइसीआइ के सहरसा स्थित बैंक शाखा से प्रकाश में आया है. मामला बैंक से जुड़ा हो सकता है या साइबर क्राइम से, अनुसंधान होने के बाद ही पूरी जानकारी सामने आ सकेगी. मीर टोला निवासी रेशमा बानो के बैंक अकाउंट 18110 15018 14 से एक लाख दस हजार 349 रुपये निकाले गये. इस अकाउंट से निकाले गये पैसों से मोबाइल रिचार्ज व फंड ट्रांसफर होता रहा. लेकिन खाताधारक को इसकी भनक भी नहीं मिली.

नोटबंदी के बाद से खाताधारी ने इस खाते से पैसा नहीं निकाला और 6 सितंबर 17 से 11 सितंबर 17 के बीच कई लेन-देन अन्य बैंक खाते से किये गये. संयोगबस पासबुक अपडेट करने के बाद इसकी जानकारी सामने आयी. रेशमा बानो के पति सफदरे आजम ने बताया कि बैंक की मिली भगत से ऐसा हुआ है. क्योंकि खातेदारी का मोबाइल सेवा 7070845328 है जबकि खाता में इंट्री 70708 45321 है. ताज्जुब की बात है कि इस खाते में बिना मांगे इंटरनेट बैंकिंग की सुविधा भी दी गयी है, तो पासवर्ड किसने दिया. स्टेट बैंक के जिन तीन खातों में पैसे भेजे गये उससे भी जानकारी ली जा सकती है. साथ ही मोबाइल भी रिचार्ज किया गया.

प्रबंधक शिशिर कुमार कहते हैं कि पैसों का लेनदेन ऑनलाइन किया गया है. इसलिए उन्हें विशेष जानकारी नहीं है. बैंक के वरीय पदाधिकारी ही इसकी जानकारी देंगे. चौंकाने वाली बात यह भी है कि अकाउंट में दिया गया नंबर खाता खुलने के एक महीने बाद एक्टिवेट हुआ है तो फिर यह नंबर अकाउंट में किसने जोड़ा. बैंक प्रबंधन इसे भूल चूक मानता है. बैंक को दी गयी शिकायत संख्या में जांच के बाद मामला स्पष्ट होगा. मामले से संबंधित अनुसंधान के लिए स्थानीय थाना को भी आवेदन देने की प्रक्रिया चल रही है. इस बैंक से जुड़े एक और मामले में राजनारायण कुमार का एक मामला खाता संख्या 181101502487 से जुड़ा है. जिससे भी लाखों रुपये गायब हो गये है. जब खाता को आधार से जोड़ने के लिए फोन के द्वारा कहा गया तो खाताधारी ने बैंक आकर आधार देने की बात कही. बातचीत के दूसरे दिन खाता से जुड़ा सिम डीएक्टिवेट हो गया और तीसरे दिन जब पुनः एक्टिवेट हुआ तो उससे 1 लाख 20 हजार रुपया गायब थे. इस बाबत कोर्ट में एक केस भी दर्ज कराया गया है. स्थानीय कई लोगों ने कहा कि आईसीआईसीआई के इस शाखा से जुड़े बैंक खातों में कई ऐसे मामले सामने आये हैं.
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