सिलाई करने वाले का बेटा बनेगा डॉक्टर: पूर्णिया के फरहान आदिल ने आर्थिक तंगी को हरा NEET में गाड़े सफलता के झंडे

Updated:
विज्ञापन
फोटो - अपने परिजनों के साथ फरहान आदिल | Prabhat Khabar Network

परिजनों के साथ फरहान आदिल | Prabhat Khabar Network

पूर्णिया के धर्मबाड़ी गांव के फरहान आदिल ने 720 में से 574 अंक लाकर NEET परीक्षा में शानदार सफलता पाई है. साधारण दर्जी के बेटे फरहान ने आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी को हराकर अपना MBBS डॉक्टर बनने का सपना साकार किया है.

विज्ञापन

पूर्णिया जिले के बैसा प्रखंड क्षेत्र से एक बेहद प्रेरणादायी और गौरवान्वित करने वाली सफलता की कहानी सामने आई है. खपड़ा पंचायत के सुदूर धर्मबाड़ी गांव निवासी एक साधारण दर्जी के बेटे फरहान आदिल ने देश की सबसे कठिन चिकित्सा प्रवेश परीक्षा राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-2026) में शानदार सफलता हासिल की है. घर की अत्यंत खराब आर्थिक स्थिति और संसाधनों की घोर कमी के बावजूद फरहान ने मुश्किलों के आगे घुटने नहीं टेके और प्रथम श्रेणी में परीक्षा उत्तीर्ण कर एमबीबीएस (MBBS) डॉक्टर बनने के अपने सपने की ओर कदम बढ़ा दिया है.

720 में से बटोरे 574 अंक, माता-पिता की आंखों में छलके खुशी के आंसू

नीट परीक्षा के जारी परिणामों में फरहान आदिल ने 720 पूर्णांक में से 574 अंकों का शानदार स्कोर खड़ा किया है. फरहान की इस ऐतिहासिक सफलता के बाद उनके माता-पिता और पूरे गांव में जश्न का माहौल है:

  • पिता की लाचारी और संघर्ष: फरहान आदिल के पिता मोहम्मद फिरोज घर से दूर दूसरे राज्य में रहकर सिलाई (टेलरिंग) का काम करते हैं. उनकी बेहद मामूली आमदनी से परिवार का भरण-पोषण बमुश्किल हो पाता है.
  • भावुक हुए परिजन: बेटे की इस अभूतपूर्व कामयाबी पर पिता मो. फिरोज और गृहणी मां की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े. उन्होंने कहा कि यह सफलता फरहान की अटूट लगन, दिन-रात की मेहनत और उसके शिक्षकों के कुशल मार्गदर्शन का प्रतिफल है.

बिना महंगी कोचिंग के सेल्फ स्टडी से हासिल किया मुकाम

आर्थिक तंगी के कारण फरहान के लिए बड़े शहरों में जाकर महंगे कोचिंग संस्थानों की फीस भर पाना बिल्कुल असंभव था. अपनी परिस्थितियों को अपनी ताकत बनाते हुए फरहान ने गांव में ही रहकर स्वाध्याय (सेल्फ स्टडी) का सहारा लिया.

गरीबों की सेवा करना है अंतिम लक्ष्य: फरहान आदिल

"जब भी घर के आर्थिक हालात मुझे परेशान करते थे, मैं अपनी पढ़ाई के घंटे और बढ़ा देता था. मैंने ठान लिया था कि विपरीत परिस्थितियों के आगे कभी हार नहीं मानूंगा. मेरा बचपन से ही सपना रहा है कि मैं एक योग्य एमबीबीएस डॉक्टर बनूं और अपने जैसे ग्रामीण क्षेत्रों के उन गरीब और असहाय मरीजों की मुफ्त सेवा करूं, जो पैसों के अभाव में दम तोड़ देते हैं." : फरहान आदिल

स्कूल के दिनों से ही कुशाग्र बुद्धि रहे हैं फरहान, बधाई देने वालों का लगा तांता

धर्मबाड़ी गांव के ग्रामीणों और शिक्षकों के अनुसार, फरहान स्कूली शिक्षा के समय से ही पढ़ने-लिखने में काफी तेज और बेहद अनुशासित छात्र रहा है. उसकी इस अद्वितीय सफलता पर पूरे पंचायत में हर्ष का माहौल है.

शुक्रवार को फरहान के आवास पर पहुंचकर बधाई देने और परिजनों को मिठाई खिलाने वालों का तांता लगा रहा. फरहान की इस शानदार कामयाबी पर खपड़ा पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि मोहम्मद अहमद, वरिष्ठ समाजसेवी सह शिक्षक फरोग अहमद जामी, मोहम्मद बाबुल सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोगों ने अपनी गहरी खुशी जाहिर की है. प्रबुद्ध समाज ने कहा कि फरहान ने यह साबित कर दिया है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो अभावों के बीच भी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में परचम लहराया जा सकता है.


विज्ञापन
Prabhat Khabar News Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar News Desk

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन