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यूजीसी का सख्त निर्देश : समय पर हों परीक्षाएं, 180 दिनों में जारी हों डिग्री-प्रमाणपत्र

8 Dec, 2025 7:06 pm
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यूजीसी का सख्त निर्देश : समय पर हों परीक्षाएं, 180 दिनों में जारी हों डिग्री-प्रमाणपत्र

आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्तर पर देरी विद्यार्थियों के कैरियर को प्रभावित करती है, जिससे उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के अवसरों में बाधा उत्पन्न होती है.

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संवाददाता, पटना

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों को सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा है कि परीक्षाएं शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार समय पर आयोजित की जायें और परिणाम घोषित होने के 180 दिनों के भीतर अंतिम उपाधियां व प्रमाणपत्र अनिवार्य रूप से जारी किये जायें. आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्तर पर देरी विद्यार्थियों के कैरियर को प्रभावित करती है, जिससे उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के अवसरों में बाधा उत्पन्न होती है. यूजीसी ने यह निर्देश छात्रों की लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर जारी किया है. आयोग ने सभी राज्यों के उच्च शिक्षा विभागों, विश्वविद्यालयों और स्वायत्त संस्थानों को पत्र लिखकर परीक्षा संचालन और डिग्री वितरण की प्रक्रिया में अनुशासन सुनिश्चित करने को कहा है. पत्र में कहा गया है कि विद्यार्थी निर्धारित अकादमिक कैलेंडर के अनुसार परीक्षा देने, समय पर परिणाम प्राप्त करने और उपाधि हासिल करने के कानूनी व नैतिक हकदार हैं.

परीक्षा लेट होने पर कैरियर पर पड़ता है असर

आयोग के अनुसार कई संस्थानों में परीक्षाएं अनावश्यक रूप से टलती रहती हैं और परिणाम घोषित करने में भी महीनों की देरी होती है. इसका सीधा असर विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा में नामांकन, प्रतियोगी परीक्षाओं की पात्रता और रोजगार भर्ती प्रक्रियाओं पर पड़ता है. खासकर निजी क्षेत्र की भर्तियों और विदेशी विश्वविद्यालयों में प्रवेश के समय डिग्री व ट्रांस्क्रिप्ट की अनिवार्यता के कारण छात्रों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

रिजल्ट जारी होने के 180 दिनों के भीतर जारी हो डिग्री

यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि परिणाम घोषित होने के 180 दिनों के भीतर डिग्री और आवश्यक प्रमाणपत्र जारी करना संस्थानों की जिम्मेदारी है. यदि किसी विश्वविद्यालय या कॉलेज द्वारा इन निर्देशों की अनदेखी की जाती है, तो आयोग के पास दंडात्मक कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित है. इसमें चेतावनी, कारण बताओ नोटिस, मान्यता से जुड़े कदम और अन्य नियामक कार्रवाई शामिल हो सकती है.

सभी प्रक्रिया का डिजिटलीकरण करें : यूजीसी

आयोग ने विश्वविद्यालयों को यह भी निर्देश दिया है कि वे परीक्षा और परिणाम से संबंधित सभी प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण करें, ताकि पारदर्शिता बढ़े और समयबद्धता सुनिश्चित हो सके. विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम विकसित करने को कहा गया है, जिससे वे अपनी डिग्री और प्रमाणपत्र की स्थिति जान सकें. स्टूडेंट्स ने यूजीसी के इस कदम को छात्रों के हित में ऐतिहासिक बताया है. उनका कहना है कि समय पर परीक्षा और प्रमाणपत्र वितरण से न केवल संस्थानों की जवाबदेही बढ़ेगी, बल्कि छात्रों का विश्वास भी मजबूत होगा. विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय आंतरिक समय-सीमा तय करें और देरी की स्थिति में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाये. यूजीसी ने अंत में सभी संस्थानों से अपेक्षा जताई है कि वे इन निर्देशों का अक्षरशः पालन करें और विद्यार्थियों के भविष्य के साथ किसी भी तरह का समझौता न होने दें. आयोग का मानना है कि समयबद्ध अकादमिक व्यवस्था ही गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा की नींव है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ANURAG PRADHAN

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By ANURAG PRADHAN

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