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युगल के जन्मशती वर्ष पर डॉ अशोक भाटिया संपादित पुस्तक अंधेरे में गुम आदमी का हुआ विमोचन

Updated at : 10 Apr 2025 12:44 AM (IST)
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युगल के जन्मशती वर्ष पर डॉ अशोक भाटिया संपादित पुस्तक अंधेरे में गुम आदमी का हुआ विमोचन

प्रसिद्ध आलोचक- संपादक एवं साहित्यिक पत्रिका नई धारा के संपादक प्रो शिवनारायण ने कहा है कि स्व.युगल बिहार की माटी से जुड़े एक ऐसे रचनाकार थे, जिन्होंने अनेक कालजयी लघुकथाएं लिखीं और उनकी लघुकथा पेट का कछुआ हिंदी की सर्वश्रेष्ठ लघुकथा है. वे बुधवार को अखिल भारतीय प्रगतिशील लघुकथा मंच और श्रीअरविंद महिला कॉलेज स्नातकोत्तर हिंदी विभाग के संयुक्त सहयोग में युगल के जन्मशती वर्ष पर उनके साहित्य रचना संसार पर आयोजित राष्ट्रीय लघुकथा संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे थे.

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पटना के श्रीअरविंद महिला कॉलेज में एक दिवसीय राष्ट्रीय लघुकथा संगोष्ठी संपन्न

संवाददाता,पटना

प्रसिद्ध आलोचक- संपादक एवं साहित्यिक पत्रिका नई धारा के संपादक प्रो शिवनारायण ने कहा है कि स्व.युगल बिहार की माटी से जुड़े एक ऐसे रचनाकार थे, जिन्होंने अनेक कालजयी लघुकथाएं लिखीं और उनकी लघुकथा पेट का कछुआ हिंदी की सर्वश्रेष्ठ लघुकथा है. वे बुधवार को अखिल भारतीय प्रगतिशील लघुकथा मंच और श्रीअरविंद महिला कॉलेज स्नातकोत्तर हिंदी विभाग के संयुक्त सहयोग में युगल के जन्मशती वर्ष पर उनके साहित्य रचना संसार पर आयोजित राष्ट्रीय लघुकथा संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे थे.इससे पूर्व संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा, महाराष्ट्र के पूर्व कार्यकारी कुलपति प्रो कृष्ण कुमार सिंह ने कहा कि मनुष्य और समाज की संवेदनशीलता को बनाए रखने के लिए साहित्य का समृद्ध होना आवश्यक है. आधुनिक भौतिकवादी युग में मनुष्य और समाज से संवेदना लुप्त होती जा रही है. अंधेरे में गुम आदमी पुस्तक के संपादक एवं करनाल के चर्चित लघुकथाकार डॉ अशोक भाटिया ने कहा कि युगल जी लघुकथा के क्षेत्र में अविस्मरणीय योगदान किया। उन्होंने 350 से अधिक उत्कृष्ट लघुकथाएं लिखीं. लघुकथा कलश के संपादक योगराज प्रभाकर ने कहा कि रचनाकारों को संवेदना के साथ-साथ भाव और भाषा पर भी कार्य करने की जरूरत है.इस दौरान कॉलेज की छात्राओं ने युगल की तीन लघुकथाओं का नाट्य मंचन किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा.

शोध आलेख की हुई प्रस्तुति

चुनार उत्तर प्रदेश निवासी अखिल भारतीय प्रगतिशील लघुकथा मंच के अध्यक्ष डॉ राम दुलार सिंह पराया ने कहा कि रचनाकार समाज को राह दिखाने वाले होते हैं. उन्हें स्वांतः सुखाए के बजाए अपनी रचनाओं में सामाजिक विसंगतियों को शामिल करना चाहिए.जेपी विवि छपरा की पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो अनीता राकेश ने हिंदी लघुकथा का समकाल और युगल, राम यतन यादव ने हिन्दी लघुकथा के विकास में युगल का योगदान औरडॉ प्रिया कुमारी ने युगल का लघुकथा कर्म शोध आलेख प्रस्तुत किया.कार्यक्रम का संचालन करते हुए अखिल भारतीय प्रगतिशील लव कथा मंच के महासचिव डॉ ध्रुव कुमार ने इस पुस्तक के प्रकाशन की अशोक भाटिया को बधाई दी. उन्होंने कहा कि युगल जी अपनी दिखे एक महान रचनाकार थे जिन्होंने लघु कथा के आधारित कहानी उपन्यास कविता और अन्य विधाओं में भी अनेक कार्य किये. संगोष्ठी को झारखंड की सारिका भूषण, अरविंद महिला कॉलेज की प्राचार्य डॉ साधना ठाकुर, रूबी भूषण, विभा रानी श्रीवास्तव, रजनी प्रभा, सी रा प्रसाद, नीरजा कृष्णा, सतीश चंद्र भगत चितरंजन भारती, डॉ मनीष कुमार आदि ने भी संबोधित किया.संगोष्ठी के तीसरे सत्र में लघु कथा पाठ का आयोजन किया गया जिनमें सिद्धेश्वर, प्रभात कुमार धवन, अनिल रश्मि, गार्गी राय, पूनम कतरियार, ए आर हाशमी, श्रेया, अतुल राय, ऋचा वर्मा, सीमा रानी, आशुतोष मृणाल, आलोक चोपड़ा, कल्याणी कुसुम सिंह, मधुरेश नारायण, रवि श्रीवास्तव ने अपनी लघुकथाएं पढ़ी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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JUHI SMITA

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