SIR पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ममता बनर्जी गदगद, तृणमूल कार्यकर्ताओं को पर्ची तैयार रखने को कहा

Author Ashish Jha
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सुप्रीम कोर्ट और ममता बनर्जी

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Mamata Banerjee: सुप्रीम कोर्ट ने अपनी विशेष शक्ति का प्रयोग करते हुए बंगाल में एक और वोटर लिस्ट जारी करने के लिए चुनाव आयोग से कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल में ऐसे वोटरों को भी इस बार मतदान करने का अधिकार दिया है, जिन्हें एसआईआर ट्रिब्यूनल ने वोटर के तौर पर मान्यता दी है या मतदान से एक दिन पहले तक देगी. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है.

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Mamata Banerjee: कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विधानसभा के लिए होने जा रहे मतदान से पहले देश की सर्वोच्च अदालत ने एक ऐतिहासिक आदेश जारी किया है. संविधान के अनुच्छेद 142 का प्रयोग करते हुए, सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि मतदाता सूची को अंतिम रूप दिए जाने के बाद भी, न्यायाधिकरण द्वारा जिनके नाम वैध सिद्ध होंगे, वे मतदान कर सकेंगे. एक ओर, इस फैसले से सत्ताधारी खेमे में खुशी का माहौल है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा-आज मुझसे ज्यादा खुश कोई नहीं है. यह जनता की जीत है.

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सर्वोच्च न्यायालय का विशेष आदेश

सामान्य नियम के अनुसार, मतदाता सूची को चुनाव की निर्धारित तिथि (इस मामले में, 6 और 9 तारीख) से पहले ‘लॉक’ कर दिया जाता है. इसके बाद सूची में कोई और बदलाव नहीं किया जा सकता, लेकिन न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की खंडपीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत प्राप्त विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए इस कानूनी बाधा को दूर कर दिया है. न्यायालय ने आदेश दिया कि 21 तारीख को एक सूची जारी की जाएगी और न्यायाधिकरण 27 तारीख को अंतिम घोषणा करेगा. जिन लोगों के नाम न्यायाधिकरण द्वारा ‘स्वीकृत’ किए जाएंगे, उनके नाम सूची में शामिल किए जाएंगे और नई मतदाता पर्चियां वितरित की जाएंगी.

ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया

यह खबर मिलने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दिन्हाटा सम्मेलन से हेलीकॉप्टर में सवार होने से पहले अपनी खुशी जाहिर की. उन्होंने कहा- आज मुझसे ज्यादा खुश कोई नहीं है. मैं बार-बार धैर्य रखने और न्यायाधिकरण में आवेदन करने की बात कहती रही हूं. मैंने खुद इस मामले में केस दायर किया था, आज मुझे न्यायपालिका पर गर्व है. यह जनता की जीत है. उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि मतदाता सूची मिलते ही मतदाता पर्चियां तैयार करके हर घर तक पहुंचाएं.

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वामपंथियों के प्रतिदावे

वामपंथी खेमे ने मुख्यमंत्री के इस दावे का कड़ा विरोध किया है. वरिष्ठ वकील और सीपीएम नेता विकास रंजन भट्टाचार्य ने दावा किया कि इस कानूनी लड़ाई का मुख्य श्रेय मुर्शिदाबाद की आम महिला मोस्तारी बानू को जाता है. उन्होंने ही सबसे पहले इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी. इस संबंध में वकील विकास रंजन भट्टाचार्य ने कहा- इस बयान का जवाब देने के नाम पर आप झूठ का सहारा ले रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट का फैसला पिछले कुछ दिनों में साफ हो चुका है. जब हमने कहा कि ट्रिब्यूनल से पास होने वालों को वोट देने की इजाजत दी जानी चाहिए, तो सुप्रीम कोर्ट ने कहा, जी हां, उन्हें इजाजत दी जाए, हमारे पास 142 अधिकार हैं. तब संकेत बिल्कुल स्पष्ट थे.

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