बिहार में बिना निबंधन सड़कों पर दौड़ रही 50 हजार से अधिक गाड़ियां, तय समय में नहीं हो रहा रजिस्ट्रेशन

ऑनलाइन प्रक्रिया में अक्सर सॉफ्टवेयर में खराबी आ जाती है. सर्वर धीमा भी हो जाया करता है. इस कारण तय समय में गाड़ियों का निबंधन नहीं हो पा रहा है. निबंधन का काम तय समय में हो सके, इसके लिए केंद्र सरकार के स्तर पर लगातार पत्राचार किया जाता है.
पटना. परिवहन विभाग पूरी तरह से ऑनलाइन होने के बाद भी राज्य में 50 हजार से अधिक गाड़ी का निबंधन लंबित है. पोर्टल पर निबंधन नहीं होने से गाड़ी खरीदने के बाद भी लोग बिना निबंधन के ही सड़कों पर गाड़ी चलाने को बाध्य हैं. नियमानुसार 72 घंटों के भीतर निबंधन के मामले का निबटारा होना है पर इस अवधि में ऐसा नहीं हो पा रहा है. सबसे अधिक 15 हजार निबंधन पटना में लंबित है.
अधिकारियों के अनुसार निबंधन के 43 हजार 801 गाड़ियां फंसी है, जबकि टैक्स जमा करने के मामले में 120 गाड़ियां फंसी है. 2340 गाड़ियां ट्रेड सर्टिफिकेट और 4603 गाड़ियों को परमिट नहीं मिल सका है. डीलर के यहां 14 हजार 800 गाड़ियां तो दूसरे कारणों से 2348 गाड़ियां अटकी हुई है. जिला वार देखें तो सबसे अधिक पटना में 12 हजार 646 गाड़ियां ट्रांजक्शन के कारण अटकी हुई है. इसके बाद मुजफ्फरपुर में 3859, गया में 3636, बेतिया में 3619 और पूर्णिया में 3249 गाड़ियां रजिस्ट्रेशन के कारण अटकी हुई है. वहीं रजिस्ट्रेशन के मामले में पटना में 4715, बेतिया में 3186, बेगूसराय में 2229, मोतिहारी में 1776 और मुजफ्फरपुर में 1629 गाड़ियां अटकी हुई है.
इस वर्ष की बात करें तो पोर्टल पर पांच मिनट के अंदर 11 लाख 77 हजार 354 गाड़ियों का पैसा जमा हुआ. छह से 10 मिनट के भीतर एक लाख 83 हजार 600 तो 11 मिनट से दो घंटे के भीतर तीन लाख चार हजार 182 गाड़ियों का पैसा जमा हुआ. दो घंटे से 24 घंटे के भीतर दो लाख 66 हजार 149 गाड़ियों का पैसा जमा हुआ जबकि एक लाख 38 हजार 924 गाड़ियों का पैसा जमा होने में 24 घंटे से अधिक समय लगे.
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विशेषज्ञों के अनुसार पोर्टल राष्ट्रीय स्तर का है. बिहार सहित देशभर के वाहन मालिक उसी पोर्टल पर निबंधन या पैसा जमा करते हैं. ऑनलाइन प्रक्रिया में अक्सर सॉफ्टवेयर में खराबी आ जाती है. सर्वर धीमा भी हो जाया करता है. इस कारण तय समय में गाड़ियों का निबंधन नहीं हो पा रहा है. निबंधन का काम तय समय में हो सके, इसके लिए केंद्र सरकार के स्तर पर लगातार पत्राचार किया जाता है. साथ ही विभाग के स्तर पर भी कोशिश की जाती है कि अविलंब निबंधन की प्रक्रिया हो जाये.
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