पहले चरण का नहीं मिला पैसा, दूसरा चरण शुरू

Published at :15 Jun 2017 4:35 AM (IST)
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पहले चरण का नहीं मिला पैसा, दूसरा चरण शुरू

ओडीएफ घोषित करने में आ रही परेशानी, लोग नहीं दे रहे ध्यान महादलितों के पास शौचालय बनाने को नहीं है जमीन सोनवर्षाराज : लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत खुले में शौच से मुक्त करने के लिए प्रत्येक घर में शौचालय बनाने की योजना का द्वितीय चरण जोर शोर के साथ देहद, सहसौल, अतलखा, सरौनी […]

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ओडीएफ घोषित करने में आ रही परेशानी, लोग नहीं दे रहे ध्यान

महादलितों के पास शौचालय बनाने को नहीं है जमीन
सोनवर्षाराज : लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत खुले में शौच से मुक्त करने के लिए प्रत्येक घर में शौचालय बनाने की योजना का द्वितीय चरण जोर शोर के साथ देहद, सहसौल, अतलखा, सरौनी मधेपुरा पंचायतों मे प्रारंभ हो चुका है. लेकिन प्रथम चरण में चयनित लगमा एवं सोहा पंचायत मे शौचालय निर्माण का हश्र देख कर लगता है कि यह योजना शुरू होने के साथ ही दम तोड़ने लगी है.
प्रथम चरण का हश्र
प्रथम चरण में क्षेत्र की लगमा एवं सोहा पंचायत को खुले में शौच से मुक्त करने के लिए प्रत्येक घर में शौचालय निर्माण प्रारंभ कराया गया था. विभागीय निर्देश के अनुसार, बीते मार्च 2017 तक दोनों पंचायतों को पूर्ण रूप से ओडीएफ घोषित कर शौचालय बनाने वाले प्रत्येक लाभुक को 12 हजार रुपये का अनुदान दिया जाना था. निर्धारित अवधि गुजर जाने के बावजूद दोनों पंचायतों के मात्र तीन वार्ड ओडीएफ हो पाये हैं. जबकि अनुदान की राशि का भुगतान मात्र एक वार्ड को भी पूरी तरह नहीं हो पाया है. जाहिर है प्रथम चरण की असफलता के बावजूद प्रशासनिक पदाधिकारी पंचायतों को पूर्णरूपेण ओडीएफ करने की कमी को दूर किये बिना द्वितीय चरण की शुरुआत कैसे कर दी.
ओडीएफ करने की दुश्वारियां
ओडीएफ के साथ अगर लाभुकों को प्रोत्साहन राशि ससमय मिलता रहता तो लोगों में शौचालय निर्माण का उत्साह बना रहता. लेकिन ओडीएफ होने के बावजूद चार महीने से प्रोत्साहन राशि नहीं मिलने से लोगों में जो शौचालय निर्माण के प्रति उत्साह था, वो घटता चला गया. अनुदान मिलने से लोग जैसे-तैसे पैसों का इंतजाम कर शौचालय निर्माण करा तो लिए. लेकिन अनुदान नहीं मिलने से विभाग के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा है. वहीं सबसे बड़ी समस्या उन महादलित परिवारों को शौचालय बनवाना है, जिन्हें अपने आवास तक के लिए बमुश्किल से भूमि है. ऐसे परिवारों के लिए अंचल प्रशासन द्वारा सरकारी भूमि की व्यवस्था कर सामूहिक शौचालय बनवा कर पूर्ण पंचायत को ओडीएफ किया जा सकता था. लेकिन अंचल प्रशासन ऐसे परिवारों के लिए जमीन उपलब्ध कराने में उदासीन रवैया अपनाये हुए है. ऐसे में लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान की सफलता स्वत: संदिग्ध साबित हो रही है. लोहिया स्वच्छता अभियान की जिला कोर्डिनेटर सोनम कुमारी ने भी इस पर कोई टिप्पणी नहीं दी.
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