लॉकडाउन ने बढ़ाई मखाना किसानों की मुसीबत, जमा पूंजी खेत में, बाजार की नहीं कोई आस

Updated at : 21 Apr 2020 3:50 AM (IST)
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लॉकडाउन ने बढ़ाई मखाना किसानों की मुसीबत, जमा पूंजी खेत में, बाजार की नहीं कोई आस

पूर्णिया : कोरोना लॉक डाउन ने मखाना किसानों की मुसीबत बढ़ा दी है. कृषि कालेज के वैज्ञानिकों की पहल पर इस साल मखाना की बंपर खेती हुई हुई है पर इस बार मखाना उत्पादकों के लिए न तो बाजार है और न ही खरीदार. लॉक डाउन और आर्थिक मंदी में मखाना किसानों की पूरी जमा […]

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पूर्णिया : कोरोना लॉक डाउन ने मखाना किसानों की मुसीबत बढ़ा दी है. कृषि कालेज के वैज्ञानिकों की पहल पर इस साल मखाना की बंपर खेती हुई हुई है पर इस बार मखाना उत्पादकों के लिए न तो बाजार है और न ही खरीदार. लॉक डाउन और आर्थिक मंदी में मखाना किसानों की पूरी जमा पूंजी खेत में चली गयी. अब वी करें भी तो कया करें क्योंकि इस मंदी से शीघ्र उबरने की उम्मीद दूर-दूर तक नजर नहीं आती. किसान इस लिए भी नाउम्मीद हो चले हैं कि मखाना फसल बीमा योजना में शामिल नहीं है और इससे होने वाले नुकसान की कोई भरपाई संभव नहीं. दरअसल, पिछले साल मखाना के दर में अचानक आये उछाल ने मखाना उत्पादकों का उत्साह बढ़ा दिया.

इस बीच सरकार की योजनाओं के तहत भोला पासवान शास्त्री कृषि कालेज के वैज्ञानिकों ने इसे बढ़ावा दिया. नतीजतन जलजमाव वाले क्षेत्रों में मखाना का आच्छादन इस साल पहली बार 21 हजार हैक्टेयर पार कर गया. यह अलग बात है कि बाजारों में अच्छी कीमत की प्रत्याशा में मखाना किसानों ने अपनी पूरी जमा पूंजी लगा दी. मगर, कोरोना को लेकर बना आर्थिक संकट और बाजार की मौजूदा स्थिति ने किसानों को सकते में डाल दिया है. मखाना किसानों का कहना है कि अगर इसे फसल बीमा योजना का लाभ मिलता तो बहुत चिंता की बात नहीं पर वे इससे भी वंचित होंगे. इस बीच कृषि कालेज के मखाना वैज्ञानिक डा. अनिल कुमार ने बताया कि वैज्ञानिकों द्वारा केंद्र एवं राज्य सरकार से मखाना को फसल बीमा योजना में शामिल किये जाने का अनुरोध किया गया है.

वरदान साबित हुआ बायोटेक किसान हब भोला पासवान शास्त्री कृषि कालेज के अथक प्रयास से इस वर्ष बिहार के 9.12 लाख जलजमाव क्षेत्रों में मखाना के उत्पादन, उत्पादकता एवं लाभप्रदता की वृद्धि के लिए केन्द्रीय बायोटेक्नालाजी विभाग द्वारा वित्तीय संपोशित परियोजना बायोटेक किसान हब मखाना किसानों के लिए वरदान साबित हुआ है. उल्लेख्य है कि बिहार सरकार के उद्यान निदेशालय के राज्य बागवानी मिशन अंतर्गत मखाना विकास योजना को बीते दिसंबर में बिहार के कृषि मंत्री द्वारा लांच किया गया था और मुख्य मंत्री नीतीश कुमार ने मखाना को जल जीवन हरियाली विकास योजना में शामिल कर जिले के मखाना उत्पादकों को सबौर मखाना-1 का बीज वितरण कर इन क्षेत्रों में मखाना के उन्नतशील प्रजाति के प्रचार-प्रसार की योजना को बड़े ही उत्साह आगे बढ़ाने की पहल की थी.

इस आलोक में कृषि कालेज के तकनीकी मार्गदशन में बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के कुलपति प्रो0 डा. अजय कुमार सिंह के निर्देशन पर मखाना की खेती को बढ़ावा दिया गया.कृषि वैज्ञानिक बढ़ा रहे किसानों का उत्साह इस बीच किसानों के खेत में पौध गलन, पोषक तत्वों का छिड़काव, कीटनाशकों का छिड़काव एवं अन्य कई समस्याएं सामने आयी. इसके निदान के लिए प्रसार शिक्षा निदेशक डा. आर. के. सोहाने ने सूचना तकनीक के जरिये किसानों की समस्या का निदान करना शुरू कर दिया है. लाकडाउन के दौरान प्रशासनिक सहयोग भी लिया जा रहा है. मखाना की लहलहाती फसल देख किसान खुश हैं पर मौजूदा हालात से नाउम्मीद भी हो रहे हैं. कृषि कालेज के प्राचार्य डा. पारस नाथ, मखाना वैज्ञानिक डा. अनिल कुमार, वैज्ञानिक डाभ. पंकज कुमार आदि समस्ययाओं के निदान के साथ किसानों का उत्साहवर्द्धन भी कर रहे हैं. फोटो- 19 पूर्णिया 5कैप्सन- मखाना की लहलहाती फसल और चिन्तित किसान

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