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चंदन मिश्रा हत्याकांड: मुखिया का इकलौता बेटा कैसे बना गैंगस्टर? पिता के लाइसेंसी राइफल से किया था पहला मर्डर

Updated at : 18 Jul 2025 1:53 PM (IST)
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chandan mishra murder

अस्पताल में शूटर और लाल टीशर्ट में चंदन मिश्रा की फाइल फोटो

Chandan Mishra Murder Case: पटना के पारस अस्पताल में कुख्यात चंदन मिश्रा को गोलियों से छलनी कर मौत के घाट उतार दिया गया. चंदन मिश्रा बेहद कम उम्र में अपराध की दुनिया में उतर गया था. उसके पिता मुखिया रहे.

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पटना के पारस अस्पताल में बक्सर के गैंगस्टर चंदन मिश्रा को पांच शूटरों ने गोलियों से भून दिया. चंदन मिश्रा पैरोल पर जेल से बाहर आया था. इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती थी. गुरुवार को पांच शूटरों ने उसे गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया. चंदन मिश्रा दर्जनों हत्याकांड में आरोपित था. बक्सर के सोनबरसा गांव का रहने वाला चंदन अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था. उसके पिता दो बार मुखिया रह चुके हैं. चंदन ने 20 साल की उम्र में ही अपना गैंग बना लिया था. चंदन-शेरू की जोड़ी का काफी दहशत रहा. हालांकि पुलिस का दावा है कि उसके जिगरी दोस्त शेरू ने ही चंदन की हत्या करवा दी.

पिता मुखिया रहे, इकलौते बेटे की हत्या से बिखरा परिवार

चंदन मिश्रा बक्सर के औद्योगिक थाना क्षेत्र के सोनबरसा गांव का रहने वाला था. उसके पिता दो बार मुखिया और एकबार पैक्स अध्यक्ष रह चुके हैं. चंदन की मौत के बाद अब पूरा परिवार बिखर चुका है. चंदन मिश्रा का पैरोल शुक्रवार को खत्म होने वाला था. लेकिन गुरुवार को ही उसकी हत्या कर दी गयी. 15 दिन के पैरोल पर वह बेऊर जेल से बाहर आया था.

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20 साल से कम उम्र में ही अपराध की दुनिया में रखा कदम

चंदन मिश्रा ने 20 साल से कम उम्र में ही अपराध की दुनिया में कदम रख दिया था. उसने 2007 में अपने पिता के लाइसेंसी हथियार से भीम मिश्रा की हत्या गोली मारकर कर दी थी. इस मामले में वह जेल भी गया. पुलिस ने इस घटना के बाद उसके पिता के नाम से जारी लाइसेंसी हथियार को भी जब्त कर लिया था. चंदन मिश्रा को जमानत मिली तो उसने बाहर आकर शेरू सिंह से दोस्ती कर ली.

शेरू से हुई दोस्ती, अपराध की दुनिया में बढ़ते गए चंदन के कदम

वर्ष 2011 में चंदन और शेरू की जोड़ी बनी. इसी साल चूना कारोबारी राजेंद्र केसरी की हत्या करके यह जोड़ी चर्चे में आयी. कोलकाता से दोनों गिरफ्तार हुए थे. जब 2012 में बक्सर के कोर्ट में दोनों को पेश किया गया तो शेरू सिंह एक सिपाही को गोली मारकर भाग गया. सिपाही की हत्या करके फरार हुए शेरू को बाद में फांसी की सजा सुनायी गयी. हालांकि हाईकोर्ट के एक फैसले के बाद दोनों को उम्रकैद की सजा मिली.

पुलिस भी रहती थी अलर्ट, कड़ी सुरक्षा के बीच लेकर आती थी कोर्ट

चंदन पर 26 केस दर्ज थे. जिसमें एक केस में उसे उम्रकैद की सजा मिली था जबकि 6 केस का ट्रायल चल रहा था. बाकि केस में वह बरी हो चुका था. चंदन मिश्रा बक्सर में चूना कारोबारी की हत्या करके बिहार के मोस्टवांटेड अपराधियों की लिस्ट में शामिल हो गया था. शेरू और चंदन इतने खतरनाक थे कि कोर्ट में पेशी के लिए लाने के दौरान एक अलग बस और उसके साथ पायलट जीप भी चलाया जाता था. कोर्ट में ही पुलिसकर्मी की गोली मारकर हत्या करके शेरू एकबार भाग भी चुका था.

शेरू और चंदन बने दुश्मन, हत्या हुई और खत्म हुई चंदन की जिंदगी

चंदन और शेरू जिगरी दोस्त थे. लेकिन 2016 के बाद शेरू और चंदन के बीच किसी बात को लेकर दुश्मनी शुरू हो गयी थी. बक्सर सिविल कोर्ट परिसर में दोनों के बीच जमकर मारपीट भी हुई थी. इसके बाद दोनों एक-दूसरे से अलग हो गए. दोनों के अलग-अलग गैंग बन गए. चंदन के गैंग का असर अधिक नहीं रहा लेकिन शेरू का दबदबा उससे अधिक रहा. चंदन अपराध की दुनिया में गुमशुदा होने लगा था. चंदन की हत्या शेरू ने ही करवायी है, पुलिस को इसकी आशंका अधिक है. मामले की जांच चल रही है.

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ThakurShaktilochan Sandilya

लेखक के बारे में

By ThakurShaktilochan Sandilya

डिजिटल मीडिया का पत्रकार. प्रभात खबर डिजिटल की टीम में बिहार से जुड़ी खबरों पर काम करता हूं. प्रभात खबर में सफर की शुरुआत 2020 में हुई. कंटेंट राइटिंग और रिपोर्टिंग दोनों क्षेत्र में अपनी सेवा देता हूं.

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