कारा अधीक्षक के विरोध में सहरसा बंद, पुलिस तैनात

Updated at : 16 Nov 2017 6:01 AM (IST)
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कारा अधीक्षक के विरोध में सहरसा बंद, पुलिस तैनात

सुबह से ही निकल पड़े आनंद मोहन समर्थक पूर्व सांसद लवली आनंद के नेतृत्व में निकाला जुलूस सहरसा : सहरसा बंद का शहरी क्षेत्र में बुधवार को व्यापक असर देखा गया. मंडलकारा सहरसा में कुव्यवस्था, भ्रष्टाचार, धांधली और कैदियों व कारा कर्मियों के साथ अमानवीय व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए इसके खिलाफ बंदियों के […]

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सुबह से ही निकल पड़े आनंद मोहन समर्थक

पूर्व सांसद लवली आनंद के नेतृत्व में निकाला जुलूस
सहरसा : सहरसा बंद का शहरी क्षेत्र में बुधवार को व्यापक असर देखा गया. मंडलकारा सहरसा में कुव्यवस्था, भ्रष्टाचार, धांधली और कैदियों व कारा कर्मियों के साथ अमानवीय व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए इसके खिलाफ बंदियों के परिजन, फ्रेंडस ऑफ आनंद, भाकपा, रालोसपा, हम से, बिहार विकास मोर्चा, बेटी बचाओ अभियान, युवा विद्यापति सभा के संयुक्त तत्वावधान में बंद का आयोजन किया गया. बंद को लेकर सुबह से ही नौजवानों व महिलाओं में काफी उबाल एवं उत्साह देखा गया.
सुबह से ही बंद समर्थक सड़कों पर उतर बाजार को बंद कराते रहे. बाजार बंदी का नेतृत्व पूर्व सांसद लवली आनंद, चेतन आनंद, सीपीआइ जिला सचिव ओम प्रकाश नारायण, रालोसपा अरुण गुट जिलाध्यक्ष मो मंसूर आलम सहित अन्य कर रहे थे. इस बाजार बंदी में बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी रही. महिलाओं ने अपने हाथों में झाड़ू व मांगों से संबंधित तख्तियां लेकर बाजार को बंद कराया. वहीं मोटर साइकिल पर युवाओं की विभिन्न टोली ने
कारा अधीक्षक के…
पूरे शहरी क्षेत्र में घूम कर बाजार बंद कराया. बाजार बंदी का व्यापक असर रहा. सुबह से ही लगभग दुकानें स्वतःस्फूर्त बंद रही, जबकि कुछ एक दुकानों को बंद समर्थक ने जबरन बंद कराया. जबरन बंदी के कारण मीर टोला चौक के पास बंद समर्थकों के साथ झड़प होने लगी. हालांकि इसकी जानकारी मिलते ही सदर एसडीपीओ प्रभाकर तिवारी, डीएसपी मुख्यालय गणपति ठाकुर व सदर थानाध्यक्ष आरके सिंह के नेतृत्व में पहुंचे पुलिस बल ने मामले को शांत कराया. बंदी को देखते हुए पूर्व से पुलिस प्रशासन सजग दिखा. सभी मुख्य चौक-चौराहे पर पुलिस की तैनाती रही. बंद समर्थकों को संबोधित करते लवली आनंद ने कहा कि जेल की मरम्मत के नाम पर बंदियों को विभिन्न जेलों में महीनों पूर्व षड्यंत्र के तहत भेज दिया गया.
उन्होंने मांग करते कहा कि सामूहिक जेल तबादले की उच्चस्तरीय जांच हो, खाद्यान्न कटौती, घटिया खाद्य आपूर्ति पर रोक लगायी जाये, मुलाकाती, वकालतनामा, बंधपत्र व रिलीज पर अवैध वसूली जिला प्रशासन बंद कराये. आनंद मोहन सहित सभी बाहर भेजे गये बंदियों को वापस लाया जाये. 35 लाख के घोटाले की जांच कर तत्काल भ्रष्ट जेल अधीक्षक को बर्खास्त किया जाये. कारा में बंद कैदियों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है.
महीनों से कक्षपालों, सफाई कर्मियों, विद्युतकर्मियों, कंप्यूटर ऑपरेटरों, मौलवी, पंडित व नाई को वेतन नहीं दिया जा रहा है. ये सब जेल अधीक्षक के इशारे पर किया जा रहा है. बंद सफल बनाने में जिलाध्यक्ष अजय कुमार सिंह बबलू, जिप सदस्य रजनीबाला, हम प्रदेश सचिव अनीता कुशवाहा, राजन आनंद, रालोसपा अरुण गुट जिलाध्यक्ष मंसूर आलम, सोनू तोमर, अजय झा, सुरेंद्र नाथ झा गोपाल, मदनजीत चौहान, शंभु सिंह, करण टाइगर, अवनीश कुमार, रोहिन दास, सोनू सिंह, अजय झा, मो नईम, मो जुम्मन, मो इमरान, संतोष सिंह, संजय सिंह, साबिर मुन्ना सहित सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरुष कार्यकर्ता शामिल थे.
तैनात रही पुलिस :
बंद समर्थकों के हुजूम को नियंत्रण में करने के लिए शहर में जगह-जगह पुलिस बलों की तैनाती की गयी थी. एसडीपीओ प्रभाकर तिवारी, डीएसपी गणपति ठाकुर व थानाध्यक्ष आरके सिंह पुलिस बलों के साथ शहर के मुख्य मार्गों पर निगरानी करते रहे. इस दौरान बंद समर्थक जेल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे.
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