छापेमारी के बाद सियासी उफान

Published at :25 Apr 2017 8:50 AM (IST)
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छापेमारी के बाद सियासी उफान

घोटाले में नामजद तीन पार्षदों की गिरफ्तारी के लिए स्थानीय थानों की पुलिस को मिली जिम्मेवारी सासाराम कार्यालय : नगर पर्षद में करोड़ों रुपये के घोटालेबाजों के खिलाफ सोमवार की अहले सुबह निगरानी के छापे से शहर में कोहराम मच गया. सुबह करीब पांच बजे से मॉडल व नगर थाने की पुलिस के साथ निगरानी […]

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घोटाले में नामजद तीन पार्षदों की गिरफ्तारी के लिए स्थानीय थानों की पुलिस को मिली जिम्मेवारी
सासाराम कार्यालय : नगर पर्षद में करोड़ों रुपये के घोटालेबाजों के खिलाफ सोमवार की अहले सुबह निगरानी के छापे से शहर में कोहराम मच गया. सुबह करीब पांच बजे से मॉडल व नगर थाने की पुलिस के साथ निगरानी के अधिकारी ने शहर के जक्कीशहीद, कंपनी सराय, गौरक्षणी, तकिया, शोभागंज व जानीबाजार मुहल्ला स्थित नगर पार्षदों के घर पर छापेमारी किये. छापेमारी में मुख्य पार्षद नाजिया बेगम, रीता सिन्हा व विनोद प्रसाद को गिरफ्तार करने में पुलिस सफल रही. वहीं उप मुख्य पार्षद चंद्रशेखर सिंह, शशि पांडेय व मीरा कौर पुलिस के हाथ नहीं आये. गिरफ्तार आरोपितों को करीब सात घंटे तक मॉडल थाने में बैठाने के बाद निगरानी के टीम उन्हें दो वाहनों में बैठा कर पटना के लिए लेकर दिन के करीब एक बजे रवाना हुई. उनकी रवानगी से पहले गिरफ्तार आरोपितों के परिजन भी पटना के लिए रवाना हुए.
सामग्री खरीद में हुआ था करोड़ों का घोटाला: वर्ष 2014 से 2016 तक नगर पर्षद में करीब साढ़े सात करोड़ रुपये की लैपटॉप, हाइ मास्ट लाइट, डेकोरेटिव पोल स्ट्रीट लाइट, एलइडी लाइट, रेडिमेड यूरिनल-शौचालय आदि की खरीद हुई थी. उस समय टेंडर से लेकर वर्क ऑर्डर तक की प्रक्रिया एक सप्ताह से कम समय में पूरी कर ली गयी थी. यूरिनल आनन-फानन लगाये गये, जिसका परिणाम हुआ कि कुछ ही दिनों में अधिकतर उपयोग के लायक नहीं रहे. एलइडी बोर्ड की हालत ऐसी रही कि कुछ दिनों के बाद एक-एक कर बंद हो गये.
स्ट्रीट डेकोरिटव लैंप के लिए कई जगह बेतरतीब तरीके से पुरानी जीटी रोड के बीच में डिवाइडर बना दिया गया, जो आज भी दुर्घटना के कारण बन रहे हैं. कुछ डेकरोटिव स्ट्रीट लैंप सड़क के किनारे लगा दिये गये. लैपटॉप खरीद में भी बाजार दर से अधिक के भुगतान का आरोप लगा. करीब साढ़े सात करोड़ रुपये की खरीद हुई, लेकिन हो-हल्ला मचने पर भुगतान आधा ही हो सका. शहरवासियों का आधा पैसा बच गया.
घोटाले के खिलाफ हुआ था आंदोलन: सामग्री खरीद में बिना प्रक्रिया पूरी किये खरीदारी का विरोध नगर पार्षद अतेंद्र कुमार व दशरथ प्रसाद के नेतृत्व में कई पार्षदों ने शुरू किया था. धरना-प्रदर्शन से लेकर अनशन तक हुआ. शहर में नुक्कड़ नाटक हुआ. इसके बाद प्रशासन में सुगबुगाहट हुई. तब के प्रभारी डीएम राधा किशोर झा ने इसके जांच का आदेश दिया. जांच की जिम्मेवारी एसडीओ सासाराम व जिला लेखा योजना पदाधिकारी सासाराम को दी गयी. निर्धारित समय से अधिक समय गुजरने पर पार्षदों ने फिर आंदोलन शुरू किया.
जैसे-तैसे रिपोर्ट पेश हुआ, तो उसमें वित्तीय अनियमितता उजागर हुई. लेकिन, कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं होते देख, पार्षद अतेंद्र सिंह व दशरथ प्रसाद ने कोर्ट का रूख अख्तियार किया. कोर्ट के आदेश पर प्रशासन में हलचल हुई व मामला निगरानी को सौंपा गया. निगरानी ने पटना स्थित अपने कोर्ट दिनांक 20 सितंबर, 2016 को मुकदमा दर्ज कर लिया.
निगरानी इंस्पेक्टर श्रीनारायण सिंह की जांच रिपोर्ट पर भादवि की धारा 420, 406, 409, 467, 468, 471, 120 (बी) के अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 के तहत निगरानी कांड संख्या 93/2016 दर्ज की गयी. इसके बाद से निगरानी भी सुस्त पड़ा था और आरोपित भी. सूत्रों की माने तो नगर पर्षद चुनाव के कारण करीब सात माह बाद निगरानी में फुर्ती आयी और तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया.
महज 20 दिन पहले नाजिया ने संभाली थी कुरसी
निगरानी में मुकदमा और कोर्ट के आदेश के आलोक में नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव चैतन्य प्रसाद ने 26 मई, 2016 को नाजिया बेगम को मुख्य पार्षद के पद से बरखास्त कर दिया था. इसके बाद 25 जून, 2016 को मुख्य पार्षद के पद पर नजमा बेगम आसीन हुई. अपनी बरखास्तगी को लेकर नाजिया बेगम कोर्ट की शरण में चली गयी थी.
कोर्ट ने मुख्य सचिव के आदेश को बिना समुचित प्रक्रिया के बरखास्तगी की कार्रवाई को 23 फरवरी 2017 को मौखिक रूप से निरस्त कर दिया था. कोर्ट ने उक्त मौखिक आदेश तो सुना दिया था, लेकिन लिखित में आदेश का प्रसारण 16 मार्च, 2017 को हुआ. लिखित आदेश के बावजूद कुरसी को लेकर खींचतान होते रही. करीब एक सप्ताह के बाद तीसरी बार नाजिया बेगम की ताजपोशी हुई थी. ताजपोशी के बाद नाजिया बेगम ने कार्यालय की फाइलें खंगालनी शुरू ही की थी कि निगरानी ने उन्हें दबोच लिया.
चेयरमैन के दावेदार को लेकर आयी शून्यता
निगरानी की कार्रवाई से वर्तमान समय में सासाराम नगर पर्षद में चेयरमैन के दावेदार को लेकर शून्यता देखी जा रही है. सासाराम नगर पर्षद में चेयरमैन का पद अनारक्षित महिला के लिए आरक्षित होने पर इसकी प्रबल दावेदार नाजिया बेगम व शशि पांडेय थी. एक की गिरफ्तारी हो चुकी है और दूसरी फरार हैं. इसके बाद चेयरमैन की कुरसी के लिए कोई सशक्त महिला उम्मीदवार परिदृश्य में नहीं हैं. हालांकि, दावेदारों की कमी नहीं है. चुनाव के बाद समीकरण पर चेयरमैन के कई दावेदार हो सकते हैं. लेकिन, फिलहाल कोई सामने नहीं है.
सोमवार को ही नाजिया को करना था नामांकन
नगर पर्षद के चुनाव के लिए नाजिया बेगम मंगलवार को नामांकन पत्र दाखिल करना था. तैयारी पूरी हो चुकी थी कि सोमवार की सुबह करीब पांच बजे निगरानी ने उनके मंसूबे पर ब्रेक लगा दी.
उधर, छह में दो आरोपित उप मुख्य पार्षद चंद्रशेखर सिंह व शशि पांडेय क्रमश: वार्ड 8 व 12 से नामांकन कर चुकी हैं. गिरफ्तार पार्षद विनोद प्रसाद की पत्नी मंजू देवी ने सोमवार को नामांकन पत्र दाखिल किया है. वहीं, गिरफ्तार पार्षद रीता सिन्हा के बेटे राकेश चंद्र सिन्हा ने वार्ड छह से अपना नामांकन पत्र दाखिल किया है. चर्चा है कि आरोपित रीता सिन्हा व मीरा कौर इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगी.
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