महाराणा प्रताप के मातृभूमि के प्रति प्रेम हम सभी के लिए प्रेरणादायक

Edited by ARUN KUMAR
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जयंती मनी

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पूर्णिया. राष्ट्र नायक वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 485 वीं जयंती समारोह बाबू वीर कुंवर सिंह स्मारक संघ एवं राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के तत्वावधान में मनायी गयी. समारोह के स्वागताध्यक्ष माधव सिंह ने सर्वप्रथम मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पण करने वाले महान योद्धा पराक्रम के प्रतीक महाराणा प्रताप की जयंती पर नमन अर्पित किया. उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप के अदम्य साहस और मातृभूमि के प्रति प्रेम हम सबों को सदैव प्रेरणा देता रहेगा. उन्होंने घास की रोटी खाई, लेकिन स्वाभिमान के साथ कोई समझौता नहीं किया. राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के प्रदेश सचिव अवधेश कुमार सिंह ने कहा कि मातृभूमि के प्रति सच्ची निष्ठा, स्वाभिमान और प्रेम का महाराणा प्रताप से बढ़कर कोई अन्य उदाहरण विश्व में नहीं हो सकता. इन्होंने यातनाएं सही लेकिन गुलामी स्वीकार नहीं की. वरिष्ठ साहित्यकार डॉ के के चौधरी ने कहा कि उन्होंने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को साथ लेकर चलते थे.वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता एस. के. विमल ने कहा कि महाराणा प्रताप की जयंती राष्ट्रीय स्तर पर मनायी जानी चाहिए. सामाजिक कार्यकर्ता अरविन्द कुमार सिंह बताया कि महाराणा प्रताप ने जब महलों का त्याग किया तब उनके साथ लुहार जाति के हजारों लोगों ने भी घर छोड़ा और दिन रात राणा की फौज के लिए तलवारें बनायी. इस जयंती के अवसर पर बाबू वीर कुंवर सिंह स्मारक संघ के सदस्य दिनकर स्नेही, जिला परिषद सदस्य संतोष सिंह, लोजपा नेता चंदन सिंह, जिला परिषद सदस्य राजीव सिंह, डॉ मनोज, करणी सेना के अध्यक्ष अमित सिंह, पूर्व अध्यक्ष आशीष राजपूत, महासचिव रंजन कुणाल, युवा अध्यक्ष पीयूष सिंह, कुन्दन सिंह, सोनू सिंह, आदि दर्जनों लोग शामिल हुए.

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