दिल में दर्द इतना कि छलक पड़े आंसू
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :27 Apr 2017 8:24 AM (IST)
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प्रभात खबर ने महिला सशक्तीकरण की दिशा में पहल की है. महिलाओं के हक की उठती आवाज अब गांवों के चौपालों पर भी सुनाई पड़ेगी़ बदलते दौर में महिलाओं ने घर की दहलीज जरूर लांघ रही हैं, लेकिन परेशानियां उनका पीछा नहीं छोड़तीं. बुधवार को नरहट प्रखंड की जमुआरा पंचायत के बरौली में प्रभात खबर […]
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प्रभात खबर ने महिला सशक्तीकरण की दिशा में पहल की है. महिलाओं के हक की उठती आवाज अब गांवों के चौपालों पर भी सुनाई पड़ेगी़ बदलते दौर में महिलाओं ने घर की दहलीज जरूर लांघ रही हैं, लेकिन परेशानियां उनका पीछा नहीं छोड़तीं. बुधवार को नरहट प्रखंड की जमुआरा पंचायत के बरौली में प्रभात खबर की तरफ से बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान महिला सशक्तीकरण को समर्पित संवाद पर कार्यशाला आयोजित की गयी़ इसमें पंचायत की महिलाओं ने हिस्सा लिया है.
नरहट : पहले चरण में इस कार्यक्रम को प्रखंड के सभी पंचायतों में पूरा किया जाना है. इसके अगले चरण में गांवस्तर तक इसे ले जाने की योजना है. फिर प्रखंड स्तर पर सेमिनार होगा़ पूरे कार्यक्रम में सिर्फ महिलाओं की आवाज गूंजेगी. स्कूली बच्चियों की समस्या, कामकाजी महिलाओं की परेशानी, खेतों में काम करनेवाली महिला मजदूरों की पीड़ा, महिला जनप्रतिनिधियों के कंधे पर पुरुषों की प्रभावी राजनीति पर बेबाक चर्चा होगी. यह जानने का प्रयास किया जायेगा कि आखिर वह कौन सा नासूर है, जिसने महिलाओं के मामले में समाज को बांधे रखा है.
फूट-फूट कर रो पड़ी छात्रा
संगीता बीएससी की छात्रा है. वह इंजीनियर बनना चाहती है और घरवाले उसकी शादी करने पर तुले हैं. शादी की चर्चा संगीता के लिये पीड़ादायक है. प्रभात खबर मंच के जरिये अपनी बात रखते हुए संगीता फूट-फूट कर रो पड़ी. उसने कहा कि घरवालों के लिये बेटियां बोझ जैसी हैं. माता-पिता जितनी जल्दी हो सके, उसकी ब्याह कर अपने घर से अलग करना चाहते हैं.
उसकी जिंदगी का कोई मकसद समझ में नहीं आता. बहते आंसूओं को रोकने का प्रयास करती संगीता लगा तार बोले जा रही थी. कहीं-न कहीं इसका दर्द शादी के सामाजिक बंधन की छटपटाहट के रूप में दिखी है. आज की लड़कियां पहले अपना कैरियर बनाना चाहती हैं.
नारी सृष्टि का आधार है : डॉ पूनम
समाज में मां, बहू, बेटी, बहन, पत्नी, प्रियतमा जैसे कई रूपों में हमारे जीवन को सुखद अहसास कराती है. इनसे दीगर जीवन का कोई मोल नहीं है. हर सफल व्यक्ति के पीछे किसी महिला का योगदान है. यह महिला इन्हीं रूपों में मौजूद होती हैं. यह बातें जिले की प्रखर समाजसेवी व महिला जागरूकता को आगे बढ़ा रहीं डॉ पू.नम शर्मा ने कहीं. वह मुख्य अतिथि थीं.
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि कभी भी अपनी समस्याओं को शेयर करना हो,तो उन्हें याद करें. उन्होंने प्रभात खबर के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि इससे आधी आबादी को बल मिलेगा. नि:संकोच यह एक सामाजिक जिम्मेवारी है, जिसके समाधान की दिशा में प्रभात खबर ने सार्थक कदम बढ़ाया है.
आज के दौर में महिलाएं अपने आप को असुरक्षित महसूस करती हैं. समाज इसके प्रति संवेदनशील नहीं है.आये दिन महिला उत्पीड़न, यौन उत्पीड़न, दुष्कर्म आदि की घटनाएं हो रही हैं. परिवार में भी वह खुद को महफूज नहीं समझ पाती हैं. महिलाओं को यह विश्वास हो जाना चाहिए कि वे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में पुरुषों से किसी भी भांति कमतर नहीं है.
लिंगानुपात दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है. अगर इसे नहीं रोका गया, तो आनेवाले दिनों में यह महामारी का रूप ले लेगा. बेटियां आज के माहौल में सिमटी हुई नजर आ रही हैं.भाइयों के अपेक्षाकृत बेटियों को कमतर मान सम्मान और लाड़-प्यार मिल रहा है.आज हर मां-बाप की इच्छा है कि हमारे पास सिर्फ और सिर्फ बेटा हो़ इस कारण भ्रूण हत्या का दौर चल पड़ा है. अगर हम नवादा की बात करें, तो आज भी दर्जनों स्थानों पर लिंग की जांच विभिन्न अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर किया जा रहा है. ऐसे अल्ट्रासाउंड केंद्रों को चिन्हित कर प्रशासन छापामारी करे. दोषी पाये जाने पर सजा दिलाए़ं
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