कर्मचारियों के बकाया भुगतान की जगी उम्मीद
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :27 Sep 2017 9:32 AM (IST)
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31 दिसंबर तक कर्मचारियों को कागजात जमा कराने का मिला मौका 12 हजार मजदूरों ने की थी बकाया मजदूरी के भुगतान की मांग डेहरी कार्यालय : समापन में रहे रोहतास उद्योग समूह के मजदूरों के बकाया भुगतान के लिए हाइकोर्ट के निर्देश पर लिक्विडेटर की देखरेख में चलाये जा रहे कार्यक्रम के तहत करीब 12 […]
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31 दिसंबर तक कर्मचारियों को कागजात जमा कराने का मिला मौका
12 हजार मजदूरों ने की थी बकाया मजदूरी के भुगतान की मांग
डेहरी कार्यालय : समापन में रहे रोहतास उद्योग समूह के मजदूरों के बकाया भुगतान के लिए हाइकोर्ट के निर्देश पर लिक्विडेटर की देखरेख में चलाये जा रहे कार्यक्रम के तहत करीब 12 हजार मजदूरों ने आवेदन किया था. उक्त आवेदन में से करीब 21 सौ आवेदन में आधे अधूरे कागजात रहने के कारण उन मजदूरों के बकाया भुगतान नहीं किया जा सका था.
वैसे मजदूरों के लिए हाइकोर्ट ने एक और मौका देते हुए 31 दिसंबर तक संबंधित सारे कागजात को जमा कराने का मौका दिया है. कोर्ट के इस आदेश से वैसे मजदूरों के बकाये मजदूरी के भुगतान की उम्मीद जगी है. यह भुगतान केवल वैसे लोगों को देय होगा जिनके द्वारा पहले अपने बकाया मजदूरी से संबंधित कागजात कंपनी के कार्यालय में जमा कराये गये हैं, लेकिन आवेदन के साथ सारे कागजात पूर्ण नहीं है.
गौरतलब है कि वर्ष 1984 में रोहतास उद्योग समूह के बंदी को कोर्ट द्वारा अवैध घोषित किये जाने के बाद कंपनी के मजदूरों को वर्ष 1984 से 1995 तक सैलरी कंपनशेसन देने का आदेश पारित हुआ था. इसके अलावा मजदूरों के बकाया पीएफ व 90 दिनों का लीव कंपनसेशन भी देने का आदेश कोर्ट ने दिया था. जानकार बताते हैं कि आवेदन किये मजदूरों में से करीब 10 हजार मजदूरों के बकाया मजदूरी का भुगतान किया जा चुका है.
चार कंपनियों के मजदूरों को मिलेगा इसका लाभ: रोहतास उद्योग समूह के चार कंपनियों रोहतास इंडस्ट्रीज, पीएमटीसी, अशोका लिमिटेड व डीआरएलआर कंपनी में कार्यरत मजदूरों को इसका लाभ मिलना है. उक्त चारों कंपनियां रोहतास उद्योग समूह की इकाई थी. इनमें कार्यरत मजदूरों के बकाये का भुगतान करने का निर्देश हाइकोर्ट द्वारा दिया गया है.
डेथ केस व पारिवारिक विवाद में फंसा है अधिकतर मामला : जानकार बताते हैं कि मजदूरों के बकाये भुगतान के लिए कंपनी को प्राप्त आधे अधूरे करीब 21 सौ आवेदनों में से अधिकतर आवेदनों में कार्यरत मजदूर की मृत्यु हो जाने से उसमें डेथ सर्टिफिकेट व उस मजदूर के एक से अधिक बच्चे होने की स्थिति में किसी एक बच्चे के नाम पर सहमति नहीं बनना बताया जाता है. बकाया भुगतान लेने के लिए बाकी बच्चों द्वारा सहमति पत्र आवेदन में नहीं लगने के कारण आवेदन अधूरा पड़ा है.
मजदूर के परिवार में अगर एक से अधिक बेटे हैं, तो सभी द्वारा आपस में एक्का बनाकर किसी एक भाई के नाम पर बकाये की राशि लेने की जगह अलग-अलग दवा भी कुछ मामलों में पेश किया गया है. वैसी स्थिति में कंपनी के सामने यह विकट समस्या उत्पन्न हो गया है कि बकाये की राशि की भुगतान आखिर किसे की जाये.
उद्योग समूह के प्रभारी ने जारी की सूचना
रोहतास उद्योग समूह के प्रभारी एआर वर्मा ने एक सूचना जारी कर आधे अधूरे भर कर आवेदन जमा किये मजदूरों से तुरंत आवेदन में सारे कागजात लगाने का आग्रह किया है.
सूचना में यह कहा गया है कि लगभग 12 हजार कर्मचारियों में से करीब 21 सौ पूर्व कर्मचारियों या उनके आश्रितों का जिनका बकाया भुगतान जरूरी कागजातों को नहीं जमा करने के कारण अब तक नहीं हुआ है, वैसे कर्मचारियों या उनके आश्रितों के लिए उच्च न्यायालय ने अंतिम बार भुगतान की तिथि 31 दिसंबर, 2017 तक बढ़ाया है. उनको सूचित किया जा रहा है कि वह अपना कागजात जल्द से जल्द इस कार्यालय में जमा कर दें, ताकि उनका भुगतान समय से किया जा सके.
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