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लोक नृत्य के बहाने सूबे की संस्कृति की अमिट छाप छोड़ गये प्रतिभागी

Updated at : 29 Mar 2025 6:06 PM (IST)
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लोक नृत्य के बहाने सूबे की संस्कृति की अमिट छाप छोड़ गये प्रतिभागी

लोक नृत्य

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किलकारी प्रांगण में दो दिनी राज्य स्तरीय लोकनाच उत्सव का समापन

पूर्णिया. किलकारी प्रांगण में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय लोकनाच उत्सव में बिहार के विभिन्न जिलों से आये कलाकार प्रतिभागी लोक नृत्य के बहाने सूबे की संस्कृति की अमिट छाप छोड़ गये. प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुतियों के जरिये जहां विविधता में एकता का अहसास कराया वहीं यह संदेश भी दिया कि बदलते परिवेश में हमें अपनी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखने की जरुरत है. अहम यह रहा कि पूर्णिया का किलकारी आंगन मेजबानी का मौका पाकर गौरवान्वित हुआ तो यहां के लोगों को बिहार की विराट लोक नृत्य शैली को करीब से देखने का अवसर प्राप्त हुआ. बिहार के नौ प्रमंडलों से आए किलकारी के कलाकारों ने बीते शुक्रवार की देर शाम तक अपनी प्रतिभा का जलवा बिखेरा. इस दौरान पहले स्थानीय स्कूली छात्रों के द्वारा अपनी अपनी प्रस्तुति दी गई. इस श्रृंखला में पीपी हाई स्कूल, के छात्रों द्वारा ‘अपन बिहार’ गीत पर मनभावन नृत्य प्रस्तुत किया गया तो, रामबाग हाई स्कूल के छात्रों द्वारा ‘टिका खर्चे छै जैसे लोकगीत पर लाजवाब प्रस्तुति दी गई. उफरैल मध्य विद्यालय के बच्चों ने धान कटनी को मंच पर प्रस्तुत किया,जबकि किलकारी बिहार बाल भवन के बाल केंद्र, किशनपुर, के छात्रों ने विवाह संस्कार नृत्य से समां बांधा. इसका मार्गदर्शन प्रधानाध्यापक व वरिष्ठ रंगकर्मी एस के रोहिताश्व पप्पू के मार्गदर्शन कर रहे थे.

कलाकारों ने दिखाए नृत्य कला के विविध रंग

इस दौरान दरभंगा ने विदेशिया की प्रस्तुति देकर पलायन पीड़ा दिखायी तो सहरसा के छात्रों ने ‘आंगन में उतरल चांद’ गीत पर नचाया. गया, सारण और मुंगेर और मजफ्फरपुर की प्रस्तुतियां काफी दमदार रही.

भागलपुर के छात्रों का कजरी नाच प्रभाव छोड़ गया. पटना के कलाकार मंच पर खेती-किसानी लेकर आए जबकि अंत में पूर्णिया की मेजबान टीम करमा नृत्य की दमदार प्रस्तुति देकर आदिवासी संस्कृति का अमिट छाप छोड़ गयी. मौके पर प्रतिभागियों को सम्मानित करने के लिए एडीएम, लोक शिकायत जय चंद्र यादव, डिप्टी कलेक्टर, लोक शिकायत, आलोक राज , जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रफुल्ल मिश्र, शिक्षा विभाग के राम भजन तथा राष्ट्रपति पुरस्कृत नृत्य गुरु सुदीपा बोस भी मौजूद रहे.

प्रतीक चिह्न प्रदान कर दिया गया सम्मान

प्रस्तुतियों का सिलसिला थमते ही कलाकारों को प्रतीक चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया. मंच से सभी प्रतिभागी दलों का सम्मान किया गया. अंत में पूर्णिया के सीपीसी त्रिदीप शील ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया. उन्होंने कहा कि, यह कार्यक्रम सभी के सहयोग से संभव हो पाया है. इसके लिए उन्होंने पूरे बिहार के किलकारी से आए संबद्ध अधिकारियों व प्रशिक्षक के साथ पूर्णिया जिला प्रशासन का भी आभार व्यक्त किया. श्री शील ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में किलकारी बाल भवन, पूर्णिया के अधिकारी व कर्मी तथा छात्रों के प्रति भी आभार जताया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AKHILESH CHANDRA

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