पिपड़ा कोसी बांध टोला के 10 परिवार खुले आसमान के नीचे
Published by : Dipankar Shriwastaw Updated At : 15 Feb 2026 6:12 PM
पिपड़ा कोसी बांध टोला के 10 परिवार खुले आसमान के नीचे
राख में बदले सपने, प्रशासन ने पहुंचाई पहली राहत शुक्रवार की रात लगी आग से लाखों का हुआ है नुकसान सलखुआ. अंचल क्षेत्र के उटेसरा पंचायत के वार्ड संख्या 12 स्थित पिपड़ा कोसी बांध टोला में शुक्रवार की भयावह रात ने 10 परिवारों की जिंदगी की पूरी कहानी ही बदल दी. देर रात उठी आग की लपटों के द्वारा देखते-देखते गरीबों की झोपड़ियों को निगल लेने और कुछ ही पलों में वर्षों की मेहनत से जुटाया गया सामान राख में तब्दील हो जाने की घटना की सूचना पर सीओ पुष्पांजलि कुमारी ने तत्काल राहत स्वरूप 10 कंबल और 10 प्लास्टिक शीट उपलब्ध कराया. राहत सामग्री का वितरण मुखिया अनिल कुमार महंथ एवं भाकपा अंचल सचिव उमेश चौधरी ने पीड़ित परिवारों के बीच किया. कंबल और प्लास्टिक शीट पाकर पीड़ितों ने थोड़ी राहत महसूस की, मानो टूटे मन को सहारा मिल गया हो. सीओ ने बताया कि राजस्व कर्मचारियों के हड़ताल पर रहने के कारण अन्य सहायता तत्काल उपलब्ध नहीं करायी जा सकी है. हालांकि वाउचर की प्रक्रिया पूरी होते ही सरकार द्वारा निर्धारित मुआवजा राशि शीघ्र प्रदान की जायेगी. पिपड़ा गांव में किसी की बेटी की शादी के लिए रखे एक लाख से अधिक रुपये जल गये तो किसी के जेवरात और जरूरी कागजात आग की भेंट चढ़ गये. कपड़े, अनाज, बर्तन, फर्नीचर, सिलाई मशीन, साइकिल सब कुछ आग ने छीन लिया. इतना ही नहीं, एक दर्जन से अधिक बकरियां भी झुलसकर मर गयी. रातभर चीख-पुकार और अफरातफरी का मंजर बना रहा. सुबह जब धुआं छंटा तो सामने सिर्फ राख का ढेर और बेबसी खड़ी थी. अग्निकांड के बाद से सभी पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं. ठंडी हवाओं और अनिश्चित भविष्य के बीच बच्चों की सूनी आंखें और महिलाओं का दर्द किसी का भी दिल दहला देने के लिए काफी है. फिलहाल पिपड़ा कोसी बांध टोला में हर चेहरे पर एक ही सवाल है, अब आगे क्या. राख में बदले सपनों के बीच प्रशासन और समाज से उम्मीद ही इन परिवारों का सबसे बड़ा सहारा बनी हुई है.
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