वैक्सीनेशन एक्सप्रेस देख भाग रहे हैं लोग, ग्रामीण बोले- एनी कहां छै कोरोना-फोरोना जे सुइया भोंक' आबि गेलौं...
Author : Prabhat Khabar News Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 01 Jun 2021 12:10 PM
कोरोना की लड़ाई में अब तक सबसे सशक्त हथियार वैक्सीन ही साबित हुआ है. लेकिन ग्रामीण इलाकों में अशिक्षा और जागरूकता का अभाव इसे सफल नहीं होने दे रहा है.
सहरसा. बनमा ईटहरी में कोरोना की लड़ाई में अब तक सबसे सशक्त हथियार वैक्सीन ही साबित हुआ है. लेकिन ग्रामीण इलाकों में अशिक्षा और जागरूकता का अभाव इसे सफल नहीं होने दे रहा है. यहां शत-प्रतिशत वैक्सीनेशन कराना किसी चुनौती से कम नहीं है. अब जब टीका लोगों के घर तक पहुंच रहा है तो लोग लगवाने से इंकार कर रहे हैं. वैक्सीन एक्सप्रेस जहां पहुंचती है. लोग वहां टीका लगवाने आते ही नहीं हैं.
26 मई को पीएचसी से कोरोना टीका एक्सप्रेस की शुरुआत बीडीओ चंद्रगुप्त बैठा एवं प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी संतोष कुमार संत ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. लेकिन जागरूकता के अभाव में 45 वर्ष से ऊपर के लोग वैक्सीन लेने से कतरा रहे हैं. पीएचसी स्तर से रवाना एक्सप्रेस को रविवार व सोमवार को कई जगहों से वापस लौटना पड़ा.
वैक्सीन एक्सप्रेस के घोड़दौर पंचायत के बारहपोखरिया टोला पहुंचते ही एक व्यक्ति ने कहा कि यहां सूइया देने क्यों आये हैं. जब स्वास्थ्य कर्मी ने कहा कि कोरोना को हराना है. इस पर उसे जवाब मिला कि यहां कहां है कोरोना. तभी एक महिला ने कहा कि डॉक्टर सब खुद सूइया नय लेलकै, हमरा सब के सूइया दै ल आयल छै. जा जा, झूठ के बेमारी घर नय बोलाना छै. दूसरी महिला ने कहा हम्में सूइया लेलिये, बड़ी कष्ट भेलै. न खायल जाय छै, न घूमल फिरल जाय छै.
टीम का नेतृत्व कर रहे डॉ लक्ष्मण सिंह ने महिलाओं को समझाया. लेकिन वे समझने को तैयार नहीं थी. आगे जाने पर एक महिला ने कहा कि 15 दिन पहले सुइया लै से गांव के एक आदमी बीमार होय गेलै. टीम ने उसका नाम पूछा तो महिला झेंप गई. स्वास्थ्य कर्मियों ने समझाया कि किसी भी गांव में सूई लेने से न तो कोई नहीं मरा है और न ही कोई बीमार हुआ है. लेकिन महिला नहीं ही मानी.
भगवानपुर, घोड़दौर, पहलाम में गली-गली घूमने के बावजूद भी टीका एक्सप्रेस को वैक्सीनेशन में सफलता नहीं मिली. लोगों ने कहा 100 रुपयो देभो तइयो न लेबै सूइया. डॉ लक्ष्मण कुमार ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में वैक्सीनेशन पहुंचने के बाद लोग रथ को देख भाग जाते हैं. हमारी टीम द्वारा घर-घर जाकर समझाना पड़ता है. बहुत समझाने पर इक्का-दुक्का लोग वैक्सीन लेते हैं.
उन्होंने कहा कि हमारी टीम को तरह-तरह की भ्रांतियां सुनने को मिलती है. बावजूद लोगों को समझाते हैं. लेकिन फिर भी लोग नहीं मानते हैं. उन्होंने बताया कि अब तक 60 लोगों को टीका एक्सप्रेस के माध्यम से 45 वर्ष से ऊपर के लोगों को वैक्सीन दिया गया. जो बहुत कम है. उन्होंने बताया कि विभिन्न गांव में जागरूकता के अभाव में पुरुष महिला वैक्सीनेशन के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं.
टीकाकरण रथ से किये जा रहे वैक्सीनेशन के प्रति अफवाह और उदासीनता को देखते हुए पीएचसी बनमा ईटहरी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी संतोष कुमार संत ने गांव की ही भाषा में लोगों से अपील करते हुए कहा कि सूइया से कोनो खतरा नै छै. कोरोना से यही बचैतै. सब काम छोर क पहने सूइया (टीका) लाय ल. प्रभारी ने कहा कि वैक्सीनेशन के प्रति तरह-तरह की अफवाह फैलाया गया है. जिसका कोई सिर पैर नहीं है.
शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में सात हजार से अधिकतर लोग वैक्सीनेशन करवा चुके हैं. किसी को कोई दिक्कत नहीं हुई है. इससे बड़ा उदाहरण क्या होगा. उन्होंने सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों को इस संदर्भ में जागरूकता अभियान चलाने की अपील की है.
Posted by Ashish Jha
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