शराबबंदी के बाद खनन छोड़ लगायी फैक्टरी

Published at :18 Nov 2016 8:01 AM (IST)
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शराबबंदी के बाद खनन छोड़ लगायी फैक्टरी

कार्रवाई. वजीरगंज से जिले भर में होती थी शराब की आपूर्ति महिलाएं व बच्चे भी जुड़े थे धंधे में सासाराम नगर : मुफस्सिल थाना क्षेत्र के वजीरगंज में बने देशी शराब की पूरे जिले में सप्लाई की जाती है. प्रतिदिन हजारों लीटर शराब की तैयारी की जाती थी. जिसे के कोने कोने से तस्कर शराब […]

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कार्रवाई. वजीरगंज से जिले भर में होती थी शराब की आपूर्ति
महिलाएं व बच्चे भी जुड़े थे धंधे में
सासाराम नगर : मुफस्सिल थाना क्षेत्र के वजीरगंज में बने देशी शराब की पूरे जिले में सप्लाई की जाती है. प्रतिदिन हजारों लीटर शराब की तैयारी की जाती थी. जिसे के कोने कोने से तस्कर शराब ले जाते थे. कई जगहों पर शराब की खेप पहुंचायी जाती थी. तस्करों को 40 रुपये प्रति पाउच शराब नकद पैसा ले कर दिया जाता था.
उक्त बातें गुरुवार को गिरफ्तार सरगना सोमारू चौधरी की पत्नी गीता देवी ने उत्पाद विभाग की टीम को बतायी.उसने बताया कि मेरे पति पहले पत्थर व्यवसाय से जुड़े थे. प्रदेश में शराब बंदी के बाद शराब की डिमांड व मुनाफा को देख अपने दोस्त विकास चौधरी, धर्मेंद्र चौधरी, राज कुमार चौधरी, कामाख्या उर्फ भुअर, लाल बाबू व ललीत नारायण के साथ शराब बनाने की योजना बनायी. सभी झारखंड जा कर शराब पैकिंग की मशीन रैपर व कचचा स्प्रीट ला कर काम शुरू किये. पहले दिन मात्र 20 पाउच ही तैयार हो सका. उसके बाद नोखा से सुरेश सिंह, रवि कुमार व राजेंद्र चौधरी को पांच सौ प्रति दिन की मजदूरनी पर लाया गया. वे लोग पहले बिहिटा में शराब पैकिंग करते थे. जून से काम शुरू किया गया. इनके आने के बाद प्रतिदिन हजार लीटर शराब तैयार होने लगा. दो मशीनों से पैकिंग की जा रही थी.
इधर, एक माह से गांव वालों को इसकी जानकारी हो गयी थी. कई लोग पैसे का डिमांड करने लगे. नहीं देने पर पुलिस से पकड़वाने की धमकी दी जाने लगी. रात में पूरी गोपनीयता के साथ पैकिंग की जाती थी. पैकिंग के बाद रात में माल को खदान क्षेत्र में छिपा दिया जाता था. वहीं से सप्लाई की जाती थी. उसने बताया कि शहर के कादिरगंज, बौलिया, तकिया, मुफस्सिल थाना क्षेत्र के अमरा तालाब मिश्रीपुर, बेदा आदि जगहों पर सबसे ज्यादा माल भेजा जाता था. उत्पाद निरीक्षक फैयाज अहमद ने कहा कि सोमारू चौधरी पहले झारखंड से शराब ला कर बेचता था. शुरू में वह झारखंड से अंगरेजी शराब ला कर बेचता था. पत्थर खदान में देशी शराब की बड़ी डिमांड होने लगी. चूंकि सैकड़ों मजदूर खदान क्षेत्र में काम करते है.
वे महंगी शराब नहीं खरीद सकते. उन्हें या तो महुआ शराब चाहिए या देशी शराब फिर वह झारखंड के हरीहरगंज से देशी शराब व मसालेदार शराब लाने लगा. अधिक मुनाफा के लालच में दोस्तों के साथ मिल कर खुद शराब बनाने की योजना बनायी. पहली कच्चा स्प्रीट से शराब तैयार करता था.
गोपालगंज में जहरीली शराब को मरने की घटना के बाद सोमारू चौधरी की टीम झारखंड से तैयार स्प्रीट ला कर पैकिंग करने लगे. सोमारू की पत्नी स्वयं झारखंड से स्प्रीट लगाती थी. गिरफ्तार लोगों से मिली जानकारी पर उत्पाद टीम इस नेटवर्क से जुड़े सभी तस्करों को लिस्ट तैयार कर रही है. बहुत जल्द स्थानीय पुलिस के सहयोग सभी को गिरफ्तार कर लिया जायेगा.
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