रिश्वत के सहारे ही मिल पा रहा पीएम आवास योजना का लाभ

Updated at : 05 Oct 2017 3:42 AM (IST)
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रिश्वत के सहारे ही मिल पा रहा पीएम आवास योजना का लाभ

सोनवर्षाराज : भ्रष्टाचार मे लिप्त प्रखंड कार्यालय के रवैये ने पीएम आवास योजना को बदतर स्थिति में पहुंचा दिया है. पूर्व बीडीओ प्रकाश कुमार द्वारा चयनित लाभुकों के खाते में योजना की राशि भेजे जाने के बाद वर्तमान बीडीओ सुधीर कुमार द्वारा भुगतान के रोक के आदेश ने इसमें भ्रष्टाचार की परतें खोलनी शुरू कर […]

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सोनवर्षाराज : भ्रष्टाचार मे लिप्त प्रखंड कार्यालय के रवैये ने पीएम आवास योजना को बदतर स्थिति में पहुंचा दिया है. पूर्व बीडीओ प्रकाश कुमार द्वारा चयनित लाभुकों के खाते में योजना की राशि भेजे जाने के बाद वर्तमान बीडीओ सुधीर कुमार द्वारा भुगतान के रोक के आदेश ने इसमें भ्रष्टाचार की परतें खोलनी शुरू कर दी है.

अभी के बीडीओ सुधीर कुमार का कहना है कि लाभुकों से आवश्यक कागजात लिये बिना लाभुकों के खाते में राशि भेज दी गयी थी. लाभुकों से कागजात जमा कराने के लिए ही भुगतान पर एक हफ्ते की रोक लगायी गयी थी. यह तर्क सही नहीं दिखता है. पीएम आवास योजना के लाभुकों का आवश्यक कागजात लिये बिना ही खाते में राशि भेज देना संभव नहीं जान पड़ता है. विश्वस्त सूत्रों की मानें तो अवैध वसूली के लिए बिचौलियों को पर्याप्त समय देने के लिए ही भुगतान पर बीडीओ द्वारा रोक लगायी गयी थी. दूसरी बात बिचौलिये एवं विकास मित्र द्वारा जिन लाभुकों से घूस की राशि वसूल ली जाती है.

उसकी सूची उनके पास कैसे पहुंच जाती है. सूची बिचौलिये व विकास मित्र को उपलब्ध होना ही पंचायत आवास सहायक की मिलीभगत को दर्शाता है. बिना आवास सहायक की मिलीभगत के संबंधित पंचायत की सूची उपलब्ध होना संभव ही नहीं है. यह एक ऐसा रैकेट है, जिसमें बिचौलिये व विकास मित्र लाभुकों से पैसे की वसूली कर वसूली गयी राशि पंचायत आवास सहायक तक पहुंचाते हैं, जो राशि वहां से ऊपर तक पहुंचती है. अवैध वसूली के वक्त ही लाभुकों पर इस तरह से दबाव बना दिया जाता है कि लाभुकों को मजबूरन रकम देने के लिए बाध्य होना पड़ता है.

अतलखा पंचायत के बढौना गांव में आवास योजना की राशि का उठाव करने वाली रंजु देवी व तारा देवी ने स्पष्ट बताया कि विकास मित्र ने सूची बनने से पहले पांच हजार तथा भुगतान कराने के वक्त 8500 रुपया सेवा शुल्क के रूप में लिया. हालात यह है इस तरह कि अवैध वसूली किसी एक पंचायत में न होकर तमाम पंचायतों में की जा रही है. अगर इसकी उच्चस्तरीय जांच की जाये, तो ऐसे रैकेट का पर्दाफाश हो सकता है.
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