पूर्णिया में भारी बारिश का अलर्ट, आसमान में उमड़-घूमड़ रहे बादल पर झूम कर बरसने का इंतजार

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आसमान में घिरे बादल

आसमान में घिरे बादल

मौसम विभाग ने पूर्णिया और आसपास के इलाकों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश की चेतावनी जारी की है. वर्तमान में अनिश्चित मौसम के चलते धान की रोपाई में जुटे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं.

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मौसम विज्ञान केंद्र ने पूर्णिया और आसपास के इलाकों में आज तेज हवाओं के साथ भारी बारिश की संभावना जताते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है. मौसम पूर्वानुमान इंडेक्स में भी बारिश के प्रबल संकेत हैं, लेकिन फिलहाल उमड़-घूमड़ रहे बादलों के बीच धूप और उमस का दोहरा रंग देखने को मिल रहा है. इस अनिश्चित मौसम के कारण धान की रोपनी में जुटे किसान खासे चिंतित हैं.

मौसम विभाग का अलर्ट: एक-दो स्थानों पर मूसलाधार बारिश के आसार

मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, गुरुवार को पूर्णिया जिले के एक या दो स्थानों पर वज्रपात के साथ भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है. इसके साथ ही क्षेत्र में तेज रफ्तार हवाएं चलने की बात भी कही गई है. सुबह पांच से छह बजे के बीच जिले का मौसम काफी कूल-कूल और सुहाना रहा, जिससे लोगों को गर्मी से मामूली राहत मिली. हालांकि, दिन चढ़ने के साथ ही काले बादलों के बीच से निकल रही तेज धूप और उमस ने एक बार फिर पसीने छुड़ाने शुरू कर दिए हैं.

बीते बुधवार को भी उम्मीदें रहीं नाकाम, केवल छिटपुट बौछारें

यह कोई पहला मौका नहीं है जब भारी बारिश की भविष्यवाणी की गई हो. बीते बुधवार को भी मौसम विभाग ने जिले में मूसलाधार बारिश के आसार जताए थे, लेकिन दिनभर आसमान में बादल छाए रहने के बावजूद केवल छिटपुट या आंशिक बूंदाबांदी ही दर्ज की गई. बादलों की इस लुकाछिपी के कारण हवा में नमी का स्तर बढ़ गया है, जिससे उमस भरी गर्मी लोगों को परेशान कर रही है.

मौसम के दोहरे रंग से किसान परेशान, खेतों में पानी के लिए पंपसेट का सहारा

इस बेरुखे मौसम का सबसे ज्यादा नुकसान कृषि क्षेत्र और स्थानीय किसानों को उठाना पड़ रहा है:

  • धान की रोपनी प्रभावित: खरीफ सीजन के तहत वर्तमान में खेतों को धान की रोपनी के लिए पर्याप्त और निरंतर पानी की सख्त आवश्यकता है.
  • बढ़ी खेती की लागत: उम्मीद के मुताबिक मानसूनी बारिश नहीं होने के कारण किसानों को मजबूरन निजी पंपसेट और डीजल इंजनों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है.

मौसम का यह दोहरा चरित्र फसलों के लिए ठीक नहीं है. आसमान में घने बादल तो छा रहे हैं, लेकिन वे बरस नहीं रहे. अगर अगले एक-दो दिनों में जिले में अच्छी और झमाझम बारिश नहीं हुई, तो धान की समय पर रोपनी करना मुश्किल हो जाएगा और किसानों पर आर्थिक बोझ और बढ़ जाएगा.


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अखिलेश चंद्रा

लेखक के बारे में

By अखिलेश चंद्रा

अखिलेश चंद्रा प्रिंट माध्यम में 30 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अनुसंधान, राजनीति, कला-संस्कृति की खबरों में रुचि रखते हैं.

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