बिहार में कैसे सुधरेगी शिक्षा व्यवस्था? 268 में से 180 कॉलेजों में स्थायी प्राचार्य नहीं, प्रभारी के भरोसे काम

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 22 Apr 2023 1:01 AM

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बिहार के परंपरागत 12 विश्वविद्यालयों के 268 मौजूदा अंगीभूत कॉलेजों में से 180 कॉलेजों में स्थायी प्राचार्य नहीं हैं. यह कॉलेज प्रभारियों के भरोसे हैं. कई प्रभारी प्राचार्य तो दो या दो से अधिक अंगीभूत कॉलेजों का अतिरिक्त प्रभार भी लिये हैं.

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बिहार विश्वविद्यालय सेवा आयोग के जरिये प्राचार्यों के चयन कराने संबंधी शिक्षा विभाग के निर्णय के दो साल बाद भी नियुक्तियों की बात तो दूर विश्वविद्यालयों से रिक्तियों की जानकारी तक हासिल नहीं की जा सकी है, जबकि विभाग विश्वविद्यालयों को एक नहीं, कई बार रिमाइंडर भेज चुका है. हालात ये हैं कि बिहार के परंपरागत 12 विश्वविद्यालयों के 268 मौजूदा अंगीभूत कॉलेजों में से 180 कॉलेजों में स्थायी प्राचार्य नहीं हैं. यह कॉलेज प्रभारियों के भरोसे हैं. कई प्रभारी प्राचार्य तो दो या दो से अधिक अंगीभूत कॉलेजों का अतिरिक्त प्रभार भी लिये हैं. सबसे खराब स्थिति पटना विवि में है. यहां 10 अंगीभूत कालेजों में से नौ में स्थायी प्राचार्य नहीं है. सभी कालेजों में प्रभारी प्राचार्य से ही काम चल रहा है.

बिहार विश्वविद्यालय सेवा आयोग से होगी नियुक्ति

पांच साल के स्थायी कार्यकाल के लिए प्राचार्यों की नियुक्ति इस बार बिहार विश्वविद्यालय सेवा आयोग से कराने का प्रस्ताव है. प्राचार्यों की रिक्तियों देने में बेशक विश्वविद्यालयों की तरफ से आनाकानी की जा रही है, लेकिन शिक्षा विभाग प्राचार्यों की नियुक्तियों के लिए अभी तक परिनियम भी नहीं बना सका है. दरअसल बिहार में प्राचार्यों की नियुक्ति से पहले परिनियम में नियुक्ति की प्रक्रिया, अहर्ता और तमाम तकनीकी प्रावधान किये जाने हैं. परिनियम अभी आधा अधूरा बना हुआ है. इसमें विलंब की बहुत बड़ी वजह प्राचार्यों की योग्यता के पैमाने के पेच हैं. जिसमें एक्सपर्ट कमेटी में मतांतर है. इन मतांतरों के भी अपने मायने हैं. इसी तरह की मंशाएं विश्वविद्यालयों की भी हैं.

प्राचार्य का कार्यकाल एक कॉलेज में पांच साल

बिहार में अंगीभूत कॉलेजों में 1982 तक बिहार लोक सेवा आयोग के प्राचार्य नियुक्त किये जाते थे. कालांतर में विश्वविद्यालयों की कमेटी यह निर्णय करने लगी. यही नहीं प्राचार्यों के स्थानांतरण में मंजूर किये गये. इसमें भी ग्रेड का ध्यान नहीं रखा गया. यूजीसी ने प्राचार्य का कार्यकाल एक कॉलेज में पांच साल तय किया है.

  • विवि – कॉलेज की संख्या- प्रभारी प्राचार्य

  • पटना विश्वविद्यालय – 10- 9

  • पाटलिपुत्र विवि – 27- 20

  • जय प्रकाश विवि – 21- 8

  • मगध विवि – 19- 8

  • लनमि विवि – 44- 33

  • तिमां भागलपुर विवि – 12- 11

  • वीर कुंवर सिंह विवि – 17- 12

  • बीएन मंडल विवि – 16- 12

  • बीआरए बिहार विवि – 41- 26

  • मुंगेर विवि – 17- 17

  • पूर्णियां विवि – 13- 9

  • केएलडीएस विवि – 31-़ 15

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जल्द होनी चाहिए नियुक्तियां 

मुंगेर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपतिप्रो रणजीत कुमार वर्मा ने बताया कि बिहार की उच्च शिक्षा की बेहतरी के लिए स्थायी प्राचार्यों की जरूरत है. इस दिशा में नियुक्तियां जल्दी होनी चाहिए. साथ ही आने वाले प्राचार्यों को और अधिक अधिकार बढ़ाये जाने चाहिये. स्थायी प्राचार्य ही पठन-पाठन से लेकर प्रबंधन तक में कॉलेज के हित में निर्णय ले सकेंगे.

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