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सेना की वर्दी का सपना लेकर भवानीपुर की बेटियां लिख रहीं नई इबारत

Updated at : 18 Feb 2026 6:10 PM (IST)
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सेना की वर्दी का सपना लेकर भवानीपुर की बेटियां लिख रहीं नई इबारत

भवानीपुर

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इन्देश्वरी यादव, भवानीपुर. देशभक्ति की भावना और सेना की वर्दी पहनकर मातृभूमि की सेवा करने का अटूट संकल्प लिए भवानीपुर की बेटियां जी-तोड़ मेहनत में जुटी हुई हैं. प्रखंड मुख्यालय स्थित बलदेव उच्च विद्यालय के क्रीड़ा मैदान में सुबह की पहली किरण के साथ ही इन युवतियों के कदमों की रफ्तार गूंजने लगती है. शाम ढलते-ढलते भी उनका उत्साह कम नहीं होता. पसीने से तर-बतर, लेकिन चेहरे पर दृढ़ निश्चय की चमक, यही इन बेटियों की पहचान बन चुकी है. तेज दौड़, ऊंची कूद, लंबी कूद और गोला फेंक जैसी कठिन शारीरिक परीक्षाओं की तैयारी में ये लड़कियां पूरी लगन और अनुशासन के साथ जुटी हैं. मैदान में उनकी सांसों की गति भले तेज हो जाए, लेकिन उनके इरादे कभी नहीं डगमगाते. हर दिन वे अपने लक्ष्य के एक कदम और करीब पहुंचने की कोशिश करती हैं.भवानीपुर नगर पंचायत के विभिन्न वार्डों से आने वाली दर्जन भर से अधिक युवतियां प्रतिदिन नियमित अभ्यास कर रही हैं. इनमें पुष्पा कुमारी, रुचि कुमारी, नेहा कुमारी, काजल कुमारी, कुमकुम कुमारी, मीणा कुमारी, मौसम कुमारी सहित कई अन्य बेटियां शामिल हैं. उन्होंने बताया कि हमारा सपना है कि हम सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करें. वर्दी पहनना हमारे लिए सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि सम्मान और गर्व की बात है. संघर्षों के बीच मजबूत संकल्प इन बेटियों के लिए यह राह आसान नहीं है. कई लड़कियां सीमित संसाधनों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच समय निकालकर अभ्यास करती हैं. सुबह जल्दी उठना, घर के काम निपटाना और फिर मैदान में घंटों पसीना बहाना, यह उनकी दिनचर्या बन चुकी है. उनका यह प्रयास सिर्फ व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं है, बल्कि वे समाज की सोच को भी बदल रही हैं. वे यह साबित कर रही हैं कि बेटियां अब किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है.चाहे वह सेना हो या कोई अन्य चुनौतीपूर्ण क्षेत्र. प्रेरणा का स्रोत बना मैदान उल्लेखनीय है कि इसी मैदान से पहले भी कई बेटियां कड़ी मेहनत और आत्मानुशासन के बल पर सेना और पुलिस बल में चयनित होकर क्षेत्र का नाम रोशन कर चुकी हैं. उन सफल युवतियों की कहानियां आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं. यही वजह है कि वर्तमान में तैयारी कर रही लड़कियों का मनोबल और भी मजबूत हुआ है. वे जानती हैं कि मेहनत का फल जरूर मिलेग. बस जरूरत है निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास की. प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन इन बेटियों के प्रयासों को दिशा देने में प्रशिक्षक पंकज कुमार और रोहित कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका है. वे निःस्वार्थ भाव से उन्हें प्रशिक्षण दे रहे हैं. उनकी कमियों को सुधार रहे हैं और हर दिन उन्हें बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित कर रहे हैं.

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Abhishek Bhaskar is a contributor at Prabhat Khabar.

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