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गर्मी के मौसम में इस साल क्या फिर प्यासे ही रह जायेंगे लोग

Updated at : 29 Mar 2019 2:58 AM (IST)
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गर्मी के मौसम में इस साल क्या फिर प्यासे ही रह जायेंगे लोग

पूर्णिया : गर्मी का मौसम करीब आ गया है और यह बात तय है कि इस साल फिर पूर्णिया के लोग प्यासे रह जाएंगे. पानी के लिए पानी की तरह पैसा बहा दिए जाने के बावजूद लोगों को शुद्ध पेयजल नसीब नहीं हो पाएगा. आलम यह है कि उपलब्धता के बावजूद लोगों तक शुद्ध पेयजल […]

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पूर्णिया : गर्मी का मौसम करीब आ गया है और यह बात तय है कि इस साल फिर पूर्णिया के लोग प्यासे रह जाएंगे. पानी के लिए पानी की तरह पैसा बहा दिए जाने के बावजूद लोगों को शुद्ध पेयजल नसीब नहीं हो पाएगा. आलम यह है कि उपलब्धता के बावजूद लोगों तक शुद्ध पेयजल नहीं पहुंच रहा है.

गौरतलब है कि पूर्णिया में पेयजल की योजना बदइंतजामी की भेंट चढ गई है. यहां के लोग आज भी आयरनयुक्त पानी पीने को विवश हैं.
जानकारों का कहना है कि शुद्ध पेयजल के लिए सालों पहले योजना बनाई गई थी. कहते हैं इस योजना का काम 2011 में पूरा भी कर लिया गया पर इसके बावजूद लोगों को प्यासा रहना पड़ रहा है. विभागीय जानकारों की मानें तो नगर विकास विभाग ने इस योजना पर पीएचइडी द्वारा काम कराया था.
अब दोनों विभाग इस योजना पर बात करने से कतराते हैं. सूत्रों की मानें तो इस योजना के तहत जगह जगह पाइप बिछाए गए और नये जलमीनार का निर्माण कराया गया जहां लौह निष्कासन संयंत्र भी लगाए गए. सूत्रों का कहना है कि मामला हैंडओवर और टेक ओवर में उलझ कर रह गया.
दरअसल , पूर्णिया के भूगर्भीय जल में लौह की मात्रा काफी अधिक हैं. भारतीय मानक के अनुसार शुद्ध पेयजल में यह मात्रा 1 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम होना चाहिए जबकि पूर्णिया में यह मात्रा 3.0 मिलीग्राम से 5.5 मिलीग्राम प्रति लीटर हैं . पेयजल में अत्यधिक लोह अयस्कों के कारण ही पूर्णिया की अधिकांश आबादी पेट एवं अन्य कई रोगों इसे ग्रसित है. !
इसी से मुक्ति दिलाने के लिए पूर्णिया में शुद्ध पेयजलापूर्ति योजना शुरू की गई थी . विभागीय जानकारों के अनुसार पीएचईडी ने इस योजना का काम 2011 में ही पूरा कर लिया पर विडंबना यह है कि जिला मुख्यालय में शुद्ध पेयजल के भंडारण नके वावजूद शहरवासियो को पीने का शुद्ध पानी नसीब नहीं हो रहा है .
कितनी जरूरत कितनी आपूर्ति
आबादी के लिहाज से पूर्णिया शहर 30 लाख गैलन शुद्ध पेयजल की दैनिक जरूरत है. भारतीय मानक के अनुसार शहरी रहन सहन के लिए 135 लीटर प्रति व्यक्ति पानी मिलना चाहिए. इस हिसाब से न्यूनतम 16.97 मिलियन पानी की जरूरत है जबकि अभी 2.95 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति हो रही है. जलापूर्ति की यह योजना पुरानी है.
16 करोड़ की थी योजना
शहर में शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए पीएचईडी की ओर से 15 करोड़ 6 लाख की योजना पर काम हुआ. इसके तहत शहर में 5 अतिरिक्त टंकिया बनाई गई. इन टंकियों की झमता 1.50 हजार प्रति गैलन है.
इस तरह शुद्ध पेयजल आपूर्ति की क्षमता 1.5 से बढ़ाकर 9 लाख गेलन प्रति दिन की गयी. शुद्ध पेयजल मुहैया कराने को लेकर इन पानी टंकियों को आयरन रिमूवल प्लांट एवं यूनिट से भी जोड़ा गया.
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