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मिथिला की समृद्ध संस्कृति को बचाना है, तो विद्यापति को हर हाल में लाना होगा

Updated at : 11 Mar 2019 7:37 AM (IST)
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मिथिला की समृद्ध संस्कृति को बचाना है, तो विद्यापति को हर हाल में लाना होगा

पूर्णिया : मिथिला की भाषा, साहित्य और इसकी संस्कृति से जुड़ा बड़ा तबका कवि विद्यापति स्मारक निर्माण की वकालत कर रहा है. ऐसे तमाम लोग मानते हैं कि मिथिला की संस्कृति को बचाए रखने के लिए कवि विद्यापति की प्रतिमा स्थापित करनी होगी क्योंकि उनकी स्मृति व स्मारक के जरिये इस संस्कृति को मजबूती के […]

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पूर्णिया : मिथिला की भाषा, साहित्य और इसकी संस्कृति से जुड़ा बड़ा तबका कवि विद्यापति स्मारक निर्माण की वकालत कर रहा है. ऐसे तमाम लोग मानते हैं कि मिथिला की संस्कृति को बचाए रखने के लिए कवि विद्यापति की प्रतिमा स्थापित करनी होगी क्योंकि उनकी स्मृति व स्मारक के जरिये इस संस्कृति को मजबूती के साथ विकसित एवं संरक्षित किया जा सकता है.
इस अभियान में जुटे विद्यापति स्मृति सेवा संस्थान की ओर से जिला प्रशासन को एक ज्ञापन भी हाल के दिनों में सौंपा गया है जिसमें स्मारक स्थापना के लिए नैतिक सहयोग व भूमि मुहैया कराने की मांग की गयी है.
गौरतलब है कि सन 2014 से पूर्णिया में विद्यापति स्मारक के लिए शहर के बुद्धिजीवी बुजुर्गों द्वारा लगातार पहल की जा रही है जिससे युवाओं के बीच एक माहौल जरूर बना है पर बहुत कामयाबी हासिल नही हो सकी है.
इस उद्देश्य से गठित विद्यापति स्मृति सेवा संस्थान की ओर से एक बार फिर इसके लिए पूर्णियावासियों से अपील की गयी है और कहा गया है कि वह पूरे जिले के लिए गौरव का दिन होगा जब इस धरती पर कवि विद्यापति की प्रतिमा लगेगी. इस बाबत जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा गया है जिसमें सन 1352 से 1478 के ऐतिहासिक कालखंड का उल्लेख करते हुए पूर्णिया के मिथिलांचलीय सच का जिक्र किया गया है.
कहा गया है कि विद्यापति सरीखे कालजयी व्यक्तित्व और कृतित्व के सम्मान में पूर्णिया की धरती पर यह अपेक्षा करना स्वाभाविक है. जिलाधिकारी को दिये ज्ञापन में समाज कल्याण मंत्री द्वारा 2014 में दिये गये निर्देशों का भी जिक्र किया गया है.
संस्थान की ओर से बताया गया है इससे पहले बिहार के मुख्य मंत्री नीतीश कुमार को भी इस बाबत लिखा गया है. युवाओं से अपील की गयी है कि अपनी भाषा और संस्कृति के लिए वे रचनात्मक पहल कर सकते हैं.
आज भले ही स्वरूप भिन्न हो पर यह सच है कि पूर्णिया मिथिलांचल की धरती है. ग्रामीण परिवेश में बोली जाने वाली भाषा और पर्व त्योहारों में गाए जाने वाले गीतों पर गौर करने पर भी इसका अंदाजा लगता है. विद्यापति स्मारक और उनकी प्रतिमा स्थापित किए जाने से इस भाषा और संस्कृति को संबल मिलेगा.
दिवाकांत झा, शिक्षक, पूर्णिया
अपने गौरवमय इतिहास और संस्कृति को जीवंत रखना हम सबका दायित्व है. यह क्षेत्र कभी मिथिलांचल का हिस्सा रहा है. यहां बोली और सुनी जाने वाली भाषा से भी इसका अंदाजा लगता है. विद्यापति इस संस्कृति के संवाहक माने जाते हैं और इस लिहाज से उनकी प्रतिमा व स्मारक बनाया जाना लाजिमी हो जाता है.
कुमारेंद्र, खुश्कीबाग, पूर्णिया
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