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जिले में बढ़ रही है टीबी मरीजों की संख्या से स्वास्थ्य विभाग चिंतित

Updated at : 14 Dec 2025 6:19 PM (IST)
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जिले में बढ़ रही है टीबी  मरीजों की संख्या से स्वास्थ्य विभाग चिंतित

स्वास्थ्य विभाग चिंतित

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पूरे जिले में फिलहाल करीब 6 हजार मरीज नामांकित हैं

पूर्णिया. जिले में टीबी के मरीजों का ग्राफ बढ़ा है. हालांकि इस दिशा में स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार प्रखंड से लेकर पंचायत स्तर तक आशा व समुदाय स्तर पर कार्य कर रहे विभिन्न प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा इसपर लगातार नजर रखी जा रही है और विभिन्न स्वास्थ्य केन्द्रों के माध्यम से संभावित टीबी के मरीजों की स्क्रीनिंग, पहचान व जांच के द्वारा उन्हें समय समय पर दवाइयां और स्वास्थ्य सम्बन्धी सुझाव उपलब्ध कराए जा रहे हैं. वहीं कमजोर तबके के मरीजों को निक्षय मित्र द्वारा सहायता एवं सरकारी योजनाओं से भी आच्छादित किया जा रहा है. दूसरी ओर जन जागरूकता बढ़ने से लोगों में टीबी की आशंका को लेकर जांच कराने वालों की संख्या में भी वृद्धि हुई है जिससे टीबी के मरीजों की पहचान सहज हुई है और इसका इलाज कराने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है.

एक साल में नये मरीजों की संख्या हुई 4 हजार के पार

मिली जानकारी के अनुसार बीते एक साल में टीबी के नए मरीजों की संख्या करीब चार हजार से अधिक पायी गयी है. वहीं मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस (एमडीआर) टीबी के मामले भी लगातार मिल रहे हैं. इनके अलावा जिला यक्ष्मा केंद्र में नियमित दवा की खुराक लेने वालों की भी अच्छी तायदाद है. जबकि मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस टीबी के भी मरीजों को अन्य प्रकार की दवाएं और आवश्यक सहायता प्रदान की जाती है. चिकित्सकों का कहना है कि टीबी रोग की दवा लम्बे समय तक मरीज को दी जाती है लेकिन वैसे टीबी के मरीज जो शुरुआत में लगातार दवा का सेवन तो करते हैं लेकिन कुछ दिनों बाद किसी न किसी कारण से दवा का सेवन छोड़ देते हैं वैसे मरीजों में मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस (एमडीआर) टीबी का खतरा बढ़ जाता है और इसके लिए अलग से दवा की जरुरत होती है. वहीं ठंड के मौसम में टीबी मरीजों को शारीरिक परेशानी बढ़ने की वजह से फिलहाल कई टीबी रोग के मरीज अस्पताल में भर्ती हैं.

जिले में 17 केन्द्रों पर टीबी जांच की है व्यवस्था

पर्यवेक्षक राजेश कुमार ने बताया कि प्रखंड स्तर पर सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) एवं आशा को प्रशिक्षण दिया गया है कि ओपीडी में टीबी संभावित मरीज की स्क्रीनिंग के बाद आगे की जांच के लिए उन्हें नजदीकी डीएमसी में भेजना है. सम्बंधित मरीज में टीबी की पुष्टि होते ही उनका इलाज सुनिश्चित करते हुए उसे विभाग के पोर्टल पर अपलोड किया जाता है. सभी 14 प्रखंडों में टीबी की जांच एवं दवा निःशुल्क उपलब्ध कराई गयी है वर्तमान में 17 केन्द्रों पर टीबी की जांच की व्यवस्था है. उन्होंने बताया कि पूरे जिले में फिलहाल करीब 6 हजार मरीज नामांकित हैं जिनका इलाज चल रहा है.

बोले चिकित्सक

शारीरिक रूप से कमजोर और पोषण की कमी से टीबी रोग होने का खतरा रहता है. 80 प्रतिशत मरीजों में लंग्स टीबी की शिकायत मिलती है जिसका पूर्ण इलाज सम्भव है बशर्ते मरीज निर्धारित समय तक दवा की खुराक ले. अनियमित खुराक से एमडीआर टीबी की सम्भावना बढ़ जाती है जिसके लिए अलग दवा की जरुरत होती है और ठीक होने में समय भी ज्यादा लगता है. ठंड में सर्दी जुकाम को लेकर लंग्स, दमा आदि के पेशेंट्स की परेशानी थोड़ी बढ़ जाती है लेकिन इलाज औरलगातार दवा लेते रहने से मरीज ठीक हो जाते हैं.

डॉ. दिनेश कुमार, यक्ष्मा विभाग

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ARUN KUMAR

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