जिले में बिना निबंधन के हजार कोचिंग सेंटर

Updated at : 08 Nov 2017 5:48 AM (IST)
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जिले में बिना निबंधन के हजार कोचिंग सेंटर

महज 75 कोचिंग संस्थान ने दिये हैं आवेदन प्रशासनिक उदासीनता का लाभ ले रहे कोचिंग संचालक सहरसा : बिहार कोचिंग संस्थान (नियंत्रण व विनियमन) अधिनियम 2010 के तहत जिले में चल रहे सभी कोचिंग सेंटरों को सरकार से निबंधन कराना अनिवार्य है. इसके बावजूद नियमों को ताक पर रख कर जिले के विभिन्न इलाकों में […]

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महज 75 कोचिंग संस्थान ने दिये हैं आवेदन

प्रशासनिक उदासीनता का लाभ ले रहे कोचिंग संचालक
सहरसा : बिहार कोचिंग संस्थान (नियंत्रण व विनियमन) अधिनियम 2010 के तहत जिले में चल रहे सभी कोचिंग सेंटरों को सरकार से निबंधन कराना अनिवार्य है. इसके बावजूद नियमों को ताक पर रख कर जिले के विभिन्न इलाकों में करीब एक हजार कोचिंग सेंटर बिना निबंधन के चल रहे हैं. वर्ष 2010 में बने अधिनियम के सात वर्ष बीत जाने के बाद भी महज एक भी कोचिंग सेंटर का निबंधन नहीं हुआ है. जिला शिक्षा कार्यालय के जरिए डीएम कार्यालय को कोचिंग सेंटरों का निबंधन करना है, लेकिन इस कार्य में विभाग उदासीनता बरत रही है. यही कारण है कि संचालक मनमाने ढंग से कोचिंग सेंटर का संचालन कर रहे हैं.
उक्त अधिनियम के तहत विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं व पाठ्यक्रमों की तैयारी और विशिष्ट संस्थाओं आदि में प्रवेश के लिए बेहतर शैक्षिक अनुसमर्थन प्रदान करने के लिए राज्य के निजी कोचिंग संस्थानों के नियंत्रण और विनियमन का उपबंध करने के लिए सरकार ने कोचिंग सेंटरों को निबंधन कराना अनिवार्य किया है. सरकार के इस उद्देश्य पर न तो विभाग कोई कार्रवाई कर रहा है और न ही कोचिंग सेंटर के संचालक ही दिलचस्पी ले रहे हैं.
शिक्षा विभाग के कार्यालय में जमा होंगे आवेदन: निबंधन कराने के लिए कोचिंग सेंटर के संचालकों को जिला शिक्षा कार्यालय में आवेदन जमा करना होगा. संचालक को निबंधन के लिए पहले आवश्यक कागजात तैयार करने होंगे और इसके बाद आवेदन जमा करना होगा. आवेदन के साथ डीएम के नाम से पांच हजार रुपये का ड्राफ्ट भी जमा करना होगा. आवेदन में कोचिंग सेंटर का पता, स्थिति, पाठ्यक्रम, शिक्षकों व छात्रों की संख्या, जनसुविधाओं की व्यवस्था व समुचित उपस्कर सहित अन्य तरह के आंकड़े शिक्षा विभाग को उपलब्ध कराने होंगे. इसके बाद डीएम द्वारा संबंधित अनुमंडल अधिकारी आवेदन को आवेदन के आधार पर भौतिक सत्यापन करने और सही पाये जाने पर ही निबंधन की स्वीकृति दी जाती है.
प्रशासन के पास भी रहेगा आंकड़ा: कोचिंग संस्थान के आसपास होने वाली घटना व छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सरकार का यह कानून कामयाब रहेगा. जिला प्रशासन के पास कोचिंग संस्थान की जानकारी व संचालक का प्रोफाइल पूर्व से मौजूद रहेगा. ऐसी जगहों पर प्रशासनिक व्यवस्था सुदृढ़ कर असामाजिक कृत्यों से भी निबटा जायेगा. इसके अलावा सरकार को भी कोचिंग सेंटर से राजस्व की प्राप्ति होगी.
75 आवेदन हो चुके हैं जमा
सरकार द्वारा निर्देश जारी करने के बाद अभी तक महज 75 कोचिंग संस्थान द्वारा ही निबंधन के लिए आवेदन जमा किये गये हैं. इन आवेदन को शिक्षा विभाग द्वारा डीएम कार्यालय को भेजा जा चुका है. मिली जानकारी के अनुसार, डीएम कार्यालय से संबंधित एसडीओ को आवेदन जांच के लिए भेजा गया है. जहां से कोई जांच रिपोर्ट नहीं मिल सकी है. ज्ञात हो कि प्रशासनिक उदासीनता की वजह से गली मोहल्ले में बगैर संसाधन व योग्यता के संचालित कोचिंग संस्थान बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं.
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