कम वर्षापात को देख एक्शन में जिला प्रशासन, सिंचाई योजनाओं की जांच के लिए बना संयुक्त दल

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फोटो- डीएम अंशुल कुमार | Prabhat Khabar Network

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पूर्णिया जिले में कम वर्षापात और संभावित सूखे की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन एक्शन मोड में आ गया है. 126 में से 57 नलकूप और उद्वह सिंचाई योजनाएं बंद पाई गई हैं, जिनकी अब सघन जांच होगी.

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पूर्णिया. जिले में कम वर्षापात और संभावित सुखाड़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में कार्रवाई तेज कर दी है. लघु सिंचाई विभाग की नलकूप और उद्वह सिंचाई योजनाओं की अब स्थल पर जाकर सघन जांच की जाएगी. जिलाधिकारी अंशुल कुमार ने इसके लिए संयुक्त जांच दल का गठन किया है.

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126 सिंचाई योजनाओं की सामने आई स्थिति

जिले के विभिन्न प्रखंडों में किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लघु सिंचाई विभाग द्वारा 86 नलकूप योजनाएं और 40 उद्वह सिंचाई योजनाएं संचालित की गई हैं. संभावित बाढ़ एवं सुखाड़ की तैयारियों को लेकर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में इन योजनाओं की कार्यशीलता की स्थिति सामने आयी.

23 नलकूप योजनाएं मिलीं बंद

कार्यपालक अभियंता, लघु सिंचाई प्रमंडल, पूर्णिया की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार जिले की 86 नलकूप योजनाओं में 63 कार्यरत हैं, जबकि 23 अकार्यरत पाई गई हैं. इसी तरह 40 उद्वह सिंचाई योजनाओं में महज छह योजनाएं ही चालू हैं, जबकि 34 बंद पड़ी हैं. इस तरह जिले में कुल 57 नलकूप एवं उद्वह सिंचाई योजनाएं अकार्यरत हैं. संभावित सुखाड़ के दौरान किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की जरूरत को देखते हुए इतनी बड़ी संख्या में योजनाओं का बंद रहना प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय है.

सभी योजनाओं का होगा भौतिक सत्यापन

अकार्यरत सिंचाई योजनाओं को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने तत्काल संयुक्त जांच दल का गठन किया है. टीम जिले के विभिन्न प्रखंडों में संचालित नलकूप एवं उद्वह सिंचाई योजनाओं का स्थल पर जाकर भौतिक सत्यापन और निरीक्षण करेगी.जांच के दौरान योजनाओं के बंद होने के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाएगा. तकनीकी खराबी, मरम्मत की आवश्यकता और अन्य समस्याओं की भी पड़ताल की जायेगी.

बंद योजनाओं को जल्द चालू कराने का निर्देश

जिलाधिकारी ने जांच दल को अकार्यरत योजनाओं की विस्तृत समीक्षा कर आवश्यक उपचारात्मक कदम उठाने का निर्देश दिया है. प्रशासन का प्रयास है कि बंद योजनाओं को जल्द से जल्द चालू कराया जाए, ताकि संभावित सुखाड़ की स्थिति में किसानों को पर्याप्त सिंचाई सुविधा मिल सके.

कम बारिश का खेती पर कम हो असर

जिला प्रशासन का उद्देश्य कम वर्षापात के कारण कृषि कार्यों पर पड़ने वाले संभावित प्रतिकूल प्रभाव को कम करना है. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सिंचाई योजनाओं के संचालन में आने वाली बाधाओं को दूर कर किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना प्राथमिकता है.

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