विचार व कर्म दोनों अच्छे और आचरण में हो पवित्रता, माली पंचायत में आध्यात्मिक समागम से गूंजे कबीर के विचार

Published by : Divyanshu Prashant Updated At : 24 May 2026 11:14 AM

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आध्यात्मिक समागम

Dhamdaha Kabir Saheb Jayanti Samoroh: संत कबीर के अनमोल विचार आज के दौर में और भी प्रासंगिक हो गए हैं. पूर्णिया के धमदाहा में आयोजित एक भव्य समागम में जब वैशाली से आए विद्वान ने कबीर साहेब की साखियों का मर्म समझाया, तो वहां मौजूद हजारों श्रद्धालु भावविभोर हो उठे.

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Dhamdaha Kabir Saheb Jayanti Samoroh: पूर्णिया के धमदाहा से आशीष सिंह की रिपोर्ट: पूर्णिया जिले के धमदाहा प्रखंड क्षेत्र की माली पंचायत में आयोजित दो दिवसीय संत सम्राट सद्गुरु कबीर साहेब जयंती समारोह का समापन हो गया. इस भव्य आध्यात्मिक समागम से पूरे क्षेत्र का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय और कबीर के भजनों से सराबोर नजर आया.

जीवन में सत्य का अवलंबन करना नितांत आवश्यक

इस दो दिवसीय समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में वैशाली से पधारे रामशंकर साहेब ने अपनी अमृतवाणी से श्रद्धालुओं को निहाल किया. धर्मसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मानव जीवन को सार्थक बनाने के लिए जीवन में सत्य का अवलंबन करना नितांत आवश्यक है. यदि मनुष्य सत्य के मार्ग पर चलना सीख जाए, तो उसकी आधी सांसारिक उलझने अपने आप ही समाप्त हो जाती हैं.

विचार और कर्म दोनों अच्छे हों, आचरण की पवित्रता पर दिया जोर

रामशंकर साहेब ने कबीर दर्शन पर प्रकाश डालते हुए इस बात को रेखांकित किया कि मनुष्य के केवल विचार ही नहीं, बल्कि उसके कर्म भी उतने ही श्रेष्ठ होने चाहिए. उन्होंने आचरण में पवित्रता के महत्व को समझाते हुए कहा कि बाहरी आडंबरों से दूर रहकर अपने अंतःकरण को शुद्ध करना ही सच्ची भक्ति है. जब तक हमारे व्यवहार और वाणी में पवित्रता नहीं होगी, तब तक ज्ञान की प्राप्ति असंभव है.

उपदेशों को केवल सुनें नहीं, अपनी दिनचर्या में करें शामिल

प्रवचन के अंत में उन्होंने वहां उपस्थित सभी श्रद्धालुओं से एक भावुक आह्वान किया. उन्होंने कहा कि इस दो दिवसीय समागम से जो भी दिव्य उपदेश और ज्ञान वे लेकर जा रहे हैं, उसे केवल कानों से सुनकर भूल न जाएं, बल्कि उसे अपने व्यावहारिक जीवन और दैनिक दिनचर्या में समाहित करने का ईमानदारी से प्रयास करें.

इस आध्यात्मिक आयोजन में माली पंचायत सहित आस-पास के दर्जनों गांवों से भारी संख्या में महिला व पुरुष श्रद्धालु पहुंचे, जिससे पूरे प्रमंडल में कबीर साहेब के ‘साखी-सबद’ की गूंज बनी रही.

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लेखक के बारे में

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दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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