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जागरूकता ही हृदय रोग से बचाव का एक मात्र तरीका : डॉ आरके मोदी

Updated at : 29 Sep 2025 7:57 PM (IST)
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जागरूकता ही हृदय रोग से बचाव का एक मात्र तरीका : डॉ आरके मोदी

वर्ल्ड हार्ट डे के अवसर पर एसोसिएशन ऑफ फिशिजियन ऑफ इंडिया (एपीआई) की ओर से निशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया.

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पूर्णिया के डाक्टरों ने वर्ल्ड हार्ट डे पर किया नि:शुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन

पूर्णिया. वर्ल्ड हार्ट डे के अवसर पर एसोसिएशन ऑफ फिशिजियन ऑफ इंडिया (एपीआई) की ओर से निशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया. इसमें रोगियों को हृदय रोग के प्रति जागरूक किया गया. पूर्णिया हॉस्पिटल में इस कार्यक्रम का आयोजन अध्यक्ष डॉ अजय कुमार व सचिव डॉ पीके सिंह के नेतृत्व में किया गया. एपीआई बिहार चेप्टर के अध्यक्ष सह सीमांचल के जाने-माने डायबिडोलोजिस्ट डॉ आर के मोदी ने शिविर के माध्यम से हृदय को स्वस्थ रखने के लिए दिनचर्या में बदलाव पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान में हृदय रोग से मरनेवालों की संख्या बढ़ती जा रही. इस पर जागरूकता से ही काबू पाया जा सकता है.

डॉ आरके मोदी ने बताया कि गैर संचारी बीमारियों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से एसोसिएशन ऑफ फिशिजियन ऑफ इंडिया के तत्वावधान में विभिन्न विद्यालयों में बच्चों के लिए एपीआई चली स्कूल की ओर किया गया. उन्होंने कहा कि एपीआई का मानना है कि हृदय रोग व डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी की शुरुआत बचपन से ही हो जाती है. इसलिए बच्चों को जागरूक होना जरूरी है.

एपीआई पूर्णिया चैप्टर के अध्यक्ष डॉ अजय कुमार ने बताया कि हृदय की बीमारी के कुछ ऐसे लक्षण होते हैं, जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. इनमें थकान और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण भी शामिल हैं. वक्त रहते इन संकेतों की पहचान और उनका इलाज करके आप अपने दिल को सुरक्षित रख सकते हैं.

डॉ बिनोद धारेवा ने बताया कि हृदय की बीमारियों को लेकर अलग-अलग लोगों के बीच अलग-अलग धारणाएं हैं. पहले हार्ट डिजीज को बुढ़ापे की बीमारी माना जाता था, लेकिन आज के समय में युवा और बच्चे भी इसका शिकार हो रहे हैं. एपीआई पूर्णिया चैप्टर के सचिव डॉ प्रवीण कुमार सिंह ने बताया कि हृदय की बीमारियों के कई रूप धीरे-धीरे और चुपचाप विकसित होते हैं. और ये कई संकेतों के जरिए खुद की मौजूदगी भी प्रदर्शित करते हैं. यह धीरे-धीरे बढ़ने वाली बीमारी खतरनाक हो सकती है. डॉ इम्तियाज भारती ने सक्रिय जीवन शैली के विषय में जागरूक किया. डॉ राकेश ने तनाव मुक्त जीवन की वकालत की. तनाव ग्रस्त व्यक्तियों को हृदय संबंधी रोग होता है.

ह्दय रोग के लक्षण

सीने में दर्द, जलन, जल्दी सांस फूलना, बायीं बांह में दर्द या फिर दोनों बांह में दर्द, उच्च रक्त चाप, आंखों के सामने अंधेरा प्रमुख लक्षण हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ARUN KUMAR

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ARUN KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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