मछलीपालकों के लिए प्रेरणास्नेत हैं शक्ति
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :22 Jun 2015 9:46 AM (IST)
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बड़हरिया (सीवान): उच्च शिक्षा पाकर रोजगार के लिए भटक रहे युवाओं के लिए शक्ति सिन्हा प्रेरणा स्नेत हैं. शक्ति ने अपने कठिन परिश्रम और जज्बे से यह साबित कर दिया कि रोजगार सिर्फ शहर जाकर ही नहीं प्राप्त किया जा सकता, बल्कि अपने गांव में भी मत्स्यपालन कर अच्छी आय प्राप्त की जा सकती है. […]
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बड़हरिया (सीवान): उच्च शिक्षा पाकर रोजगार के लिए भटक रहे युवाओं के लिए शक्ति सिन्हा प्रेरणा स्नेत हैं. शक्ति ने अपने कठिन परिश्रम और जज्बे से यह साबित कर दिया कि रोजगार सिर्फ शहर जाकर ही नहीं प्राप्त किया जा सकता, बल्कि अपने गांव में भी मत्स्यपालन कर अच्छी आय प्राप्त की जा सकती है. बेकार पड़ी ऊसर व बंजर भूमि को पोखरे के रूप में आबाद कर इस नौजवान ने मत्स्यपालन को अपना कैरियर का हिस्सा बनाया. वे पिछले करीब दस साल से मछलीपालन कर रहे हैं. मछलीपालन से उन्हें प्रत्येक वर्ष छह से सात लाख रुपये की शुद्ध आय हो रही है.
यही नहीं, वे दूसरे युवाओं को भी मत्स्यपालन के लिए प्रेरित कर रहे हैं. बड़हरिया प्रखंड के ग्राम रोहड़ा खुर्द के त्रिपुरारी शरण अस्थाना के पुत्र शक्ति सिन्हा ने स्नातक की शिक्षा हासिल करने के बाद आर्थिक कारणों से आगे की पढ़ाई नहीं कर पाये. उन्हें बचपन से गांव से लगाव था. गांव की माटी से अटूट प्रेम के कारण उन्होंने रोजगार की तलाश में बड़े शहरों की राह नहीं पकड़ी. ऐसे में तत्कालीन मत्स्य प्रसार पदाधिकारी से मुलाकात ने शक्ति के मन में मछली पालन को कारोबार का हिस्सा बनाने की एक ललक पैदा की.अब अपने संघर्ष के बदौलत अन्य युवाओं के लिए वे प्रेरणास्नेत बन गये हैं.
बंजर भूमि को बनाया पोखरा
शक्ति सिन्हा ने वर्ष 2006 में ग्रामीणों के सहयोग से सुंदरपुर-सुंदरी गांव के बीच ऊसर व बंजर पड़ी 25 बीघा भूमि को पोखरा बनाया, जिसमें मछलीपालन की शुरुआत की. इसमें मत्स्य प्रसार अधिकारी कार्यालय का महत्वपूर्ण सहयोग मिला.छोटी पहल को वर्ष 2012 में और बड़ा रूप दिया. उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के फाजिलनगर व कोलकाता के नैहटी से जीरा (मछली का बच्च) मंगाना शुरू किया, जिसे 25 बीघा के पोखरा में पालने के साथ ही अन्य मत्स्य पालकों को ये जीरा (मछली का बच्च) की आपूर्ति भी करते हैं. इससे संपूर्ण खर्च छांट कर छह से सात लाख रुपये की वार्षिक आय हो रही है.
पहला वातानुकूलित मछली केंद्र
बिहार का पहला वातानुकूलित मछली केंद्र जिला मुख्यालय के मालवीय चौक पर शक्ति सिन्हा ने खोला है.पिछले छह माह पूर्व जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह ने इसका उद्घाटन किया. यहां मार्केटिंग व ग्राहकों के हित को देखते हुए सही वजन,स्वच्छ वातावरण की स्वस्थ मछलियां यहां मिलती हैं. उनके द्वारा मीठे जल के चलते यहां रोहू,नैनी,कतला,ग्रास,सिल्वर,कमन,एंगेशियस,पेयासी आदि प्रजाति की मछली का पालन किया जाता है. ये मछलियां बिक्री केंद्र पर उपलब्ध हैं.
यह है आगामी योजना
शक्ति सिन्हा कहते हैं कि आगे की मेरी योजना समेकित कृषि प्रणाली पर आधारित एक मॉडल स्थापित करना है, जिसमें गाय पालन,बकरी पालन,बत्तखपालन, मुरगी पालन का इंतजाम होगा. वे कहते हैं कि मछली की मांग तेजी से बढ़ रही है. मांसाहारी लोगों की भी मछली पहली पसंद है, ऐसे में मांग के अनुसार मछली अभी उपलब्ध नहीं हो पा रही है. ऐसी स्थिति में अभी कारोबार के लिहाज से मछलीपालन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं.
फिशरीज केंद्र पर हैं अत्याधुनिक संसाधन
सुंदरपुर -सुदंरी में फिशरीज है.जहां फिश रिफ्रेशिंग टैंक व ऑक्सीजन पंप भी है, जो जीरा (मछली का बच्च) को ज्यादा दिनों तक जिंदा रखता है. आत्मा द्वारा अनुदानित आधुनिक यंत्र लग जाने से मछलियों के रख-रखाव में सहूलियत होती है. फिशरीज में जेनेरेटर,गोदाम,सोलर पंप सेट,बिजली व स्टाफ रूम सहित अन्य आवश्यक संसाधन मौजूद है.
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