Bihar News: एससीइआरटी ने छापी पूर्णिया के गांव में विज्ञान की अलख जगाने वाली शिक्षिका की कहानी
Published by : Radheshyam Kushwaha Updated At : 03 Mar 2025 6:15 AM
श्रीनगर की विज्ञान शिक्षिका एकता अवस्थी(फाइल फोटो)
Bihar News: आदर्श मध्य विद्यालय हसैली खुट्टी, श्रीनगर की विज्ञान शिक्षिका एकता अवस्थी की इस उपलब्धि से पूरा सीमांचल गौरवान्वित हुआ है.
Bihar News: पूर्णिया जिले के सबसे छोटे प्रखंड श्रीनगर के एक गांव के बच्चों में विज्ञान की अलख जगाने वाली शिक्षिका की कहानी राज्य शिक्षा शोध प्रशिक्षण परिषद, पटना ने प्रकाशित की है. प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग पर प्रकाशित इस पुस्तक का विमोचन शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने पीबीएल मेला, पटना में किया है. आदर्श मध्य विद्यालय हसैली खुट्टी, श्रीनगर की विज्ञान शिक्षिका एकता अवस्थी की इस उपलब्धि से पूरा सीमांचल गौरवान्वित हुआ है. लखनऊ जैसे बड़े शहर से आकर छोटे से गांव में बच्चों को विज्ञान के प्रति प्रेरित कर शिक्षिका एकता अवस्थी ने अनूठी मिसाल कायम की है. हालांकि इस मुकाम को हासिल करना कहीं से भी आसान नहीं रहा. जब उन्होंने सितंबर 2023 में प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग का प्रशिक्षण लिया तो उनके लिए यह कड़ी चुनौती थी कि बच्चों में विज्ञान के प्रति ललक पैदा करें. इसमें सबसे बड़ी बाधा संसाधनों की कमी थी.
संकल्प को पूरा करने की जुनून
मगर उनकी सकारात्मक सोच को उस वक्त पंख लग गया जब बच्चे भी उनके संकल्प को पूरा करने में अपनी ओर से जुट गये. इसकी शुरुआत तड़ित रोधी भवन निर्माण के प्रोजेक्ट से शुरू हुई. बच्चों ने आलू और गूलर के इस्तेमाल से इस मॉडल को बनाने में कामयाबी हासिल की. इसके बाद तो शिक्षिका एकता अवस्थी को महसूस हुआ कि अगर वे चाह लीं तो बच्चे और आगे जाएंगे. इसके बाद तो बच्चों ने मिलकर और भी नायाब प्रोजेक्ट बनाये. इसके साथ ही बच्चों में यह बदलाव आया कि वे कक्षा में अपनी जिज्ञासा को जाहिर करने लगे. झिझक टूटती गयी और अब बच्चे विज्ञान और गणित में अपना पूरा मन लगा रह हैं.
ग्रामीण पृष्ठभूमि उनके लिए नयी नहीं
शिक्षिका एकता अवस्थी बताती हैं कि ग्रामीण पृष्ठभूमि उनके लिए नयी नहीं है. उनकी दादी भी गांव के स्कूल की अध्यापिका थी. इसलिए बच्चों के लिए कुछ करने की तमन्ना उनमें पहले से थी. प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग की ट्रेनिंग ने उनकी इस इच्छाशक्ति को दृढ़ किया और कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया. नई शिक्षा नीति के तहत बच्चों को सिर्फ श्यामपट्ट पर अथवा व्याख्यान देकर नहीं पढ़ना है, बल्कि उन्हें खुद करके सीखने पर जोर दिया जा रहा है जिससे उनकी वैज्ञानिक अवधारणाएं सुस्पष्ट हो सके . यह एक नई पहल है ,जो हमारे सरकारी विद्यालय के बच्चों को विश्व पटल पर लाने के लिए महत्वपूर्ण कदम है.
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By Radheshyam Kushwaha
राधेश्याम कुशवाहा ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से MJ (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म) की शिक्षा प्राप्त करने के बाद अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत भोपाल से प्रकाशित राज एक्सप्रेस समाचार पत्र से की. इसके बाद उन्होंने समय जगत, राजस्थान पत्रिका और हिंदुस्तान जैसे प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं. वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म, अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 13 वर्षों का अनुभव रखने वाले राधेश्याम कुशवाहा को ज्योतिष शास्त्र, पंचांग गणना, ग्रह गोचर, नक्षत्र परिवर्तन, व्रत-त्योहारों की तिथियों तथा शुभ मुहूर्तों का गहन ज्ञान है. अपनी विशेषज्ञता के आधार पर वे धर्म-अध्यात्म और राशिफल से जुड़ी सटीक, तथ्यपरक एवं विश्वसनीय खबरें लिखते हैं. धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन में उनकी विशेष रुचि है. इसके अलावा राजनीति, अपराध और प्रेरणादायक (पॉजिटिव) विषयों पर लेखन में भी उनकी गहरी रुचि है.
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