बेसहारों को मिलेगा सिर छुपाने का आश्रय

Published at :23 May 2018 5:09 AM (IST)
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बेसहारों को मिलेगा सिर छुपाने का आश्रय

40 लाख 60 हजार से रैन बसेरा व एक करोड़ 33 लाख रुपये से नगर भवन का हुआ निर्माण सासाराम सदर : शहर के गीता घाट आश्रम स्थित रैनबसेरा व नगर थाना के समीप बने नवनिर्मित नगर भवन का उद्घाटन बुधवार को होगा. नगर विकास एवं आवास मंत्री सुरेश कुमार शर्मा इसका लोकार्पण करेंगे. इसकी […]

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40 लाख 60 हजार से रैन बसेरा व एक करोड़ 33 लाख रुपये से नगर भवन का हुआ निर्माण

सासाराम सदर : शहर के गीता घाट आश्रम स्थित रैनबसेरा व नगर थाना के समीप बने नवनिर्मित नगर भवन का उद्घाटन बुधवार को होगा. नगर विकास एवं आवास मंत्री सुरेश कुमार शर्मा इसका लोकार्पण करेंगे. इसकी तैयारी नगर पर्षद प्रशासन ने पूरी कर ली है. नगर पर्षद की मुख्य पार्षद कंचन कुमारी ने बताया कि शहर में गरीबों के रात्रि विश्राम के लिए अब कठिनाईयों का सामना नहीं करना पड़ेगा. अब जरूरतमंद लोग बने नये रैन बसेरे में विश्राम कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि शहर में रैन बसेरा व नगर भवन के साथ-साथ सामुदायिक शौचालय व जलमीनार का उद्घाटन भी किया जायेगा.
इसकी भी तैयारी पूरी हो चुकी है. मुख्य पार्षद ने बताया कि रैन बेसरा का निर्माण 40 लाख 60 हजार रुपये से कराया गया है. नगर भवन एक करोड़ 33 लाख 52 हजार रुपये की लागत से बना है. शहर के वार्ड 12 व 25 में 10, 23,699 रुपये की लागत से सामूहिक शौचालय का निर्माण कराया गया है. वार्ड नंबर तीन में आठ करोड़ 19 लाख रुपये की योजना से जलमीनार का निर्माण किया गया है.
मल्टीपर्पस हॉल में कार्यक्रम की तैयारी पूरी
रैन बसेरा, नगर भवन, सामूहिक शौचालय, जलमीनार आदि का उद्घाटन होने के बाद शहर के फजलगंज स्थित मल्टीपर्पस हॉल में कार्यक्रम आयोजित होगा. मुख्य पार्षद ने बताया कि उद्घाटन करने के बाद इन विकास कार्यों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए उक्त जगह पर कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे. इसकी तैयारी पूरी हो चुकी है.
रैनबसेरा से होंगे फायदे
शहर में रैन बसेरा व नगर भवन का निर्माण हो जाने से गरीब, असहाय लोगों को काफी मदद मिलेगी. अब राहगीरों, गरीब, बेसहारा लोगों को बस स्टैंड या खुले आसमान के नीचे ठिठुरते हुए रात नहीं बिताना पड़ेगा. नगर में रैन बसेरा नहीं होने के कारण गरीब, बेसहारा लोगों को रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड सहित अन्य स्थानों पर खुले में ठिठुरते हुए रात बितानी पड़ती थी. दूर-दराज से आने वाले गरीब कई बार रात हो जाने से साधन के अभाव में वापस अपने घर नहीं लौट पाते. ऐसे में उनके सामने रुकने की समस्या खड़ी हो जाती है. क्योंकि, उनके पास इतना पैसा नहीं होता कि वह होटल या लॉज का खर्च वहन कर सकें.
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