पूर्णिया जंक्शन उतरते ही होते हैं साक्षात शनिदेव के दर्शन: यात्रा की थकान भूल मन्नतें मांगते हैं यात्री

स्टेशन पर शनिदेव का मंदिर | Prabhat Khabar Network
पूर्णिया जंक्शन पर रेल यात्रियों के लिए एक अनोखा आध्यात्मिक जरिया है. स्टेशन परिसर में स्थित शनिदेव और हनुमान जी के मंदिर में दर्शन कर यात्री अपनी यात्रा की थकान मिटाते हैं और आशीर्वाद लेते हैं. यहां रेलकर्मियों की भी अटूट आस्था है.
सीमांचल के प्रमुख रेलवे स्टेशनों में से एक पूर्णिया जंक्शन पर उतरने वाले रेल यात्रियों के लिए सफर की थकान मिटाने का एक अनोखा और आध्यात्मिक जरिया स्टेशन परिसर में ही मौजूद है. जंक्शन के मुख्य प्लेटफॉर्म से बाहर आते ही यात्रियों की नजर सबसे पहले भगवान शनिदेव और संकटमोचन हनुमान जी के भव्य मंदिर पर पड़ती है. ट्रेन से उतरकर गंतव्य की ओर बढ़ने से पहले यात्री यहां मत्था टेकना और भगवान का आशीर्वाद लेना नहीं भूलते. शनिवार के विशेष दिन यहां न केवल यात्रियों की, बल्कि स्थानीय शहरवासियों की भी भारी भीड़ उमड़ती है.
रेल यात्रियों और रेलकर्मियों की आस्था का अटूट संगम
स्टेशन परिसर स्थित यह मंदिर क्षेत्र में एक जागृत देवस्थल के रूप में प्रसिद्ध हो चुका है:
- मानसिक शांति का केंद्र: लंबी और थकान भरी रेल यात्रा के बाद स्टेशन से बाहर निकलते ही मंदिर का शांत परिवेश यात्रियों को अपार मानसिक शांति प्रदान करता है.
- रेलवे स्टाफ का जुड़ाव: यह मंदिर केवल आम यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि पूर्णिया जंक्शन पर कार्यरत रेलकर्मियों (RPF, स्टेशन स्टाफ और गैंगमैन) की अटूट आस्था का भी मुख्य केंद्र है, जो रोज अपनी ड्यूटी शुरू करने से पहले यहां शीश नवाते हैं.
शनिवार को उमड़ती है भारी भीड़, चढ़ता है सरसों का तेल
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिवार का दिन न्याय के देवता शनिदेव को समर्पित होता है. इस दिन मंदिर में विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं:
- तेल का अभिषेक: शनिवार की सुबह से लेकर देर शाम तक श्रद्धालु अपने ग्रहों की शांति, सुख-समृद्धि और पारिवारिक खुशहाली के लिए शनिदेव की प्रतिमा पर सरसों का तेल और काले तिल अर्पित करते हैं.
- खुश्कीबाग से पहुंचते हैं लोग: जंक्शन के पास स्थित व्यावसायिक केंद्र खुश्कीबाग और आस-पास के स्थानीय मोहल्लों से बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु शनिवार की विशेष पूजा में शामिल होने पहुंचते हैं.
हर शनिवार को लगता है 'खिचड़ी' का महाभोग
इस मंदिर की एक बेहद लोकप्रिय परंपरा यहां प्रत्येक शनिवार को आयोजित होने वाला महाप्रसाद वितरण है. हर शनिवार को दोपहर के समय भगवान शनिदेव को पूरी शुद्धता के साथ तैयार किए गए 'खिचड़ी का महाभोग' लगाया जाता है. इसके बाद मंदिर परिसर में एक बड़े भंडारे के रूप में इस महाभोग का वितरण आम लोगों, यात्रियों और जरूरतमंदों के बीच किया जाता है, जिसे ग्रहण करने के लिए सैकड़ों की संख्या में भक्त कतारबद्ध होते हैं.
आरपीएफ इंस्पेक्टर ने 2013-14 में रखी थी मंदिर की नींव
बहुत कम समय में जिले का प्रमुख धार्मिक आस्था केंद्र बने इस मंदिर का इतिहास सदियों पुराना नहीं है.
"वर्ष 2013-14 के आसपास पूर्णिया जंक्शन पर पदस्थापित रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के तत्कालीन इंस्पेक्टर ने इस मंदिर की स्थापना के लिए पहली नींव रखी थी. इसके बाद स्थानीय रेलकर्मियों और जंक्शन से जुड़े प्रबुद्ध नागरिकों के सामूहिक सहयोग से समय के साथ मंदिर का क्रमवार विस्तार होता गया. आज शनि मंदिर के ठीक बगल में भगवान हनुमान जी का भी भव्य मंदिर स्थापित है, जहां भक्त पूरी श्रद्धा के साथ दोनों दरबारों में दर्शन कर अपनी यात्रा को मंगलमय बनाते हैं." — शंकर झा, मुख्य पुरोहित, शनिदेव मंदिर (पूर्णिया जंक्शन)
भक्तों का दृढ़ विश्वास है कि पूर्णिया जंक्शन के इस पवित्र देवस्थल पर सच्चे मन से की गई पूजा से जीवन के सारे कष्ट और नौ ग्रहों के दोष तत्काल दूर हो जाते हैं.
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लेखक के बारे में
By अखिलेश चंद्रा
अखिलेश चंद्रा प्रिंट माध्यम में 30 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अनुसंधान, राजनीति, कला-संस्कृति की खबरों में रुचि रखते हैं.
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