अंतिम वार्ड तक फैली गंदगी

Published at :30 Nov 2016 8:10 AM (IST)
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अंतिम वार्ड तक फैली गंदगी

वार्ड 40 में विकास तो हुआ, लेकिन सफाई का इंतजाम कम लाखों खर्च के बाद पानी की किल्लत से जूझ रहे लोग विकास कार्यों पर कालिख पोत रही गलियों में पसरी गंदगी स्कूल नहीं होने से छात्रों का पठन पाठन हो रहा प्रभावित सासाराम शहर : नगर पर्षद क्षेत्र के वार्ड संख्या 40 में विकास […]

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वार्ड 40 में विकास तो हुआ, लेकिन सफाई का इंतजाम कम
लाखों खर्च के बाद पानी की किल्लत से जूझ रहे लोग
विकास कार्यों पर कालिख पोत रही गलियों में पसरी गंदगी
स्कूल नहीं होने से छात्रों का पठन पाठन हो रहा प्रभावित
सासाराम शहर : नगर पर्षद क्षेत्र के वार्ड संख्या 40 में विकास का काम अन्य वार्डों से कुछ बेहतर तो हुआ है. लेकिन, वार्ड की गलियों में व सड़कों पर पसरी गंदगी विकास कार्यों पर कालिख पोतने का काम कर रही है. लाखों राशि खर्च के बाद भी लोगों के घरों में पेयजल की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाया है. वार्ड में नाली व गली का निर्माण तो हुआ है, लेकिन कुछ जगहों पर नाली की सफाई नहीं होने से पानी का बहाव रुका है. वार्डवासियों में जागरूकता का अभाव है.
लोग जहां-तहां पर कूड़ा फेंक दे रहे हैं. इसका जिम्मेवार वार्ड पार्षद भी हैं. क्योंकि, पार्षद द्वारा लाखों की राशि खर्च कर दिये जाने के बाद भी गलियों में व सड़कों पर डस्टबीन नहीं लगाया जा सका. इसके कारण लोग गली व सड़क पर ही कूड़ा फेंक कर चलते बनते हैं. सुबह में सफाईकर्मी कूड़ा-कचरा की सफाई कर के जाते हैं. दोपहर होते-होते गंदगी का ढेर लग जाता है. नाली का सफाई नहीं होने से पानी सड़कों पर बहने लगती है. स्लम एरिया में शौचालय, आवास व पेयजल की व्यवस्था नहीं होने से लोगों की समस्याएं विकराल हो गयी है. स्लम एरिया में रहनेवाले वासियों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही है.
गरीबों को राशन-केरोसिन भी नहीं मिल रहा है. कुछ घरों में अभी तक शौचालय नहीं बन पाया है. जिससे लोगों को खुले में शौच करने जाना पड़ता है. बच्चे भी जहां-तहां सड़क पर ही शौच कर देते है. इससे सड़कों पर चलना भी मुश्किल हो गया है. स्लम एरिया में रहनेवाले गरीब तबकों का सरकारी योजना के तहत आवास का निर्माण भी नहीं हो सका है. दलित खुले गुजर-बसर करने को विवश हैं. स्कूल नहीं रहने से वार्ड के बच्चों का शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो रहा है. दूसरे वार्ड के स्कूलों में जाकर बच्चों को पढ़ाई करना पड़ता है.
कुछ लोगों को सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल रहा है. गरीबों को राशन नहीं मिलने से समस्या गंभीर हो गयी है. नालियों के जाम हो जाने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है. पेयजल की समस्या भी कुछ जगहों पर आज भी बरकरार है. दूसरें वार्डों में जाकर लोगों को पानी की व्यवस्था करना पड़ती है. गर्मी के दिनों में तो पानी के लिए हाहाकार मच जाता है.
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