पूर्णिया में सात घोड़ों के रथ पर विराजते सूर्यदेव, आदित्यधाम में रविवार को उमड़ती है आस्था
Published by : Pratyush Prashant Updated At : 17 May 2026 8:47 AM
पूर्णिया में सात घोड़ों के रथ पर विराजते सूर्यदेव
Aaj ka Dursan: पूर्णिया का एक ऐसा सूर्य मंदिर, जहां तालाब के सामने सात घोड़ों वाले रथ पर सवार भगवान सूर्य का दिव्य दर्शन भक्तों को आध्यात्मिक अनुभूति से भर देता है.
Aaj ka Dursan: पूर्णिया से अखिलेश चंद्रा की रिपोर्ट. बिहार के पूर्णिया में स्थित आदित्यधाम रविवार के दिन श्रद्धा और आस्था का बड़ा केंद्र बन जाता है. यहां भगवान सूर्य की सात घोड़ों वाले रथ पर सवार मनमोहक प्रतिमा का दर्शन करने दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं. मंदिर की भव्यता, सामने मौजूद सुंदर तालाब और धार्मिक वातावरण लोगों को खास आकर्षित करता है. यही वजह है कि रविवार के दिन यहां पूजा-अर्चना और सूर्य उपासना के लिए भक्तों की भीड़ देखने को मिलती है.
सात घोड़ों वाले रथ पर सूर्यदेव का अद्भुत स्वरूप
आदित्यधाम की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित भगवान सूर्य की भव्य प्रतिमा है. प्रतिमा में सूर्यदेव सात घोड़ों के रथ पर सवार दिखाई देते हैं, जो वैदिक परंपरा और सूर्य आराधना की प्राचीन मान्यताओं का प्रतीक माना जाता है. मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही भक्तों को आध्यात्मिक शांति का एहसास होता है. खासकर रविवार को यहां पूजा-अनुष्ठान और मंत्रोच्चार का माहौल भक्तिमय बना देता है.
तालाब के किनारे छठ पूजा का अलौकिक दृश्य
मंदिर के ठीक सामने बना खूबसूरत तालाब इस स्थान की भव्यता को और बढ़ा देता है. छठ महापर्व के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु तालाब में खड़े होकर भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं. मंत्रोच्चार और दीपों की रोशनी के बीच यहां का दृश्य बेहद आकर्षक दिखाई देता है. स्थानीय लोगों के अनुसार कार्तिक महीने के छठ पर्व और वसंत पंचमी के बाद आने वाली अचला सप्तमी पर यहां विशेष पूजा का आयोजन होता है.
2016 में बना मंदिर, अब बन चुका है आस्था का केंद्र
मरंगा स्थित बियाडा परिसर के भीतर वीवीआईटी कैंपस में स्थित इस मंदिर का निर्माण वर्ष 2016 में कराया गया था. स्थापना के बाद से यहां नियमित रूप से धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. सामान्य दिनों में भी लोग परिवार के साथ यहां दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं.
कैसे पहुंचे आदित्यधाम
आदित्यधाम पहुंचने के लिए पूर्णिया के मरंगा स्थित बियाडा परिसर तक जाना होता है. वीवीआईटी कैंपस के भीतर यह मंदिर आसानी से दिखाई देता है. शांत वातावरण और सुंदर परिसर इसे धार्मिक पर्यटन के लिहाज से भी खास बनाता है.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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